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अक्टूबर में 7 फीसदी के करीब पहुंची भारत की बेरोजगारी दर

अक्टूबर के महीने में बेरोजगारी दर 6.98 फीसदी दर्ज की गई है 

By Lalit Maurya

On: Monday 02 November 2020
 

भारत में बेरोजगारी एक बड़ी समस्या ही नहीं देश की राजनीति के लिए एक बड़ा चुनावी मुद्दा भी है| जिसका फायदा हर कोई उठाना चाहता है| यही वजह है कि देश में कई सियासी घमासान इसी के इर्द-गिर्द लड़े गए हैं|   पिछले कुछ महीनों से देश में बेरोजगारी की स्थिति बद से बदतर होती चली गई थी| जिसके लिए काफी हद तक कोरोना महामारी और उसके कारण किया गया लॉकडाउन जिम्मेदार था|

अक्टूबर 2020 में यह 6.98 फीसदी हो चुकी है जोकि पिछले महीने 6.67 फीसदी रिकॉर्ड की गई थी| यह तब है कि जब लॉकडाउन को ख़त्म किये हुए कई महीने बीत चुके हैं| यदि शहरी इलाकों की बात करें तो अक्टूबर 2020 में बेरोजगारी दर 7.15 फीसदी थी जबकि इसी अवधि में ग्रामीण बेरोजगारी की दर 6.9 रिकॉर्ड की गई थी|अप्रैल 2020 की बात करें तो यह उस समय 23.52 फीसदी पर पहुंच गई थी, जोकि अपने आप में एक रिकॉर्ड है| यह जानकारी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईइ) द्वारा जारी आंकड़ों में सामने आई है|

हरियाणा और राजस्थान में हैं सबसे बुरे हालात

यदि राज्यों के हालात पर गौर करें तो देश में सबसे बुरी स्थिति हरियाणा की है, जहां अक्टूबर में बेरोजगारी दर 27.3 फीसदी दर की गई थी| इसके बाद राजस्थान 24.1 का नंबर आता है| जबकि इन दोनों के बाद जम्मू और कश्मीर (16.1), हिमाचल प्रदेश (13.5), झारखंड (11.8), त्रिपुरा (11.6), गोवा (11.5), पश्चिम बंगाल (10) का नंबर आता है| जिनकी बेरोजगारी दर 10 फीसदी से ज्यादा है| जबकि इनके विपरीत असम (3), तेलंगाना  (2.9), ओडिशा (2.2), तमिलनाडु (2.2), कर्नाटक (1.6), सिक्किम (0.9) की स्थिति काफी बेहतर है, जहां बेरोजगारी दर 3 फीसदी या उससे कम है| यदि देश में अप्रैल 2020 के आंकड़ों को देखें तो इस महीने में देश के 11 राज्यों में बेरोजगारी दर 20 फीसदी से ज्यादा थी|

कोरोनावायरस के चलते किए गए लॉकडाउन ने बड़े पैमाने पर शहरों से श्रमिकों को ग्रामीण इलाकों की ओर पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया था| उन्हें उम्मीद थी कि वहां उन सबको काम मिल जाएगा, पर ऐसा हुआ नहीं| भारत में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र कृषि भी इस स्थिति में नहीं था कि वो इतनी बड़ी आबादी को रोजगार दे पाता। ऐसे में बेरोजगारी का बढ़ना स्वाभाविक ही था|

देश में कोरोनावायरस का कहर अब तक खत्म नहीं हुआ है, वो अभी भी जारी है| साथ ही अर्थव्यवस्था में भी जिस तेजी से गिरावट आई है, उसके भी बहुत जल्द उबरने के आसार कम ही हैं| ऐसे में बेरोजगारी की यह दर आगे भी बढ़ सकती है| जिसका सीधा असर गरीबी के स्तर पर पड़ेगा| ऐसे में बिना रोजगार और आय के कितने परिवार अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा कर पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है|