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मजदूरों को घर पहुंचाने को मजबूर हुई बिहार सरकार

सभी जिलाधिकारियों को कहा गया कि वे अपने क्षेत्र के हर गांव में सरकारी स्कूलों में मजदूरों की 14 दिनों तक रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करवाएं

By Pushya Mitra

On: Monday 30 March 2020
 
सोमवार को तकरीबन दस हजार मजदूर बिहार पहुंचे हैं, इनकी कतार लगा कर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। फोटो: पुष्यमित्र
सोमवार को तकरीबन दस हजार मजदूर बिहार पहुंचे हैं, इनकी कतार लगा कर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। फोटो: पुष्यमित्र सोमवार को तकरीबन दस हजार मजदूर बिहार पहुंचे हैं, इनकी कतार लगा कर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। फोटो: पुष्यमित्र

देश के अलग-अलग कोनों से बिहार पहुंचने वाले मजदूरों को जत्थे को आखिरकार सरकार उनके गांव तक पहुंचाने के लिए तैयार हो गई है। इसके लिए बिहार-यूपी की कर्मनाशा सीमा पर मजदूरों की स्क्रीनिंग की जा रही है और उन्हें बसों पर बिठाकर उनके गांव पहुंचाया जा रहा है। इस बीच हर गांव के स्कूल को आइसोलेशन सेंटर में बदला जा रहा है, ताकि इन्हें वहां रखा जा सके। हालांकि पहले सरकार इन मजदूरों को किसी भी कीमत पर राज्य में घुसने नहीं देना चाह रही थी। कल रविवार को भी इन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों के स्कूलों में बंद करके रखा गया था। मगर रविवार को देर शाम सरकार को अपना फैसला बदलना पड़ा और इन मजदूरों के लिए 550 स्पेशल बसें चलाने की इजाजत दे दी गई।

दरअसल लॉकडाउन के बाद बड़ी संख्या में मजदूरों का जो जत्था सड़कों पर निकल आया था, उसमें बिहार वासियों की संख्या सबसे अधिक बताई जा रही थी। मगर बिहार सरकार शुरुआत से ही यह तय करके बैठी थी कि इन लोगों को किसी सूरत में राज्य में प्रवेश नहीं करने देना है। सरकार की तरफ से पहले कोशिश हुई कि संबंधित राज्यों में ही इनके लिए कैंप लगाये जाएं, इसके लिए टोल फ्री नंबर भी जारी हुए और 100 करोड़ का बजट भी घोषित किया था। मगर यह व्यवस्था कारगर नहीं हो पाई और इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल से स्पेशल बसों का परिचालन करवा दिया गया, जिससे मजदूरों का बिहार आना तय हो गया।

इसके बाद राज्य सरकार ने तय किया कि इन मजदूरों को राज्य के सीमावर्ती इलाकों में कैंप लगा कर रखा जाएगा। शनिवार की देर रात और रविवार को पहुंचे तकरीबन दो हजार मजदूरों के जत्थे को बिहार-यूपी सीमा पर दो बड़े स्कूलों में रखा गया। वहां न सोने की व्यवस्था थी, न शौचालय की। मजदूरों को वहां रखकर ग्रिल पर ताला बंद कर दिया गया था। ऐसे में मजदूर काफी परेशान हो गए। दरवाजे के ग्रिल को पकड़ कर गुहार लगाते उनके वीडियो वायरल होने लगे।

फोटो : पुष्यमित्र ऐसे में रविवार को शाम यह फैसला लिया गया कि इन मजदूरों को स्पेशल बसों से इनके गांवों तक छोड़ा जाए। रविवार की रात से ही बसें वहां पहुंचने लगीं। वहां उनकी थर्मल स्क्रीनिंग के बाद उन्हें उनके गांव के लिए भेजा जाने लगा। इस बीच राज्य के सभी जिलाधिकारियों को कहा गया कि वे अपने क्षेत्र के हर गांव में सरकारी स्कूलों में मजदूरों की 14 दिनों तक रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करवाएं।

सीमाक्षेत्र पर मौजूद पत्रकार मनोज कुमार ने आंखों देखा हाल बताते हुए कहा है कि सोमवार से स्थिति बेहतर होने लगी है। सोमवार को तकरीबन दस हजार मजदूर पहुंचे हैं, इनकी कतार लगा कर थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। इसके बाद हर जिले के लोगों के नाम पुकारे जा रहे हैं, जिस जिले के 35 यात्री हैं, उन्हें बसों पर बिठाकर विदा किया जा रहा है। रोहतास जिले के शिवसागर में भी इन मजदूरों की स्क्रीनिंग और उन्हें उनके घर भेजने की व्यवस्था हो रही है। वहां से अनीश कुमार ने जानकारी दी है कि वहां भी व्यवस्था अब ठीक हो गई है।

इस बीच राज्य सरकार की तरफ से कुछ जिलों में मजदूरों के लिए शुरू हुए आइसोलेशन सेंटर की तस्वीरें भी जारी हुई हैं, वे अमूमन ठीक लग रही हैं। मगर दावे के साथ नहीं कहा जा सकता कि हर जगह ऐसी ही व्यवस्था होगी।