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बजट 2020-21: अक्षय ऊर्जा पर खर्च बढ़ा, कोयले पर घटा

सरकार ने बजट में प्रदूषण फैलाने वाले ऊर्जा के स्रोतों के स्थान पर नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक तवज्जो दी है

By Bhagirath Srivas

On: Saturday 01 February 2020
 

Credit: Wikimedia commons वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2020-21 में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को प्रोत्साहित किया गया है जबकि प्रदूषण फैलाने वाले ऊर्जा के स्रोत कोयले और लिग्नाइट पर बजट कम किया है। 

वित्त वर्ष 2019-20 में कोयले और लिग्नाइट के अन्वेषण पर 937 करोड़ रुपए अनुमानित बजट था। संशोधित अनुमानों के मुताबिक, बजट बजट पर 755 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए। दूसरे शब्दों में कहें तो अनुमानित बजट से 182 करोड़ रुपए कम खर्च किए गए। वित्त वर्ष 2020-21 में कोयले और लिग्नाइट के अन्वेषण का अनुमानित बजट 700 करोड़ रुपए है। यानी बजट में इस खर्च में 55 करोड़ रुपए की कमी की गई है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार का कोयले और लिग्नाइट से पैदा होने वाली बिजली से मोहभंग हो रहा है और वह दूसरे पर्यावरण हितैषी विकल्पों को ज्यादा तवज्जो दे रही है। इससे पवन और सौर ऊर्जा के अनुमानित बजट से समझा जा सकता है। वर्ष 2020-21 के बजट में पवन ऊर्जा का अनुमानित बजट 1,299 करोड़ रुपए है।

पिछले बजट में पवन ऊर्जा का अनुमानित बजट 920 करोड़ था लेकिन संशोधित बजट अनुमानों में यह 1,026 करोड़ हो गया। यानी सरकार ने पवन ऊर्जा पर अनुमानित बजट से 106 करोड़ रुपए अधिक खर्च किए। वित्त वर्ष 2020-21 में पवन ऊर्जा पर 273 करोड़ रुपए अधिक खर्च करने का अनुमान है।

इसी तरह नवीकरणीय ऊर्जा के अन्य स्रोत सौर ऊर्जा पर भी सरकार ने खर्च बढ़ा दिया है। बजट 2020-21 में सौर ऊर्जा का अनुमानित बजट 2,150 करोड़ रुपए है। 2019-20 के बजट में सरकार ने सौर ऊर्जा पर 1,789 करोड़ (संशोधित अनुमान) रुपए खर्च किए थे। हालांकि बजट अनुमान 2,480 करोड़ रुपए था। सौर ऊर्जा पर वित्त वर्ष 2020-21 में 361 करोड़ रुपए अधिक अनुमानित खर्च आंका गया है।