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60 लाख वेंडरों की रोजी पर संकट, फर्म को प्राथमिकता दे रहा रेलवे

रेलवे अपने स्टेशनों से वेंडर को हटा कर वहां कंपनियों से काम लेना चाहती है, जिसका असर लाखों वेंडर्स की रोजी-रोटी पर पड़ेगा 

By Anil Ashwani Sharma

On: Thursday 30 January 2020
 
Photo: Istock
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यदि मौजूदा सरकार की निजीकरण की नीति इसी प्रकार जारी रही तो आने वाले समय में आप और हम रेलवे स्टेशनों पर चाय से लेकर पूरी-भाजी बेचने वाले बीते समय की बात हो जाएंगे। क्योंकि सरकार इन्हें सभी स्टेशनों से हटाने का प्रयास कर रही है। हालांकि अभी उसकी इस मुहिम में सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। मौजूदा सरकार यह कहती नहीं थकती कि हम नए रोजगार के अवसर बढ़ा रहे हैं, लेकिन उसकी कुछ नीतियों के कारण पुराने रोजगार को खतरा उत्पन्न हो गया है।

देश ही नहीं, दुनिया के सबसे बड़े उपक्रम भारतीय रेलवे के देशभर में लगभग 9,500 से अधिक रेलवे स्टेशन हैं और इन स्टेशनों पर लगभग 60 लाख वेंडर्स काम कर रहे हैं। अब इनकी रोजी-रोटी पर तलवार लटक रही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि जितनी भी सहकारी समितियां, फर्म हैं, कंपनी है, उनका काम रेलवे स्टेशनों पर जैसा है, उसी प्रकार से चलता रहेगा और इसके अलावा एकल स्वामी फर्म यानी इंडिविजुअल प्रोपराइटर के पास यदि चार या पांच यूनिट रेलवे स्टेशनों पर हैं तो उसे केवल एक मिलेगी, बाकी को सरेंडर करना होगा। रेलवे मंत्रालय ने इस आदेश को बाइपास करते हुए एक नई नीति बनाई। जिसमें एक डिविजन में एक फर्म पांच यूनिट ले सकती है। रेलवे के देशभर में कुल 68 डिविजन हैं। इस हिसाब से एक फर्म पांच यूनिट के हिसाब से 340 यूनिट ले सकता है लेकिन एकल स्वामी को एक ही यूनिट लेने का हक दिया। कायदे से देखा जाए तो रेलवे स्वयं ही कोर्ट के आदेश की अवहेलना करता नजर आ रहा है।

आरोप है कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक यानी पिछले ढाई साल से जवाब दाखिल नहीं कर रही है। बल्कि उसने अदालती आदेश को न मानते हुए कए नई नीति बना दी है। जिसके तहत बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को ही अंतत: लाभ होगा

इस संबंध में अखिल भारतीय खानपान लाइसेंसीज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंदर गुप्ता डाउन टू अर्थ को बताया कि रेलवे हर हाल में छोटे वेंडरों की रोजी छीनने पर उतारू है। रविन्दर गुप्ता ने बताया कि हमने रेलवे मंत्रालय से मांग की है कि स्टालों की तरह छोटे वेण्डरों को भी अन्य उत्पादों को बेचने की अनुमति मिले और उनसे लिये जा रहे जीएसटी को 23 फीसदी से घटाकर 1 प्रतिशत किया जाय। उन्होंने यह मांग भी की कि उच्चतम न्यायालय के स्थगनादेश के बावजूद रेलवे द्वारा वाराणसी, झांसी, आगरा अत्यादि मंडलों में तोडे़ गये स्टाल ट्रॉली को बहाल किया जाए।