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लॉकडाउन और बेमौसम बारिश ने बढ़ाई मध्यप्रदेश के किसानों की मुसीबत, खरीदी केंद्रों पर परेशानियों का अंबार

रिकॉर्ड में खामी होने की वजह से कई स्थानों पर बड़े किसान अपनी पूरी फसल नहीं बेच पा रहे हैं

By Manish Chandra Mishra

On: Saturday 18 April 2020
 
हरदा जिले में गेहूं खरीदी केंद्र। फोटो: मनीष चंद्र मिश्रा
हरदा जिले में गेहूं खरीदी केंद्र। फोटो: मनीष चंद्र मिश्रा हरदा जिले में गेहूं खरीदी केंद्र। फोटो: मनीष चंद्र मिश्रा

मध्यप्रदेश में फसल तैयार होने के ठीक पहले आई आफत की बारिश और तैयार होने के बाद आए लॉकडाउन की वजह से किसान काफी परेशान हो रहे हैं। गेहूं खरीदी शुरू हुई है, लेकिन खरीदी केंद्रों पर किसान खरीदी की लिमिट, गुणवत्ता की कमी सहित परेशानियों से जूझ रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार ने रबी फसल की खरीदी की शुरुआत गेहूं से कर दी है। प्रदेशभर में भोपाल, इंदौर और उज्जैन को छोड़कर सभी जिलों के 4,305 खरीदी केंद्रों पर 15 अप्रैल से खरीदी का काम चल रहा है। लॉकडाउन की वजह से खरीदी की प्रक्रिया में कुछ बदलाव लाए गए हैं, जिससे प्रदेश के लगभग हर जिले से किसानों की परेशानियां सामने आ रही है। इसके अलावा कुछ दिन पहले हुए बेमौसम बारिश की वजह से कई स्थानों पर फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है।

लॉकडाउन की वजह से सरकार ने खरीदी केंद्रों पर भीड़-भाड़ कम रखने का प्रबंध किया है और इसके तहत पहले चुनिंदा छोटे किसानों को एसएमएस के जरिए बुलाया जा रहा है। इन किसानों की गेहूं की खरीदी की सीमा तय की जाती है। हालांकि, रिकॉर्ड में खामी होने की वजह से कई स्थानों पर बड़े किसान अपनी पूरी फसल नहीं बेच पा रहे हैं।

ऐसी ही परेशानी आई बीना के धमना ग्राम निवासी किसान राम प्रसाद को। उन्हें समर्थन मूल्य पर खरीदी का मेसेज मिला और वह 20 क्विंटल गेहूं लेकर बिहराना स्थित खरीदी केंद्र पर पहुंचे। वहां उन्हें पता चला कि सिर्फ 25 डिसमिल खेती का उनका रिकॉर्ड है और सिर्फ डेढ़ क्विंटल गेहूं बेच सकते हैं। गेहूं न बिकने की वजह से उसे गांव से केंद्र तक लाने में लगा ढुलाई का पैसा भी डूब गया। राम प्रसाद जैसे कई किसानों को प्रदेशभर में ऐसी परेशानी आ रही है।

हरदा जिले के ग्राम रिछाड़िया की बुजुर्ग महिला रुक्मिणी पति नर्मदा प्रसाद की उपज को गुणवत्ताहीन बताकर खरीदने से इनकार कर दिया गया। महिला सुबह 10 बजे से लेकर 3 बजे तक केंद्र पर अधिकारियों से गुहार लगाती रही। काफी मशक्कत के बाद अधिकारियों ने गेहूं की सफाई कर दोबारा लाने को कहा।

विदिशा जिले के किसान कार्यकर्ता राजकुमार बघेल ने बताया कि उनके जिले में हाल में हुई बेमौसम बारिश ने गेहूं की चमक खत्म कर दी है। दयानंदपुर खरीदी केंद्र में कई किसान अपना अनाज बेचने पहुंचे थे, इनमें से करीब छह किसानों का गेहूं चमक चली जाने के कारण नहीं खरीदा गया और उन्हें अनाज लेकर केंद्र से लौटना पड़ा। हालांकि, शिकायत के बाद स्थानीय अधिकारियों ने कुछ किसानों को दोबारा बुलाकर उनकी फसल खरीदी।

इन सब समस्याओं को देखते हुए कई बड़े किसान अपनी फसल बेचने केंद्रों तक नहीं पहुंच रहे हैं। छतरपुर के किसान देवेंद्र मिश्रा कहते हैं कि उनके परिवार में इसबार 100 क्विंटल के करीब गेहूं का उत्पादन हुआ है लेकिन तमाम समस्याओं को देखते हुए वह खुले बाजार में ही गेहूं बेचेंगे। देवेंद्र बताते हैं कि पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी हुई थी और उन्होंने इस वर्ष 80 क्विंटल चना उपजाया है। हालांकि, इस वर्ष अभी तक सिर्फ गेहूं की खरीदी हो रही है। खुले बाजार में चने की अच्छी कीमत नहीं मिल पाएगी। 

मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन शुरू होने के पहले तीन दिन में 23,224 किसानों से 43,273 मीट्रिक टन गेहूं बेचा। खाद्य-नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में गेहूं उपार्जन प्रक्रिया गति पकड़ रही है। पहले दिन 2,766 किसानों ने 4954 मीट्रिक टन गेहूं बेचा, लेकिन दूसरे दिन यह आंकड़ा 6,738 किसान और 12,824 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। तीसरे दिन 17 अप्रैल को 13,720 किसानों ने 25,495 मीट्रिक टन गेहूं बेचा।