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बैठे-ठाले: विकास को खोजिए और पाइए 5 करोड़ का इनाम!

अम्मा बोली, “यह जलती पराली कृषि क्षेत्र के विकास को दर्शा रही है, यह कह रही है कि इस साल रिकॉर्ड अन्न का उत्पादन हुआ है”

By Sorit Gupto

On: Monday 16 December 2019
 
विकास की हवा
सोरित / सीएसई सोरित / सीएसई

दीवान-ए-आम पूरी शान-ओ-शौकत से लगा था। बादशाह आम चूस रहे थे। पत्रकार बादशाह से पूछ रहे थे कि आम खाने का सही तरीका क्या है। अचानक बादशाह बोले, “सीने में जलन आंखों में तूफान-सा क्यों है?” मंत्री ने कोतवाल को कुहनी मार कर कहा, “सुना आपने? बादशाह के गाने का आखिरी शब्द है “ह”। अब आपको “ह” से गाना है। फिर वह खुद ही गा उठे “हम दोनों दो प्रेमी, दुनिया छोड़ चले ...”

कोतवाल ने मंत्री के मुंह पर हाथ रखकर उनका गाना रोक दिया और गुर्रा कर कहा, “मंत्री जी, जहांपनाह का इशारा वायु प्रदूषण के चलते हो रही सांस लेने में तकलीफ और आंखों की जलन की ओर है। कहीं ऐसा न हो कि बादशाह आपसे वाकई यह दुनिया छुड़वा दें!”

तभी दीवान-ए-आम में एक आदमी खांसता हुआ घुसा और बादशाह को एक फरियाद-नुमा कुछ पकड़ा दिया। बादशाह उसे पढ़ने की कोशिश करने लगे। उनकी यह कोशिश कामयाब नहीं हुई क्योंकि बादशाह एलानिया अनपढ़ थे।

“सर जी! इसमें लिखा है कि विकास लापता है?” मंत्री बोले।

बादशाह बोले, “कौन है यह विकास और आखिर यह कब से लापता है?” इस पर बाकी सभी लोग एक-दूसरे मुंह देखने लगे।

बादशाह ने मुनादी करवा दी कि जो कोई विकास को खोज कर लाएगा उसे पांच करोड़ रुपए का इनाम दिया जाएगा। हफ्तों-महीनों बीत गए पर विकास का कुछ पता नहीं चल पाया। आखिर में एक दिन एक बूढ़ी अम्मा दीवान-ए-आम में आई। मिमियायी हुई आवाज में उसने कहा, “जहांपनाह बहादुर! मुझे विकास मिल गया है!” दीवान-ए-आम में खलबली मच गई। किसी ने कहा, “जो काम हमारा ईडी, रॉ, सीबीआई न कर सकी, वह इस बूढ़ी अम्मा ने कैसे कर दिया? जरूर यह पैसों के लालच में झूठ बोल रही होगी।”

बादशाह बूढ़ी अम्मा को देखकर बोले, “अगर तुम्हारी बात झूठी साबित हुई तो तुम्हें काल कोठरी में डाल देंगे। बोलो कहां है विकास?”

बूढ़ी अम्मा बोली, “इसके लिए आपको मेरे साथ चलना पड़ेगा।”

थोड़ी ही देर में वे एक खेत में थे, जहां धू-धू कर जलती पराली, अमेजोन के जलते जंगलों की याद दिला रहे थे। उसके धुएं से सारे लोग बुरी तरह से खांसने लगे। बादशाह ने खांसते हुए कहा, “कहां है विकास?” बूढ़ी अम्मा बोली, “वह रहा आपके सामने हुजूर! यह जलती हुई पराली हमारे कृषि क्षेत्र के विकास को दर्शा रही है, यह कह रही है कि इस साल देश में रिकॉर्ड अन्न का उत्पादन हुआ है। कृषि का विकास यानी इकॉनमी के प्राइमरी सेक्टर का विकास!” बादशाह बोले, “वेरी स्मार्ट बूढ़ी अम्मा! हमने कभी इस तरह से सोचा ही नहीं।”

बूढ़ी अम्मा बोली, “ हुजूर आइए, अब चलते हैं शहरों की ओर। कहा जा रहा है कि शहर में वायु प्रदूषित है। यह प्रदूषण नहीं है हुजूर बल्कि, हमारे ऑटो सेक्टर, रियल एस्टेट सेक्टर का विकास है। भला आप बताएं ऑटो सेक्टर में मंदी होती तो क्या इतनी गाड़ियां सड़कों पर होतीं? इतना धुआं फैलता? कभी नहीं। हुजूर, रियल एस्टेट सेक्टर में मंदी होती तो हवा में भला कैसे इतनी धूल होती?”

बादशाह खुशी से नाचने लगे और अपने वित्त मंत्री को कहा, “अम्मा को पीएमसी बैंक का पांच करोड़ का चेक दे दिया जाए!”

बादशाह बोले, “लव-इस-इन-द एअर पुरानी बात है। आज का नारा है, “विकास-इस-इन-दी-एअर।” आइए हम सब गहरी सांसें लें और देश की हवा के कण-कण में विद्यमान विकास को अपने दिल-ओ-दिमाग में बसा लें।”

(यह व्यंग्य डाउन टू अर्थ, हिंदी के दिसंबर अंक में प्रकाशित हुआ है )