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दुनिया के कुल बिजली उत्पादन में 10 फीसदी रही सौर और पवन ऊर्जा की हिस्सेदारी

2019 के आंकड़ों से तुलना करें तो 2020 की पहली छमाही के दौरान पवन और सौर ऊर्जा के उत्पादन में 14 फीसदी की वृद्धि हुई है, जबकि थर्मल पावर में 8.3 फीसदी की गिरावट आई है

By Lalit Maurya

On: Thursday 13 August 2020
 
राजस्थान के बीकानेर जिले में एक घर की छत पर लगा सोलर पैनल, फोटो: जोनस हैम्बर्ग

2020 की पहली छमाही में पवन और सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी 10 फीसदी दर्ज की गई है| यदि 2019 के आंकड़ों से तुलना करें तो 2020 की पहली छमाही के दौरान पवन और सौर ऊर्जा के उत्पादन में 14 फीसदी की वृद्धि हुई है| जबकि कोयले से बनने वाली बिजली में 8.3 फीसदी की गिरावट आई है| हालांकि रिपोर्ट का मानना है कि 2015, पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अभी भी सख्त बदलावों की जरूरत है। यह जानकारी जलवायु परिवर्तन पर काम कर रही थिंक टैंक एजेंसी एम्बर की रिपोर्ट में सामने आई है|

रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण पिछले छह महीनों में बिजली की कुल मांग में 3 फीसदी की कमी आई है| इसके बावजूद थर्मल पावर प्लांट अभी भी दुनिया के लिए 33 फीसदी ऊर्जा का उत्पादन कर रहे हैं| गौरतलब है कि एम्बर द्वारा जारी यह रिपोर्ट 48 देशों के ऊर्जा सम्बन्धी आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें भारत भी शामिल है| यह देश विश्व की कुल बिजली का करीब 83 फीसदी उत्पादन करते हैं।

एम्बर द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2019 में कुल बिजली उत्पादन में पवन और सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 8.2 फीसदी थी। 2015 में 4.6 फीसदी, जबकि 2013 में यह सिर्फ 3.4 फीसदी रिकॉर्ड की गई थी, जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि ऊर्जा उत्पादन में विंड और सोलर की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है|

विंड और सोलर की मदद से कर रहा है भारत भी अपनी 10 फीसदी ऊर्जा का उत्पादन

भारत भी अपनी 10 फीसदी ऊर्जा का उत्पादन विंड और सोलर की मदद से कर रहा है| जबकि अमेरिका 12 फीसदी, चीन, जापान और ब्राज़ील 10 फीसदी, तुर्की 13 फीसदी बिजली का उत्पादन विंड और सोलर से कर रहा है| जबकि यूरोपियन यूनियन 21 फीसदी और यूनाइटेड किंगडम 33 फीसदी पवन और सौर ऊर्जा की मदद से उत्पादित कर रहा है| जबकि रूस अपनी सिर्फ 0.2 फीसदी बिजली सोलर और विंड की मदद से बना रहा है|

यदि कोयले से बन रही बिजली की बात करें तो उसमें करीब 8.3 फीसदी की गिरावट आई है| रिपोर्ट जिसके लिए लॉकडाउन और विंड एवं सोलर में हो रही वृद्धि को जिम्मेवार मानती है| रिपोर्ट के अनुसार कोयले में 70 फीसदी गिरावट की वजह लॉकडाउन को और 30 फीसदी विंड एवं सोलर में हो रही वृद्धि को मानती है| अमेरिका को देखें तो उसके थर्मल एनर्जी में करीब 31 फीसदी और यूरोपियन यूनियन में 32 फीसदी की गिरावट आई है| वहीं चीन जो सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाला देश है उसकी थर्मल एनर्जी में केवल 2 फीसदी की गिरावट आई है| जबकि यदि भारत की बात करें तो 2015 में उसके कुल ऊर्जा उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी 77 फीसदी थी जो 2020 में घटकर 68 फीसदी रह गई है|

1.5 डिग्री के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर साल करनी होगी थर्मल पावर में 13 फीसदी की कटौती 

रिपोर्ट के अनुसार यदि हमें 1.5 डिग्री के लक्ष्य को हासिल करना है तो इसके लिए थर्मल पावर में हर साल 13 फीसदी की कटौती करना जरुरी है| यह कटौती इस पूरे दशक में करनी जरुरी है|

वैज्ञानिकों ने पहले भी चेताया है कि यदि दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे उत्सर्जन में कमी नहीं की गई तो उसके विनाशकारी परिणाम झेलने पड़ सकते हैं| पहले ही बाढ़, सूखा, तूफान, मानसून में आ रहे बदलाव जैसी आपदाएं काफी बढ़ चुकी हैं, साथ ही उनका स्वरुप भी और विनाशकारी होता जा रहा है| हाल ही में जारी एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2020 की पहली छमाही (जनवरी से जून) के दौरान दुनियाभर में करीब 207 प्राकृतिक आपदाएं दर्ज की गई थी। यदि 2000 से 2019 के बीच का औसत देखें तो इस बीच करीब 185 आपदाएं सामने आई हैं जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि दुनियाभर में प्राकृतिक आपदाओं में वृद्धि हो रही है|

2019 में इसी अवधि में आई आपदाओं से तुलना करें तो इसमें कम से कम 27 फीसदी की वृद्धि हुई है| ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को रोकना है तो उसके लिए ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में भारी कमी करने की आवश्यकता है। जिसे ऊर्जा क्षेत्र से हो रहे उत्सर्जन में कटौती किये बिना नहीं किया जा सकता|