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कोविड-19 : खतरनाक डेरियन जंगल पार करके पनामा में क्वरंटीन हैं 21 भारतीय प्रवासी

खतरनाक डेरियन जंगल पार करके पनामा से उत्तरी अमेरिका जाने वाले प्रवासियों की संख्या में 7 गुना बढ़ोत्तरी हुई है। इनमें बच्चे बड़ी तादाद में हैं, प्रवासी देशों में भारत का स्थान प्रमुख है। 

By Vivek Mishra

On: Tuesday 05 May 2020
 

Photo : unicef

कोविड-19 के दौरान दुनियाभर में लॉकडाउन के कारण प्रवासियों को जहां-तहां शेल्टर में या फिर दुर्गम रास्तों में भूखे-प्यासे भटकना पड़ रहा है। इस वक्त मध्य अमेरिका की कोलंबियाई-पनामा सीमा में 2500 से अधिक प्रवासी फंसे हुए हैं। वहीं, डाउन टू अर्थ ने पड़ताल में पाया है कि इनमें  भारत के कुल 21 प्रवासी भी शामिल हैं। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ माइग्रेशन (आईओएम) ने बताया कि  इन सभी प्रवासियों को पनामा के माइग्रेशन रिस्पेशन स्टेशनों (एमआरएस) में ठहराया गया है। इनमें 30 अप्रैल तक एक एमआरएस पर 20 प्रवासी कोविड-19 संक्रमण पॉजिटिव मिलने की सूचना मिली है।  

कोलंबिया और पनामा सीमा के बीच या फिर कहें कि दक्षिण अमेरिका को उत्तरी अमेरिका से जोड़ने वाला एक सघन जंगल डेरियन गैप है जो दुनिया का सबसे खतरनाक और दुर्गम जंगल भी है। अफ्रीकी देशों के साथ भारत समेत दक्षिए एशियाई देशों से हर वर्ष प्रवासियों की बड़ी संख्या इन जंगलों को पार करके उत्तरी अमेरिका, कनाडा में बेहतर जिंदगी की तलाश में पहुंचती हैं। इस दुर्गम जंगल के सफर के बीच में ही बहुत से प्रवासी मलेरिया और खतरनाक सांपों के काटे जाने के कारण दम तोड़ देते हैं। कानून विहीन यह जंगल नशे व अपराध से जुड़े तमाम समूहों का डेरा भी है। प्रवासी यदि जंगल का रास्ता पार कर भी जाएं तो कई बार उन्हें डिंटेशन सेंटर या फिर वापस उनके देश भेज दिया जाता है। 10 हजार वर्ग मील में फैले डेरियन गैप सघन वर्षा वन और नदियों का बसेरा है। वहीं इस रास्ते हर वर्ष करीब 25 हजार प्रवासी पनामा पहुंचते हैं। 

आईओएम की पनामा ईकाई ने डाउन टू अर्थ को बताया है कि डेरियन सीमा पर स्थित  माइग्रेशन रिस्पेशन स्टेशन (एमआरएस) पर ही 2500 से अधिक प्रवासियों को ठहराया गया है। इनकी स्वास्थ्य जांच की जा रही है और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को भी पूरा किया जा रहा है। 

कुल 2500 से अधिक प्रवासियों में 14 भारतीय प्रवासी एमआरएस ला पेनिटा और लॉस प्लेंस में 7 भारतीय प्रवासियों को रोका गया है। यह सभी प्रवासी भारतीय उत्तरी अमेरिका की तरफ जा रहे थे। लेकिन कोविड-19 के कारण मध्य अमेरिका की सीमाएं बंद कर दी गईं जिससे  इन्हें यहां रोका गया है। 

डाउन टू अर्थ ने आईओएम की पनामा ईकाई से पूछा था कि क्या भारतीय समेत अन्य प्रवासियों की कोविड जांच की जा रही है? इस पर उन्होंने जवाब दिया कि पनामा का स्वास्थ्य मंत्रालय निश्चित अंतराल पर प्रवासियों के स्वास्थ्य लक्षणों पर निगरानी कर रहा है। जिस किसी में भी लक्षण दिख रहे हैं उनकी जांच संबंधित एमआरएस पर की जा रही है। वहीं इस काम के लिए 2 डॉक्टर और तीन नर्स ला पेनिटा एमआरएस पर नियुक्त हैं। इसी स्टेशन पर अप्रैल के अंत तक 20 लोगों के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। 

वहीं यूनिसेफ की पनामा ईकाई ने 1-27 अप्रैल, 2020 की अपनी स्थिति रिपोर्ट में बताया है कि डेरियन सीमा पर 2522 प्रवासियों में 143 पॉजिटिव मामले आए हैं। इनमें पांच मेजबान समुदाय और 27 प्रवासी शामिल हैं। कोविड के कारण समुदायोंं में तनाव की स्थितियां भी बढ़ी हैं।  साथ ही 2522 प्रवासियों में 22 फीसदी बच्चे और किशोर हैं। 4 किशोर ऐसे भी हैं जिनके साथ कोई नहीं है।

आईओएम, पनामा ने बताया कि प्रवासियों के बारे में सिर्फ उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर जानकारी जुटाई जाती है ऐसे में वे संबंधित राष्ट्र में किस राज्य से ताल्लुक रखते हैं यह नहीं पता किया जाता है। वहीं, यूनिसेफ की पनामा ईकाई की जानकारी के मुताबिक जनवरी से मार्च 2020 के तहत पनामा के नेशनल इमिग्रेशन सर्विस ने 4465 प्रवेश को दर्ज किया गया है। इनमें 1107 लोग 18 वर्ष से कम उम्र के लोग हैं। वहीं बच्चों की संख्या 411 दर्ज की गई है, जिसमें सबसे अधिक ब्राजील के 192 बच्चे हैं।  

बीते दो वर्षों में डेरियन गैप पार करने वाले बच्चों की संख्या में सात गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। यह मानव तस्करी का भी सबसे पसंदीदा रास्तों में से एक है। यूनिसेफ के मुताबिक कोलंबिया और मध्य अमेरिका को अलग करने वाले इस दुर्गम जंगल के रास्ते परिवार समेत 2019 में 4000 बच्चों ने पार किया था जबकि 2018 में यह संख्या 522 थी। इनमें करीब 50 फीसदी बच्चे 6 वर्ष से कम उम्र के थे।  इन बच्चों की संख्या वाले देशों में भारत, सोमालिया, कैमरून और डेमोक्रेटिक रिप्बल्कि ऑफ कांगो व बांग्लादेश शामिल है। 

आईओएम, पनामा ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय कोविड-19 संक्रमित मरीजों की जानकारी को गुप्त रखता है इसलिए वह इनके बारे में जानकारी, नाम  या अन्य सूचना देने में में असक्षम है। 

क्या भारतीय प्रवासी वापस अपने वतन लौटना चाहते हैं? इस सवाल पर आइओएम ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। आईओएम पनामा ने कहा कि हम अपनी सीमाओं का लगातार निगरानी कर रहे हैं। अभी किसी ऐसे भारतीय प्रवासी की सूचना नहीं है जो कहीं सीमा पर भटक रहा हो। उन्होंने कहा कि हमें कोविड-19 की सामूहिक लड़ाई लड़नी होगी। खासतौर से प्रवासियों की आवश्यकताओं और विशेषताओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। 

पनामा में स्कूल 9 मार्च से ही बंद हैं जिनके खुलने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं हुई है। इसके अलावा 24 मार्च से जारी पूरी तरह क्ववरंटीन अभी खोला नहीं गया है। सभी अंतरराष्ट्रीय  सीमाएं और निकास द्वार बंद हैं।