सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित हैं दुनिया के 410 करोड़ लोग

55 फीसदी जरूरतमंद महिलाओं को नकद मातृत्व लाभ नहीं मिलता है। इसी तरह गंभीर रूप से विकलांग 66.5 फीसदी लोग विकलांगता योजनाओं के लाभ से वंचित हैं

By Lalit Maurya

On: Thursday 02 September 2021
 

भले ही कोविड-19 संकट के दौरान दुनिया भर में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है, लेकिन इसके बावजूद अभी भी 410 करोड़ लोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। यह जानकारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट 'वर्ल्ड सोशल प्रोटेक्शन रिपोर्ट 2020-22' में सामने आई है।  

दुनिया की केवल 47 फीसदी आबादी को ही प्रभावी रूप से कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिल रहा है, जबकि करीब 53 फीसदी (410 करोड़ लोग) योजनाओं और मिलने वाले लाभ से पूरी तरह से वंचित हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 महामारी ने न केवल उच्च और निम्न आय वाले देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा को लेकर जो खाई है, उसे न केवल उजागर किया है बल्कि और बढ़ा दिया है। इस महामारी के असर को कम करने के लिए देशों द्वारा जो जरुरी कदम उठाए गए थे उनमें काफी असमानता थी। यही नहीं वो सभी जरुरतमंद लोगों तक सामाजिक सुरक्षा देने में विफल रही थी।

क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो जहां यूरोप और मध्य एशिया में 84 फीसदी आबादी कम से एक सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ ले रही थी। वहीं अमेरिका में यह पहुंच 64.3 फीसदी आबादी तक थी, जबकि एशिया और प्रशांत क्षेत्र में यह 44 फीसदी, अरब राष्ट्रों में 40 फीसदी और अफ्रीका में केवल 17.4 आबादी को ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। 

गौरतलब है कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में स्वास्थ्य देखभाल से लेकर आय सुरक्षा तक को शामिल किया गया है। जिसमें विशेष रूप से वृद्धावस्था, बेरोजगारी, बीमारी, विकलांगता, काम के दौरान चोट, मातृत्व, परिवार में आय अर्जन करने वाले की मृत्यु पर उसके परिवार और बच्चों को दी जाने वाली सहायता शामिल है।    

केवल चार में से एक बच्चे को मिल रहा है सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ

यदि बच्चों की बात करें तो दुनिया में अधिकांश बच्चों के लिए प्रभावी सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट से पता चला है कि हर चार में से केवल एक बच्चे (26.4 फीसदी) को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल पाता है। वहीं 45 फीसदी जरूरतमंद महिलाओं को ही नकद मातृत्व लाभ मिलता है, जबकि केवल 33.5 फीसदी गंभीर रूप से विकलांग लोगों को ही विकलांगता लाभ मिलता है। इसी तरह बेरोजगार लोगों को मिलने वाला लाभ भी बहुत कम लोगों तक पहुंच पाता है। 

अनुमान है कि दुनिया में केवल 18.6 फीसदी बेरोजगारों को इस योजना का प्रभावी रूप से लाभ मिल रहा है। हालांकि 77.5 फीसदी उम्रदराज लोगों को किसी न किसी रूप में वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा है। यदि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को देखें तो उनमें भी इन योजनाओं तक पहुंच में काफी असमानता है।  इसी तरह महिलाओं और पुरुषों के बीच भी सामाजिक सुरक्षा को लेकर काफी असमानताएं हैं। 

यहां भी है अमीर और गरीब के बीच की खाई

यदि इन सामाजिक सुरक्षा पर सरकारों द्वारा किए जा रहे खर्च को देखें तो इसमें भी अमीर और गरीब देशों के बीच काफी असामनता है। एक और जहां अमीर देश अपने जीडीपी का 16.4 फीसदी हिस्सा इन योजनाओं पर खर्च कर रहे हैं वहीं कम आय वाले देशों के लिए यह आंकड़ा केवल 1.1 फीसदी ही है।  वहीं यदि वैश्विक औसत को देखें तो सामाजिक सुरक्षा पर किया जा रहा खर्च जीडीपी का औसतन करीब 12.8 फीसदी है। हालांकि इसमें स्वास्थ्य पर किए जा रहे खर्च को शामिल नहीं किया गया है। 

रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि सभी के सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जितने वित्त की जरुरत है वो काफी काम है। अनुमान है कि कोविड-19 महामारी की शुरुवात के बाद से इसमें करीब 30 फीसदी की वृद्धि हो चुकी है। 

अनुमान है कि सभी को बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देने के लिए निम्न आय वाले देशों को हर वर्ष करीब और 5.69 लाख करोड़ रुपय (7,790 करोड़ डॉलर) की जरुरत होगी, जोकि उनकी जीडीपी का 15.9 फीसदी के बराबर है। इसी तरह निम्न-मध्यम-आय वाले देशों के लिए करीब 26.5 लाख करोड़ रुपए (36,290 करोड़ डॉलर), जीडीपी का 5.1 फीसदी और माध्यम-उच्च आय वाले देशों के लिए करीब और 54.8 लाख करोड़ रुपए (75,080 करोड़ डॉलर) की जरुरत होगी, जोकि उनकी जीडीपी के 3.1 फीसदी हिस्से के बराबर है। 

सामाजिक सुरक्षा के बारे में अपनी राय प्रकट करते हुए आईएलओ के महानिदेशक गाय राइडर ने कहा कि “हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि प्रभावी और व्यापक सामाजिक सुरक्षा ने केवल सामाजिक न्याय और अच्छे कार्यों के लिए बल्कि साथ ही यह एक बेहतर भविष्य के लिए भी आवश्यक है।“

वहीं आईएलओ की सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक, शाहरा रजवी का कहना है कि सामाजिक सुरक्षा एक महत्वपूर्ण  उपकरण है जो विकास के सभी स्तरों पर देशों के लिए व्यापक सामाजिक और आर्थिक लाभ पैदा कर सकता है। यह स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता, बेहतर और मजबूत आर्थिक प्रणाली, बेहतर तरीके से प्रबंधित प्रवास और मूल अधिकारों को सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं। यही नहीं इन योजनाओं का लाभ राष्ट्रीय सीमाओं से परे सभी जरूरतमंदों तक पहुंचेगा।