वैश्विक कार्बन चक्र: अपेक्षा से अधिक सक्रिय है दक्षिणी महासागर की भूमिका

दक्षिणी महासागर पृथ्वी की जलवायु को नियमित करने में एक अहम भूमिका निभाता है। महासागर अतिरिक्त गर्मी का लगभग 75 फीसदी और वायुमंडल में अतिरिक्त वैश्विक कार्बन का 35 फीसदी जमा करता है।

By Dayanidhi

On: Monday 18 October 2021
 
वैश्विक कार्बन चक्र के मामले में दक्षिणी महासागर की भूमिका अपेक्षा से अधिक सक्रिय है
फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स

वैश्विक कार्बन चक्र को चलाने में दक्षिणी महासागर की भूमिका अपेक्षा से अधिक मजबूत है। अब अध्ययन में पाया गया है कि जैविक कार्बन पंप सर्दियों में बंद नहीं होता है जैसा कि पहले इस बारे में सोचा गया था।

दक्षिणी महासागर में किए गए अब तक के सबसे व्यापक शीतकालीन अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा कि बर्फीले ठंड और अंधेरी सर्दियों के महीनों में भी फाइटोप्लांकटन सक्रिय पाए गए। यह अध्ययन स्टेलेनबॉश विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ट्रेस एंड एक्सपेरिमेंटल बायोकेमिस्ट्री (ट्रेक्स) की अगुवाई में किया गया है।

इस तरह के निष्कर्ष भविष्य में पूर्वानुमान लगाने वाले वैश्विक जलवायु मॉडल के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो वर्तमान में मुख्य रूप से वसंत और गर्मियों के मौसम पर आधारित हैं। सर्दियों के आंकड़ों को जोड़ने के साथ, मॉडल अब मौसम के दौरान वायुमंडल से महासागर के कार्बन की अदला बदली के चक्र का बेहतर तरीके से पता लगा सकते हैं। वैज्ञानिकों के लिए, यह जलवायु परिवर्तन के प्रति हो रहे इस तरह के बदलाव की संवेदनशीलता का विश्लेषण करने की दिशा में एक सफल कदम है।

फाइटोप्लांकटन सूक्ष्म, एकल कोशिका वाले पौधे जैसे जीव हैं जो ज्यादातर महासागरों के शीर्ष 100 मीटर में फैले होते हैं। ऊर्जा और विघटित अकार्बनिक पोषक तत्वों के लिए सूर्य के प्रकाश का उपयोग करते हुए, फाइटोप्लांकटन कार्बन डाइऑक्साइड को कार्बनिक कार्बन में परिवर्तित करते हैं और समुद्री खाद्य वेब या प्रणाली का आधार बनाते हैं। यह पाया गया है कि फाइटोप्लांकटन ग्रह के कार्बन और कार्बन डाइऑक्साइड के चक्र में बदलाव करने में उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि दुनिया के सभी भूमि में उगने वाले पौधों होते हैं। 

अध्ययनकर्ता डॉ रयान क्लोएट कहते हैं कि उनके निष्कर्ष सामान्य दृष्टिकोण के विपरीत हैं जिसमें कहा गया था कि दक्षिणी महासागर सर्दियों के दौरान जैविक रूप से निष्क्रिय हो जाता है।

यह विकास की प्रतिकूल स्थितियों के कारण शरद ऋतु के दौरान पेड़ों से गिरने वाली पत्तियों के समान है, इसमें यह माना जाता था कि सर्दियों के दौरान फाइटोप्लांकटन भी सक्रिय नहीं होते हैं। हमारे प्रमुख निष्कर्षों में से एक यह है कि फाइटोप्लांकटन वास्तव में दक्षिण महासागर में सर्दियों के दौरान सक्रिय होते हैं, हालांकि उस तरह से नहीं जैसे हम गर्मियों में इन्हें देखते हैं। फाइटोप्लांकटन कैसे सर्दियों की परिस्थितियों में अपने आपको ढालते हैं। अध्ययनकर्ता ने कहा हमारा शोध पोषक तत्वों के लिए अनुकूलन रणनीतियों का पता लगाने में पहला कदम है।

अध्ययनकर्ता ने कहा आज तक, वैज्ञानिकों को उन स्थितियों के बारे में बहुत कम समझ है जो सर्दियों के दौरान दक्षिणी महासागर में विशेष विशेषता रखते हैं। यह मुख्य रूप से शून्य तापमान में महासागर का नमूना लेने की चुनौती के कारण है, इस दौरान आंधी जैसी तेज हवाओं और 20 मीटर तक की लहरों का सामना करना पड़ता है। शुरुआती नाविकों ने दक्षिणी महासागर के इस हिस्से को 40 से 60  डिग्री दक्षिण में "रोअरिंग फोर्टीज़" के बीच "फ्यूरियस फिफ्टीज़" और "स्क्रीमिंग सिक्सटीज़" के बाद इन्हें ये नाम दिए हैं।

डॉ क्लोएटे का कहना है कि दक्षिणी महासागर पृथ्वी की जलवायु को नियमित करने में एक मौलिक रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अनुमान है कि वैश्विक महासागरीय अतिरिक्त गर्मी का लगभग 75 फीसदी और वायुमंडल में अतिरिक्त वैश्विक कार्बन का 35 फीसदी जमा करता है। दक्षिणी महासागर एकमात्र ऐसा महासागर है जो तीन प्रमुख महासागरीय घाटियों यानी प्रशांत, अटलांटिक और हिंद महासागरों को सीधे जोड़ता है। दूसरे शब्दों में, दक्षिणी महासागर में जो होता है उसका प्रभाव वैश्विक महासागर पर पड़ता है।

यह वैश्विक प्रक्रिया थर्मोहेलिन प्रसार नामक प्रक्रिया के माध्यम से संचालित होती है। यहां बताते चलें  कि 'थर्मो' का अर्थ है गर्मी और 'हेलिन' का अर्थ लवणता। ध्रुवों पर, ठंडा और घना सतही समुद्री जल गहरे समुद्र में चला जाता है, जहां से यह बड़ी महासागरीय धाराओं में बहता है और अंततः गर्म अक्षांशों में मिश्रण और हवा से चलने वाले उभार के माध्यम से सतह पर लौट आता है। वैज्ञानिक इसे महान महासागरीय कन्वेयर बेल्ट कहते हैं और पानी को इस यात्रा को पूरा करने में लगभग एक हजार साल लग सकता है। इसलिए दक्षिणी महासागर एक केंद्र के रूप में कार्य करता है जिससे अंदर की ओर बहने वाले पानी में बदलाव होता है और यह फिर पूरे वैश्विक महासागर में से मिल जाता है।

डॉ क्लोएटे का कहना है कि जैविक चरण निर्धारित करने के लिए दक्षिणी महासागर में सर्दियों का मौसम वसंत और गर्मियों के मौसम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्दियों में, तेज तूफान और हवाएं एक अधिक अस्थिर सतह परत बनाने का काम करती हैं जो स्थिर गर्मी की सतह के पानी के नीचे प्रवेश करती है, जो अब बढ़ते मौसम के बाद पोषक तत्वों में मिल जाते हैं। यह ऊपरी सतह के पानी में पाए जाने वाले पोषक तत्वों से भरपूर पानी के साथ मिल जाता है। धूप के घंटों और शांत समुद्रों की मदद से, सतह पर पोषक तत्वों की यह शीतकालीन उत्प्रेरित और बनाए रखने में मदद करती है वसंत और गर्मियों में फाइटोप्लांकटन खिलता है, जो बदले में व्हेल, डॉल्फिनऔर पेंगुइन को उत्तर की ओर से दक्षिणी महासागर के खाने की ओर आकर्षित करता है।

एसयू में पर्यावरण और समुद्री जैव-भू-रसायन के विशेषज्ञ और ट्रेक्स शोध समूह के प्रमुख, प्रोफेसर अलकेंद्र रॉय चौधरी कहते हैं कि निष्कर्ष जलवायु और समुद्री खाद्य वेब या प्रणाली को नियमित करने में दक्षिणी महासागर के वैश्विक प्रभाव की पुष्टि करते हैं। यह अध्ययन मरीन केमिस्ट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

पृथ्वी प्रणाली जलवायु परिवर्तन के असर को समाप्त करने के लिए स्व-सुधार प्रतिक्रिया के साथ रासायनिक और जैविक प्रक्रियाएं करती हैं। हमारा शोध इस प्रणाली का एक प्रमुख उदाहरण है जहां पानी और सूक्ष्मजीवों के मिलने पर सूक्ष्म स्तर पर होने वाली जैव रासायनिक प्रक्रियाएं बड़े पैमाने पर महासागर के प्रसार और मिश्रण को प्रभावित करती हैं।

यह समझना मुश्किल है कि ये सूक्ष्म प्रक्रियाएं हमारी धरती के गर्म होने जैसी वैश्विक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती हैं क्योंकि अक्सर हमारे पास जुड़ी प्रक्रियाओं और उनके बारे में जानकारी की कमी होती है।