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मिंटो ब्रिज हादसा: राजधानी की पांच एजेंसियों में से दोषी कौन?

19 जुलाई को हुई भारी बारिश के बाद राजधानी दिल्ली के मिंटो ब्रिज अंडरपास पर जो हादसा हुआ, उसने राजधानी की प्लानिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं

On: Sunday 19 July 2020
 
राजधानी दिल्ली में 19 जुलाई को हुई भारी बारिश की वजह से मिंटो ब्रिज अंडर पास पर पानी भर गया, जिसमें एक बस डूब गई। फोटो: twitter.com/mohulsharmaa
राजधानी दिल्ली में 19 जुलाई को हुई भारी बारिश की वजह से मिंटो ब्रिज अंडर पास पर पानी भर गया, जिसमें एक बस डूब गई। फोटो: twitter.com/mohulsharmaa राजधानी दिल्ली में 19 जुलाई को हुई भारी बारिश की वजह से मिंटो ब्रिज अंडर पास पर पानी भर गया, जिसमें एक बस डूब गई। फोटो: twitter.com/mohulsharmaa

जगदीश ममगांई

मिंटो रोड पर ‘मिंटो ब्रिज’ (नया नाम शिवाजी ब्रिज) के नाम से वर्ष 1933 में निर्मित रेलवे ब्रिज का इतिहास जितना पुराना है, लगभग उतनी ही पुरानी यहां पर जलभराव की समस्या भी है। ब्रिज के नीचे से गुजरने वाली सड़क ‘मिंटो रोड’ काफी महत्वपूर्ण है। यह लुटियंस दिल्ली, कनॉट प्लेस को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन (अजमेरी गेट की तरफ) व सिविक सेंटर, पहाड़गंज आदि से जोड़ता है। जब एडविन लुटियन व बेकर जैसे नामचीन ब्रिटिश वास्तुकार नई दिल्ली का शानदार निर्माण कर रहे थे, उस दौर में लुटियंस दिल्ली की सीमा पर निर्मित 213 मीटर की ऊंचाई वाला यह रेलवे ब्रिज और अंडरपास औपनिवेशिक काल की ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण निर्मित धरोहरों में से एक है।

दिल्ली में जब भी वर्षा होती है मिंटो ब्रिज अंडरपास पर जलभराव जरूर होता है जिसके कारण न केवल जनजीवन अस्त - व्यस्त हो जाता है बल्कि व्यवस्था भी विफल हो जाती है। राजनैतिक दल और दिल्ली सरकार व नगर निगम के बीच एक-दूसरे पर आरोप - प्रत्यारोप चस्पाने का खेल शुरू हो जाता है, बरसात का मौसम निपटा और सबके मुंह पर ताला चिपका, फिर कोई इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेने एवं  समाधान के प्रति संजीदा नजर नहीं आता है।

वास्तव में अंडरपास के शुरू होने के बाद से ही जल निकास के प्रभावी प्रबन्धन के अभाव में मानसून में जलभराव का संकट प्रारम्भ हो गया था। 60 साल से अधिक समय से चले आ रहे मिंटो ब्रिज के जलभराव का स्थायी समाधान नहीं हुआ, जबकि दिल्ली के सभी दलों को शासन करने का मौका मिला। वर्ष 1958 में पहली बार दिल्ली नगर निगम के चुनाव हुए और जल-मल, विद्युत, स्वच्छता आदि नवगठित दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आ गया, मिंटो रोड जिस पर यह अंडरपास था उसके रखरखाव व जलनिपटान की जिम्मेदारी भी निगम की बन गई।

दिल्ली नगर निगम ने मिंटो ब्रिज के अंडरपास की जलभराव की समस्या के प्रति गंभीरता दिखाते हुए इसके निष्पादन के लिए पांच पानी पंपों का प्रावधान किया, मानसून में जब जलभराव होता निगमकर्मी पंपों के द्वारा पानी निकाल देते थे। समय के साथ बढ़ती जनसंख्या व वाहन और इसके साथ बहते नाले पर हुए बेलगाम अनधिकृत निर्माण ने जल निकासी की प्रक्रिया कठिन बना दी है।

दरअसल मिंटो ब्रिज अंडरपास की ओर कनॉट प्लेस व सिविक सेटर से आने वाली दोनों तरफ की सड़क काफी ऊंची हैं जिनका पानी बह कर अंडरपास पर इकट्ठा हो जाता है, जिसमें रेल पटरी से आने वाला पानी और वृद्धि करता है। वर्ष 2010 में भी यहां जलभराव की स्थिति काफी विकट हुई थी, तब दिल्ली नगर निगम के निर्माण विभाग द्वारा पहचानी गई जलभराव साइटों पर जलभराव को रोकने के लिए अतिरिक्त पानी पंपों के साथ अग्रिम योजना तैयार की गई। इसमें सूचीबद्ध मिंटो ब्रिज अंडरपास पर निगमकर्मी द्वारा चौबीसों घंटे (राउन्ड द क्लाक) क्रियान्वित पंपिग स्टेशन स्थापित किया गया।

वर्ष 2012 में दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत आने वाली 60 मीटर तक की सड़कों का रखरखाव दिल्ली सरकार ने पीडब्लयूडी के अधीन कर दिया, जिसमें मिंटो रोड भी शामिल थी। सुप्रीम कोर्ट व दिल्ली हाई कोर्ट भी दिल्ली के जलभराव विशेषकर मिंटो ब्रिज अंडरपास के जलभराव पर संज्ञान लेते हुए सख्त टिप्पणी कर चुके हैं। दिल्ली में ब्रिटिश दौर व उसके बाद के समय में निर्मित अन्य कई पुलों का पुनर्निमाण हुआ, एक बड़े हिस्से को चौड़ा किया गया था, लेकिन वर्ष 1933 से निर्मित मिंटो ब्रिज के ऐतिहासिक स्वरूप को देखते हुए, इसके लिए कुछ भी नहीं बदला है।

दिल्ली में, 2010 राष्ट्रमंडल खेल के आयोजन के मद्देनजर राजधानी दिल्ली का अंतर-राज्य परिवहन प्रबन्धन बेहतर करने की दृष्टि से रेलवे ने दो अतिरिक्त रेलवे ट्रैक निर्माण करने का निर्णय लिया, पुल के ठीक नीचे अंडरपास की सड़क तुलनात्मक संकरी होने का संज्ञान लेते हुए इसको चौड़ा करने का प्रस्ताव भी दिया। चौड़ीकरण की लागत को दिल्ली नगर निगम, रेलवे और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) द्वारा साझा किया जाना था, क्योंकि क्षेत्र का एक हिस्सा एमसीडी के अंतर्गत और दूसरा एनडीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आता था।

योजना के अनुसार, दिल्ली नगर निगम और एनडीएमसी को पुनर्विकास और उनके अधीन क्षेत्रों को चौड़ा करना था, उम्मीद बनी कि इस प्रक्रिया में जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा परन्तु उत्तर रेलवे और एनडीएमसी की निष्क्रियता व योजना को लटकाने के कारण कारण मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

19 जुलाई 2020 को तो मिंटो ब्रिज अंडरपास का जलभराव पिथौरागढ़ निवासी कुंदन सिंह की जान ले चुका है, समय की मांग है कि जलभराव की इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है और इसके लिए राज्य पीडब्ल्यूडी, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, एनडीएमसी व रेलवे को मिलकर योजना बनानी होगी।

लेखक जगदीश ममगांई दिल्ली के इतिहास, विकास व प्रशासनीय प्रबन्धन पर तीन पुस्तकें लिख चुके हैं और वह एकीकृत दिल्ली नगर निगम के निर्माण समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं