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नई सुरक्षा स्याही से रुक सकती है नकली नोटों की जालसाजी

इस स्याही का विकास प्रतिदीप्ति (फ्लूअरेसन्स)-स्फुरदीप्ति (फॉस्फोरेसेंस) सिद्धांत पर आधारित है, जो एक तरंग दैर्ध्य की आवृत्ति पर ही दो रंगों का उत्सर्जन करती है।

By Umashankar Mishra

On: Tuesday 24 December 2019
 
Photo :  Wikimedia
Photo :  Wikimedia Photo : Wikimedia

भारतीय वैज्ञानिकों के एक नवीनतम शोध में ऐसी सुरक्षा स्याही विकसित की गई है, जो पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों की नकल, नकली दवाओं की पैकिंग और मुद्रा नोटों की जालसाजी को रोकने में मददगार हो सकती है। एक निश्चित आवृत्ति के प्रकाश के संपर्क में आने पर इस स्याही में दो रंग उभरने लगते हैं। सामान्य प्रकाश में यह स्याही सफेद रंग की दिखाई देती है। लेकिन, जब इस पर 254 नैनोमीटर की आवृत्ति से पराबैंगनी प्रकाश डाला जाता है तो इससे लाल रंग उत्सर्जित होने लगता है और पराबैंगनी प्रकाश को बंद करते ही स्याही से हरा रंग उत्सर्जित होने लगता है।

पराबैंगनी प्रकाश के संपर्क में आने से इस नई विकसित की गई स्याही से लाल रंग 611 नैनोमीटर और हरा रंग 532 नैनोमीटर की आवृत्ति से उत्सर्जित होता है। लाल रंग का उत्सर्जन प्रतिदीप्ति (फ्लूअरेसन्स) और हरे रंग का उत्सर्जन स्फुरदीप्ति (फॉस्फोरेसेंस) प्रभाव के कारण होता है।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल), नई दिल्ली और एकेडेमी ऑफ साइंटिफिक ऐंड इनोवेटिव रिसर्च, गाजियाबाद  के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री-सी में प्रकाशित किया गया है।

एनपीएल के वरिष्ठ वैज्ञानिक और प्रमुख शोधकर्ता डॉ बिपिन कुमार गुप्ता ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस स्याही का विकास प्रतिदीप्ति (फ्लूअरेसन्स)-स्फुरदीप्ति (फॉस्फोरेसेंस) सिद्धांत पर आधारित है, जो एक तरंग दैर्ध्य की आवृत्ति पर ही दो रंगों का उत्सर्जन करती है। आमतौर पर दो रंगों के उत्सर्जन के लिए दोहरी आवृत्ति के तरंग दैर्ध्य की जरूरत पड़ती है।”

शोध में ऐसे तत्व का चयन महत्वपूर्ण था, जिससे पराबैंगनी प्रकाश की आवृत्ति बढ़ने पर रंगों के उभरने में बाधा पैदा न हो। लाल एवं हरा रंग उत्सर्जित करने वाली यह चमकदार स्याही विकसित करने के लिए रासायनिक तत्वों- सोडियम इट्रियम फ्लोराइड, यूरोपियम-डोप्ड और स्ट्रोन्टियम एल्युमिनेट को यूरोपियम-डिस्प्रोसियम के साथ संश्लेषित किया गया है।

स्याही के अपेक्षित गुण प्राप्त करने के लिए दो रंगों को 3:1 के अनुपात में मिलाया गया है। इस मिश्रण को 400 डिग्री तापमान पर तीन घंटे तक ऊष्मा से उपचारित किया गया है। इस तरह, एक तरंग दैर्ध्य की आवृत्ति पर दो रंगों का उत्सर्जन करने वाली स्याही बनाने के लिए महीन सफेद पाउडर का विकास किया गया है।

स्याही के उत्पादन पर पिगमेंट एक दूसरे से चिपक जाएं, यह सुनिश्चित करने के लिए रासायनिक तत्वों का ऊष्मीय उपचार किया गया है। अंततः पाउडर को पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) माध्यम के साथ मिलाया गया है ताकि चमकदार सुरक्षा स्याही प्राप्त की जा सके।

पदार्थों के अन्य स्रोतों से निकले विकिरण को अवशोषित कर तत्काल उत्सर्जित करने के गुण को फ्लूअरेसन्स कहते हैं। जबकि, फॉस्फोरेसेंस से तात्पर्य दहन या ज्ञात ऊष्मा के बिना किसी पदार्थ द्वारा प्रकाश उत्सर्जन से है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सुरक्षा उद्देश्यों के लिए दोहरे रंग की चमक उत्सर्जित करने की यह एक नवीनतम तकनीक है और इसका इस्तेमाल नोटों या गोपनीय दस्तावेजों की छपाई के लिए पहले नहीं किया गया है।

इस स्याही की व्यवहारिकता का परीक्षण करने के लिए सफेद बॉन्ड पेपर पर स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक से छपाई की गई है। 254 नैनोमीटर की आवृत्ति से पराबैंगनी प्रकाश की किरणें डालने पर लाल एवं प्रकाश को बंद करने पर हरे रंगों का उत्सर्जन देखा गया है। स्याही की स्थिरता का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न विरंजक एजेंटों जैसे- साबुन के घोल, एथिल अल्कोहल और एसीटोन के साथ रासायनिक परीक्षण किए गए हैं। (इंडिया साइंस वायर)