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सतत विकास लक्ष्यों को हासिल में सबसे पीछे है यूपी-बिहार

सतत विकास के 13 सूत्री लक्ष्यों में से उत्तर और बिहार आठ लक्ष्यों को हासिल करने में काफी पीछे है

By Raju Sajwan

On: Thursday 13 June 2019
 

दुनिया को सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 2030 तक हासिल करने हैं, लेकिन इस दौड़ में भारत पीछे चल रहा है और इसके लिए उत्तर प्रदेश, बिहार सहित कुछ राज्य ज्यादा जिम्मेवार हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट द्वारा जारी “स्टेट ऑफ एनवायरमेंट इन फिगर्स 2019” रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक के लिए तय किए गए सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में उत्तर प्रदेश, बिहार और असम सबसे कम तैयार हैँ। 13 सूत्री लक्ष्यों में से उत्तर और बिहार आठ लक्ष्यों को हासिल करने में काफी पीछे है, जबकि आसाम छह लक्ष्यों को हासिल करने में पीछे है।  

सतत विकास का पहला लक्ष्य गरीबी का अंत है। इस लक्ष्य को हासिल करने में तमिलनाडु, मिजोरम, पुडुचेरी व त्रिपुरा का प्रदर्शन अच्छा है, जबकि झारखंड, मणिपुर, मध्य प्रदेश, दादरा और नागरा हवेली का प्रदर्शन काफी खराब है।

सतत विकास का लक्ष्य भूख का अंत है। इस लक्ष्य को हासिल करने में गोवा, मणिपुर और दिल्ली का प्रदर्शन अब तक बेहतर है, लेकिन झारखंड, बिहार, अंडमान एवं निकोबार का प्रदर्शन काफी ख्रराब है।

अच्छी सेहत का लक्ष्य तीसरा है, इसे हासिल करने में केरल, तमिलनाडु एवं पुडुचेरी का प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन उत्तर प्रदेश, असम और चंडीगढ़ का  प्रदर्शन काफी खराब है।

गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल करने में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन केरल का है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ का नंबर आता है। जबकि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का लक्ष्य हासिल करने के मामले में बिहार का प्रदर्शन सबसे ज्यादा खराब है। इसके अलावा मेघालय, दमन व दीव का नंबर आता है।

लैंगिक समानता का लक्ष्य हासिल करने में भी केरल का प्रदर्शन अव्वल है। इसके बाद सिक्किम, अंडमान व निकोबार का नंबर है, जबकि इस मामले में भी बिहार का प्रदर्शन सबसे खराब है। मणिपुर, पुडुचेरी उसके बाद आते हैं।

स्वच्छ जल और स्वच्छता का लक्ष्य हासिल करने में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन गुजरात का है, इसके बाद छत्तीसगढ़ चंडीगढ़, दादर नागर हवेली और लक्षदीप का प्रदर्शन बेहतर है, लेकिन इस मामले में भी बिहार फिसड्डी है। जबकि त्रिपुरा और पुडुचेरी का प्रदर्शन भी खराब है।

सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा का लक्ष्य हासिल करने में तमिलनाडु, मिजोरम, चंडीगढ़ का प्रदर्शन बेहतरीन है, जबकि मेघालय, असम और दिल्ली का प्रदर्शन खराब है।

अच्छे कार्य और आर्थिक विकास के मामले में गोवा, आंध्रप्रदेश, दमन दीव का प्रदर्शन बेहतर है। जबकि मणिपुर, नागालैंड, लक्षदीप, अंडमान निकोबार का प्रदर्शन खराब है।

उद्योग, अन्वेषण और ढांचागत विकास का लक्ष्य हासिल करने में मणिपुर, केरल, दिल्ली और पुडुचेरी का प्रदर्शन बेहतरीन है, जबकि नागालैंड, मिजोरम, गोवा, लक्षदीप, दमन दीव अंडमान निकोबार का प्रदर्शन ख्रराब है।

असमानता घटाने में मेघालय, मिजोरम, तेलंगाना, दादरा नागर हवेली, दमन और लक्षदीप का प्रदर्शन बेहतरीन है, जबकि उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन इस लक्ष्य का हासिल करने में काफी खराब है। उत्तर प्रदेश की ही तरह अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ का प्रदर्शन भी खराब है।

सतत विकास का नौंवा लक्ष्य समावेशी शहर और समुदाय है। इसे हासिल करने में गोवा, सिक्किम, अंडमान निकोबार का प्रदर्शन बेहतरीन है, जबकि जम्मू, पश्चिम बंगाल, दादरा नागर हवेली का प्रदर्शन खराब है।

सतत विकास का एक अहम लक्ष्य धरती पर जीवन है। इसे हासिल करने में असम, छत्तीसगढ़, गोवा, मणिपुर, उड़ीसा, उत्तराखंड, दादरा नागर हवेली व लक्षदीप का प्रदर्शन बेहतरीन है। जबकि हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पुडुचेरी का प्रदर्शन खराब है।

राज्य में शांति न्याय और संस्थाओं की मजबूती भी सतत विकास का अहम लक्ष्य है। इसे हासिल करने में हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी का प्रदर्शन बेहतरीन है, जबकि असम, मेघालय, दादरा नागर हवेली का प्रदर्शन खराब है।