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भारत के इस शहर में लगा दुनिया का सबसे बड़ा सोलर ट्री

इस एक पेड़ की मदद से हर साल 12,000-14,000 यूनिट्स सौर ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है

By Lalit Maurya

On: Tuesday 01 September 2020
 
फोटो: पीआईबी
फोटो: पीआईबी फोटो: पीआईबी

 

 

सीएसआईआर-सीएमईआरआई ने मिलकर विश्व का सबसे बड़ा सौर वृक्ष विकसित किया है। जिसे दुर्गापुर में सीएसआईआर-सीएमईआरआई की आवासीय कॉलोनी में स्थापित किया गया है। सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक प्रो हरीश हिरानी ने इसकी तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया है कि इस सौर पेड़ की क्षमता 11.5 केडब्ल्यूपी से भी ज्यादा है। जिसकी मदद से हर साल 12,000-14,000 यूनिट्स रिन्यूएबल एनर्जी प्राप्त की जा सकती है।

 

इस सौर वृक्ष को इस तरह से बनाया गया है कि इसके हर पैनल के द्वारा सूर्य के अधिकतम प्रकाश को प्राप्त किया जा सके। इसके हर पैनल में 330 डब्ल्यूपी की क्षमता से युक्त कुल 35 सोलर पीवी पैनल हैं। इसके पैनल इस तरह बनाए गए हैं कि उन्हें जरुरत के अनुसार ऊपर नीचे किया जा सकता है। गौरतलब है कि यह सुविधा छत पर लगने वाले सोलर पैनलों में नहीं होती है। इसकी मदद से ऊर्जा उत्पादन और उससे जुड़े आंकड़ों पर रियल टाइम में नजर रखी जा सकती है।

कृषि क्षेत्र के लिए हो सकता है मददगार

प्रो. हिरानी के अनुसार इस पेड़ में दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पेड़ होने के साथ-साथ कुछ अन्य ख़ास विशेषताएं भी हैं, जिसके कारण इसे विभिन्न स्थानों पर लगाया जा सकता है। इसे इस तरह बनाया गया है कि इसका उपयोग कृषि क्षेत्र में भी किया जा सकता है। साथ ही इसकी मदद से उच्च क्षमता वाले पंपों, ई-ट्रैक्टरों और ई-पावर टिलर जैसे कृषि उपकरणों को भी चलाया जा सकता है।

ऐसे हर पेड़ की मदद से करीब 10-12 टन सीओ2 के उत्सर्जन को रोका जा सकता है। इसकी मदद से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भी कमी लाई जा सकती है। जो जलवायु परिवर्तन से बचने में भी मददगार होगी। साथ ही इस वृक्ष से उत्पन्न होने वाली अतिरिक्त ऊर्जा को ग्रिड में सुरक्षित रखा जा सकता है।

 

कृषि क्षेत्र में जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा पैदा करने की जगह इन सोलर वृक्षों का प्रयोग किया जा सकता है। जिससे न केवल कृषि कार्यों के लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी साथ ही पैसे की भी बचत होगी। इस पेड़ की मदद से ने केवल किसानों की कमाई में वृद्धि होगी साथ ही कृषि क्षेत्र की अनिश्चितताओं से निपटने में भी मदद मिलेगी। इसकी मदद से कृषि को न केवल आर्थिक बल्कि पर्यावरण के दृष्टिकोण से लाभप्रद बनाया जा सकता है।

 

ऐसे प्रत्येक सोलर वृक्ष की कीमत करीब साढ़े सात लाख रुपए है। जो छोटे और मध्यम व्यापारी अपने व्यवसायिक मॉडल में इसे शामिल करना चाहते हैं वह भी इसे पीएम कुसुम योजना के तहत नवीकरणीय ऊर्जा आधारित ग्रिड विकसित करने के लिए इसे उपयोग में ला सकते हैं। 

 

इस सौर वृक्ष में कृषि से जुड़ी कुछ अन्य हाईटेक सुविधाऐं भी हैं जैसे इसकी मदद से कृषि क्षेत्र की चौबीस घंटे सीसीटीवी निगरानी की जा सकती है। साथ ही रियल टाइम में आर्द्रता की स्थिति, हवा की गति, वर्षा की भविष्यवाणी और मिट्टी के विश्लेषण के लिए सेंसर का उपयोग किया जा सकता है। साथ ही इस वृक्ष को सौर ऊर्जा संचालित ई-सुविधा कियोस्क से भी जोड़ा जा सकता है जिससे व्यापक कृषि डेटाबेस तक पहुंचा जा सकता है और रियल टाइम में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके साथ ही इसकी मदद से राष्ट्रीय कृषि बाजार से ऑनलाइन जुड़ा जा सकता है। यह पेड़ ने केवल किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकता है साथ ही यह कार्बन मुक्त भारत के सपने को भी साकार कर सकता है।