Sign up for our weekly newsletter

मनरेगा का हाल: हिमाचल के इस जिले में 1.85 प्रतिशत लोगों को ही मिला 100 दिन का काम

बेरोजगारी में तीसरे नंबर पर होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत 100 दिन का रोजगार नहीं दिया जा रहा है  

On: Monday 09 March 2020
 
हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत काम करती स्थानीय महिलाएं। फोटो: रोहित पराशर
हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत काम करती स्थानीय महिलाएं। फोटो: रोहित पराशर हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत काम करती स्थानीय महिलाएं। फोटो: रोहित पराशर

रोहित पराशर

चीन की सीमा के साथ सटा लाहौल-स्पीति जिला क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला है। छह माह तक बर्फ से ढके रहने वाले इस जिले में न ही तो कोई औद्योगिक क्षेत्र और न ही तो रोजगार की अधिक संभावनांए हैं। ऐसे में बेरोजगारों को रोजगार देने के मकसद से शुरू की गई महात्मा  गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) इस क्षेत्र के लोगों के लिए एकमात्र सहारा है। लेकिन मनरेगा के तहत भी क्षेत्र के लोगों को तय मानकों के आधार पर 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पा रहा है।

यह भी पढ़ें: मनरेगा का हाल: इस जिले में केवल एक परिवार को मिला 100 दिनों का रोजगार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार हिमाचल के इस कबाईली जिले में वर्ष 2019-20 में 5,186 लोगों ने रोजगार मांगा था, जिनमें से केवल 95 लोगों (1.83 प्रतिशत) को ही 100 दिन का रोजगार मिल पाया है। जबकि इसी साल रोजगार पाने के लिए इस जिले में 399 नए बेरोजगार लोगों ने रोजगार के लिए अपना नाम रजिस्टर करवाया है। वहीं अगर वर्ष 2018-19 की बात की जाए तो तब इस जिले में केवल 74 परिवारों और वर्ष 2017-18 में केवल 42 परिवारों को 100 दिन का रोजगार दिया गया है।

यह भी पढ़ें: मनरेगा का हाल: बिहार के प.चंपारण में सिर्फ 8 लोगों को मिल पाया 100 दिन का रोजगार

इसी तरह अगर हिमाचल की बात की जाए तो वर्ष 2019-20 में 11 लाख 8 हजार एक्टिव वर्कर में से 7,62,750 लोगों ने रोजगार मांगा था, जिनमें से 6,60,186 लोगों को रोजगार दिया गया है। इसमें से से  केवल 45,259 परिवारों (6.85 प्रतिशत) को ही 100 दिन का रोजगार मुहैया करवाया गया है। जबकि वर्ष 2018-19 में 12,43,393 जॉब कार्ड धारकों में से 8,03,613 ने काम मांगा था और इनमें से 7,36,078 लोगों को ही रोजगार दिया गया और केवल 70,321 परिवारों (9.55 प्रतिशत) को 100 दिन का रोजगार दिया गया।

यह भी पढ़ें: बजट 2020-21: मनरेगा के आवंटन में 15 फीसदी की कमी, कैसे सुधरेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था?


साल दर साल लोगों को 100 दिनों का काम देने को लेकर आ रही कमी से लोगों का इस महत्वकांक्षी योजना से मोह भंग होता जा रहा है। वहीं हिमाचल में दिनोंदिन बढ़ती बेरोजगारी की समस्या के चलते बेरोजगार युवक डिप्रेशन के शिकार होते जा रहे हैं।

सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की फरवरी 2020 में आई रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश बेरोजगारी में देशभर में तीसरे स्थान पर है। हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में 8,49,891बेरोजगार रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत हैं। वहीं इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में हिमाचल में 1,50,000 नए बेरोजगार पंजीकृत हुए हैं। रिपोर्ट में हिमाचल में बेरोजगारी दर 20.2 फीसदी है जो कि राष्ट्रीय दर 7.7 फीसदी से लगभग तीन गुनी है।

सीटू के राज्य अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा का कहना है कि सरकारें इस महत्वकांक्षी योजना को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है, इसके बावजूद सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार मुहैया करवाने के लिए काम नहीं किया जा रहा है। सरकार को चाहिए कि वे मनरेगा के तहत लोगों को कम से कम 100 दिन का रोजगार मुहैया करवाया जाए ताकि उन्हें रोजगार मिलने के साथ इस योजना के तहत मिलने वाली अन्य सुविधांए भी मिल सकें।