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दुनिया भर में हैं 18 करोड़ बेरोजगार, आर्थिक सुस्ती से बिगड़े हालात

आईएलओ की ताजा रिपोर्ट बताती है कि दुनिया में 47 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनके पास या तो काम नहीं है या मनमुताबिक काम नहीं मिल रहा या उन्हें पर्याप्त भुगतान नहीं किया जा रहा है

By DTE Staff

On: Wednesday 22 January 2020
 
Photo: Needpix
Photo: Needpix Photo: Needpix

दुनिया में लगभग 18.80 करोड़ लोग बेरोजगार हैं। इस संख्या में हर साल लगभग 25 लाख की वृद्धि होने के आसार हैं। 21 जनवरी 2020 को जारी अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

विश्व रोजगार और सामाजिक दृष्टिकोण (डब्ल्यूईएसओ): रूझान -2020 नाम की इस वार्षिक रिपोर्ट में प्रमुख श्रम बाजार के मुद्दों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें बेरोजगारी, श्रम का अभाव, गरीबी, आय असमानता, श्रम आय हिस्सेदारी आदि कारक शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी की वजह से बेरोजगारी दर बढ़ेगी, हालांकि पिछले नौ साल से यह दर स्थिर थी, लेकिन 2020 में इस दर में वृद्धि होने के आसार हैं। इतना ही नहीं, जिन लोगो के पास अभी रोजगार है, वे अपने काम से खुश नहीं हैं, क्योंकि या तो उनसे ज्यादा घंटे काम लिया जा रहा है या उन्हें पर्याप्त भुगतान नहीं किया जा रहा है। ऐसे लोगों की संख्या 16.5 करोड़ है।

इसके अलावा  12 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो या तो सक्रियता के साथ काम की तलाश में हैं या फिर संबंधित काम तक उनकी पर्याप्त पहुंच नहीं है। कुल मिलाकर, दुनिया भर में इन हालात से रोजगार की वजह से 47 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं।

रिपोर्ट में सामने आई यह बात भी चौंकाती है कि वैश्विक स्तर पर पहले के मुकाबले आय असमानता बढ़ गई है, खासकर विकासशील देशों में। वहीं, वैश्विक स्तर पर अन्य उत्पादन कारकों के मुकाबले श्रम में जाने वाली राष्ट्रीय आय की हिस्सेदारी में भी 2004 से 2017 के बीच 51 से 54 फीसदी के बीच गिरावट आई है। आर्थिक रूप से यह महत्वपूर्ण गिरावट यूरोप, मध्य एशिया आदि के देशों में सबसे अधिक आई है। 

2020-21 में और बढ़ेंगे गरीब

 2020-21 में गरीबी और भी बढ़ने वाली है। विकासशील देशों में इसका सबसे अधिक असर देखने को मिलेगा, जिसकी वजह से वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन पर सतत विकास के लक्ष्य को हासिल करने में काफी बाधाएं आएंगी। वर्तमान में कार्यशील गरीबी (क्रय शक्ति में प्रति दिन 3.20 अमेरिकी डॉलर से कम आय के रूप में समता शर्तों के अनुसार परिभाषित है) 63 करोड़ से अधिक श्रमिकों को प्रभावित कर रही है। यानि हर पांच में से एक आदमी प्रभावित है।

 अवसरों और आर्थिक विकास को करती है सीमित

 रिपोर्ट के मुताबिक श्रम बाजार में लिंग, आयु और भौगालिक रूप से भी काफी असमानताएं हैं। वर्तमान में तो श्रम बाजार में काफी जटिल परिस्थितियां हैं, जो व्यक्तिगत अवसरों और सामान्य आर्थिक विकास दोनों को सीमित कर रही है। खासकर, 15-24 आयुवर्ग के 26.7 करोड़ युवा प्रभावित हैं, जो रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण में शामिल नहीं हैं और उनके समक्ष अन्य वैकल्पिक काम करने की स्थिति भी अच्छी नहीं है।

 विकास की वर्तमान गति गरीबी कम करने में बाधक

रिपोर्ट बताती है कि विकास की वर्तमान गति और स्वरूप गरीबी को कम करने और कम आय वाले देशों में काम करने की स्थिति में सुधार के प्रयासों में बाधा है। वहीं, प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से व्यापार प्रतिबंधों और संरक्षणवाद को तेज करने के संबंध में भी चेताया गया था, क्योंकि इससे रोजगार पर खराब प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की गई है। डब्ल्यूईएसओ ने सिफारिश की है कि विकास के प्रकारों में संरचनात्मक परिवर्तन, तकनीकी उन्नयन और विविधीकरण के माध्यम से उच्च मूल्य वर्धित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानांतरित करना होगा।