तेल रिफाइनरियों से बहुत ज्यादा उत्सर्जन की आशंका : अध्ययन

रिफाइनरियां इसी तरह से काम करती रहीं, कार्बन को कम करने के उपाय नहीं अपनाए गए तो 2030 तक 16.5 गीगाटन तक सीओ2 उत्सर्जित होगा।

By Dayanidhi

On: Monday 23 August 2021
 
तेल रिफाइनरियों से बहुत ज्यादा उत्सर्जन की आशंका : अध्ययन
फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

पेट्रोलियम तेल शोधन या रिफाइनरी उद्योग दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा सबसे बड़ा स्थिर उत्सर्जक है। यह सभी औद्योगिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 6 फीसदी के लिए जिम्मेवार है।

एक वैश्विक फेहरिस्त से पता चला है कि 2018 में तेल रिफाइनरियों से 1.3 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) का उत्सर्जन हुआ था। यह 2020 से 2030 तक 16.5 गीगाटन जितना बड़ा हो सकता है। परिणामों के आधार पर, शोधकर्ता विभिन्न क्षेत्रों में लगे पुराने और नए रिफाइनरियों के लिए उत्सर्जन को कम करने की अलग-अलग रणनीतियों की सिफारिश करते हैं।

सिंघुआ विश्वविद्यालय के डाबो गुआन कहते हैं कि यह अध्ययन दुनिया भर में तेल शोधन (रिफाइनरी) क्षमता और सीओ2 उत्सर्जन की एक बड़ी तस्वीर पेश करता है। तेल शोधन (रिफाइनरी) उद्योग के अतीत और भविष्य के विकास के रुझानों को समझना क्षेत्रीय और वैश्विक उत्सर्जन में कमी के मार्गदर्शन के लिए महत्वपूर्ण है।  

दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन एक बुनियादी चुनौती बनकर सामने खड़ा है, जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा के बुनियादी ढांचे का निरंतर विस्तार पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाली प्रमुख बाधाओं में से एक है। तेल शोधन उद्योग ऊर्जा आपूर्ति और जलवायु परिवर्तन दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पेट्रोलियम तेल शोधन (रिफाइनरी) उद्योग दुनिया में ग्रीनहाउस गैसों का तीसरा सबसे बड़ा स्थिर उत्सर्जक है, जो सभी औद्योगिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 6 फीसदी के लिए जिम्मेवार है। विशेष रूप से, सीओ2 पेट्रोलियम रिफाइनरियों द्वारा उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैसों का लगभग 98 फीसदी हिस्सा है।

इस नए अध्ययन में गुआन और उनके सहयोगियों ने 2000 से लेकर 2018 तक 1,056 तेल रिफाइनरियों से सीओ2 उत्सर्जन की दुनिया भर में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूची बनाई। रिफाइनरी उद्योग से होने वाले सीओ2 उत्सर्जन 2018 में लगभग 1.3 गीगाटन था। यदि सभी मौजूदा और प्रस्तावित रिफाइनरियां इसी तरह से काम करती रहीं, कार्बन को कम करने के उपाय नहीं अपनाए गए तो 2020 से 2030 तक 16.5 गीगाटन तक सीओ2 उत्सर्जित कर सकते हैं।

रिफाइनरियों से होने वाले उत्सर्जन के मामले में कहां खड़े हैं अलग-अलग देश

2018 में, चीन की रिफाइनरियों ने 2,380.0 मीट्रिक टन सीओ2, या कुल 21 फीसदी के लिए जिम्मेवार था। जबकि भारत और मध्य पूर्व में रिफाइनरियां 1,721.6 मीट्रिक टन (कुल शेष का 15 फीसदी) और 1,545.8 मीट्रिक टन (कुल का 13 फीसदी) सीओ2 के लिए जिम्मेदार हैं। इसकी तुलना में, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के तेल शोधन क्षेत्र में सीओ2 उत्सर्जन क्रमशः 1,199.6 मीट्रिक टन और 811.4 मीट्रिक टन हैं।

स्रोत : वन अर्थ पत्रिका

निष्कर्षों के आधार पर, अध्ययनकर्ता रिफाइनरी की दक्षता में सुधार और भारी तेल-प्रसंस्करण तकनीकों को उन्नत करने जैसी रणनीतियों की सलाह देते हैं। संभावित रूप से 2020 से 2030 तक दुनिया भर में कुल उत्सर्जन का 10 फीसदी तक कम किया जा सकता है। अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि भविष्य में अधिक और बेहतर आंकड़े उपलब्ध होने पर इन्वेंट्री को अपडेट कर और बेहतर किया जाएगा। अध्ययन वन अर्थ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

अध्ययन से यह भी पता चला है कि प्रति दिन बैरल की तुलना करें तो दुनिया भर में तेल रिफाइनरियों का औसत उत्पादन धीरे-धीरे सन 2000 से 2018 लगातार बढ़ गया है। लेकिन रिफाइनरियों की आयु वर्ग के अनुसार परिणाम अलग-अलग थे। विशेष रूप से, नई रिफाइनरियों की औसत क्षमता, जो मुख्य रूप से एशिया-प्रशांत और मध्य पूर्व में अलग-अलग हैं। जिनमें 2000 से 2018 तक उल्लेखनीय रूप से बढ़ोतरी हुई, जबकि 19 वर्ष से ज्यादा पुरानी रिफाइनरियों की औसत क्षमता स्थिर रही।

गुआन कहते हैं कि नई रिफाइनरियों के लंबे समय तक परिचालन के कारण अधिक उत्सर्जन को देखते हुए, इन रिफाइनरियों को अपने सीओ2 उत्सर्जन को कम करने के लिए कम कार्बन तकनीकों को अपनाने की तत्काल आवश्यकता है।

मध्यम आयु वर्ग और पुरानी रिफाइनरियों के परिचालन दक्षता में सुधार, पिछली क्षमता को कम करने और रिफाइनिंग कॉन्फ़िगरेशन के उन्नयन में तेजी लाना बढ़ती मांग को संतुलित करने और सीओ2 उत्सर्जन को कम करने के प्रमुख साधन हैं।