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महामारी के वक्त कृषि क्षेत्र ने बनाई बढ़त, आर्थिक विकास में उद्योग से ज्यादा हिस्सेदारी

जून तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद ( जीडीपी) में 23.9 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन कृषि एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जिसमें वृदि्ध हुई है

By Richard Mahapatra

On: Monday 31 August 2020
 
फोटो: विकास चौधरी
फोटो: विकास चौधरी फोटो: विकास चौधरी

31 अगस्त 2020 को जारी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों के तहत कवर किए गए आठ उद्योगों में से केवल कृषि ऐसा क्षेत्र है, जिसमें वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-जून की तिमाही में वृद्धि हुई है। 

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा पहली तिमाही (अप्रैल-जून, 2020) के लिए जारी अनुमानों के अनुसार, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 23.9 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी में 5.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी।

कोविड-19 महामारी और आर्थिक गतिविधियों के कारण यह अपेक्षित था, लेकिन इस दौरान जो बात देखने लायक है, वह यह है कि कृषि क्षेत्र ने असाधारण प्रदर्शन किया है।

मौद्रिक शब्दों में देखे हैं तो पहली तिमाही में जीडीपी 26.90 लाख करोड़ रुपए रही है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी 35.35 लाख करोड़ रुपए थी। यानी कि 8.45 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

कृषि क्षेत्र को देखें तो पिछले वर्ष की तुलना में इस तिमाही में कृषि सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मौद्रिक शब्दों में देखे हैं तो कृषि क्षेत्र में पहले तीन महीनों में 14,815 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वृद्धि हुई है। जबकि ओवरऑल जीवीए में पिछले वर्ष की तुलना में तिमाही में 22.8 प्रतिशत की कमी आई है।

कोरोनावायरस संक्रमण को रोकने के लिए देश भर में लगाए गए लॉकडाउन की वजह से रबी सीजन की फसल की कटाई और सप्लाई चेन में रुकावट आई। बावजूद इसके जीडीपी के नए आंकड़े उत्साहजनक हैं। रबी मौसम के लिए कृषि उत्पादन (डेयरी उत्पाद, मत्स्य और मुर्गी उत्पादन सहित) शामिल हैं।

खरीफ सीजन अभी भी जारी है, लेकिन वर्तमान के ये आंकड़े पिछले रिकॉर्ड से आगे निकल गए हैं। इसके अलावा, जुलाई-अगस्त में कृषि क्षेत्र ने भारी निजी निवेश को आकर्षित किया है, जो कि हाल के वर्षों में खेती छोड़ने वाले किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए असामान्य सा लगता है। लेकिन गांवों में रिवर्स पलायन और भविष्य की आजीविका की अनिश्चितता ने कई लोगों को कृषि पर वापस निवेश करने के लिए मजबूर किया है।

इसका आर्थिक प्रभाव तब पता चलेगा जब अगली तिमाही के लिए जीडीपी के आंकड़े सितंबर अंत में जारी किए जाएंगे। लेकिन पिछले साल भी आर्थिक मंदी के बावजूद कृषि क्षेत्र में हल्की वृद्धि देखने को मिली थी, जिसके लगता है कि कृषि धीरे-धीरे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रासंगिक हो रही है।

महज एक हफ्ते पहले जब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट 2019-20 जारी की, तो यह पहलू उस समय अन्य सुर्खियों की वजह से दब गया था। आरबीआई के अनुमान से पता चलता है कि 2019-20 में कृषि ने वास्तविक जीवीए वृद्धि 4.0 प्रतिशत दर्ज की। यह रिकॉर्ड अनाज उत्पादन के कारण हुआ। ओवरऑल आर्थिक विकास के लिए यह 15.2 प्रतिशत था। कृषि क्षेत्र के लिए यह एक नया रिकॉर्ड है। आर्थिक विकास में औद्योगिक क्षेत्र के मुकाबले कृषि क्षेत्र ने अधिक वृद्धि हुई। ऐसा 2013-14 के बाद पहली बार हुआ। वर्ष 2019-20 में औद्योगिक क्षेत्र ने सिर्फ 4.7 प्रतिशत की वृद्धि की थी। आरबीआई ने अनुमान लगाया कि इस वृद्धि ने देश के कुल घरों के 48.3 प्रतिशत की अर्थव्यवस्था को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

आरबीआई ने कहा, "2019-20 में रिकॉर्ड खाद्यान्न और बागवानी उत्पादन और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए व्यापार की अनुकूल शर्तों के चलते कृषि और संबद्ध गतिविधियों में चमक दिखाई दी है। हालांकि आर्थिक विकास की दृष्टि से आरबीआई ने पिछले वित्त वर्ष को सबसे खराब साल बताया है।

हालांकि आरबीआई ने चेतावनी भी दी है कि किसानों को कई चुनौतियों को सामना करना पड़ रहा है और उन्हें अपनी फसलों का उचित दाम नहीं मिल रहा है। वह भी तब, जब देश में खाद्य मुद्रास्फीति अधिक हो, या उपभोक्ता कृषि उपज के लिए अधिक से अधिक भुगतान करते रहे हैं।

इस साल जुलाई में, खरीफ की बुआई में वृद्धि और कृषि के प्रति आकर्षण बढ़ने के संकेत को देखते हुए ट्रैक्टर की बिक्री में 38.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका मतलब यह भी है कि किसान इस खरीफ सीजन में न केवल इनपुट पर, बल्कि ट्रैक्टर जैसी बड़ी सुविधा मशीनों पर भी निवेश कर रहे हैं। लेकिन यह सवाल अभी भी खड़ा है कि क्या किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिला है या आगे भी मिलेगा?

आरबीआई ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि कृषि के लिए व्यापार की उचित तरीके अपनाए जाएं, ताकि अन्न उत्पादन बढ़ने पर किसानों की आमदनी भी बढ़े और यही किसानों की भी चिंता है कि क्या वे अच्छी फसल के साथ-साथ आर्थिक फसल भी काटेंगे।