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राजस्थान बजटः कृषि के लिए 11,182 करोड़ आवंटित, नहीं हुई बड़ी घोषणाएं

इस साल के बजट में किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज के अनुदान के रूप में सरकार सहकारी बैंकों को 534 करोड़ रुपए उपलब्ध कराएगी

By Madhav Sharma

On: Friday 21 February 2020
 

राजस्थान सरकार ने अपने बजट में इस बार कृषि और इससे संबंधित कार्यकलापों के लिए कुल 11,182 करोड़ रुपए का प्रावधान किया हैं। इसमें कृषि कार्यों के लिए 3,318 करोड़ रुपए शामिल हैं। हालांकि पिछली बार की तरह ही सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कोई बड़ी घोषणा नहीं की है।

पिछले बजट में कृषि के लिए 2,828 करोड़ रुपए और कृषि एवं संबंधित कार्यकलापों के लिए 10,865 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। कृषि संबंधित कार्यों में मृदा एवं जल संरक्षण, पशु पालन, डेयरी विकास, मछली पालन, वानिकी एवं वन्य प्राणी, खाद्य, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, सहकारिता जैसे विभाग शामिल हैं। इसके अलावा बीते साल बजट में किसानों को उनके उत्पादों का सही मूल्य दिलाने के लिए एक हजार करोड़ के कृषि कल्याण कोष की घोषणा भी की गई थी, जिसे दिसंबर 2019 में पूरा कर दिया गया।

इस साल के बजट में किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज के अनुदान के रूप में सरकार सहकारी बैंकों को 534 करोड़ रुपए उपलब्ध कराएगी। राज्य सरकार ने इस बजट में बारिश के पानी को जमा कर सिंचाई के काम में लेने के लिए 150 करोड़ रुपए की लागत से 12,500 खेत तालाबों के निर्माण की भी घोषणा की है। साथ ही 91 करोड़ रुपए खर्च कर  30 हजार हैक्टेयर भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के तहत लाया जाएगा। 267 करोड़ रुपए से 25 हजार सोलर पंप लगाए जाएंगे। पिछले बजट की तरह इस बार भी मुख्यमंत्री गहलोत ने दो लाख टन यूरिया एवं एक लाख टन डीएपी के अग्रिम भंडारण के लिए 30 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की है।

राजस्थान राज्य बीज निगम द्वारा प्रमाणित बीजों का उत्पादन 8 लाख क्विंटल से बढ़ाकर  12 लाख क्विंटल किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन बीजों के वितरण के लिए प्रदेशभर की 200 मंडियों में चरणबद्ध तरीके से निशुल्क भूमि उपलब्ध कराए जाने की भी घोषणा बजट में की गई है।

जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, चूरू, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, पाली, जालौर, सिरोही और झुंझुनूं 1500 हैक्टेयर भूमि को  में खजूर की खेती के दायरे में लाया जाएगा। इसके अलावा 44 नई मंडियां खोली जाएंगी। इसके अलावा सरकार पशुपालन क्षेत्र में सब्सिडी पर पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान के लिए सोर्टेड सीमन के उपयोग को बढ़ावा देगी। योजना पर 10 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस तकनीक से बछड़ों की बजाय बछड़ियां ज्यादा पैदा होने की संभावना बढ़ेगी।