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सुप्रीम कोर्ट ने बदला एनजीटी का आदेश, सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन के लिए बढ़ाई मोहलत

सुप्रीम कोर्ट ने सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन की सभी पांच यूनिट्स में फ्ल्यू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम की स्थापना के लिए समय सीमा को बढ़ा दिया है

By Susan Chacko, Lalit Maurya

On: Sunday 26 July 2020
 

सुप्रीम कोर्ट ने सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन की सभी पांच यूनिट्स में फ्ल्यू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) सिस्टम की स्थापना के लिए समय सीमा को बढ़ा दिया है। सिपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह आदेश 21 जुलाई, 2020 को जारी किया गया है। यह नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनटीपीसी) द्वारा दायर अपील के मद्देनजर दिया गया है। यह अपील नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 27 फरवरी को दिए फैसले के खिलाफ दायर की गई थी।

गौरतलब है कि इससे पहले एनजीटी ने इस पावर प्लांट के सन्दर्भ में एनटीपीसी के लिए दो निर्देश जारी किए थे, जिसमें:

  • पहला छह महीने के भीतर फ्ल्यू-गैस डिसल्फराइजेशन (एफजीडी) संयंत्र की स्थापना करना; तथा
  • दूसरा यह सुनिश्चित करना कि कोयला ट्रांसपोर्ट करने वाले सभी रेलवे वैगनों को तिरपाल से कवर किया जाना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल, तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी है कि एफजीडी संयंत्र को स्थापित करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही यह भी जानकारी दी गई है कि 11 दिसंबर, 2017 को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यूनिट 1 और 2 के लिए 31 दिसंबर, 2022 और यूनिट 3 से 5 के लिए 31 दिसंबर, 2021 तक एफजीडी को लगाने का समय दिया था।

उन्होंने यह भी बताया कि एनजीटी ने इस काम के लिए छह महीने की मोहलत दी है जो अगस्त 2020 में ख़त्म हो जाएगी, लेकिन इतनी अवधि में इस काम का पूरा हो पाना असंभव है। हालांकि उन्होंने बताया कि तिरपाल से कवर करने के मुद्दे पर एनटीपीसी, रेल मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है, और इस काम को निर्धारित एक महीने की अवधि में पूरा कर लिया जाएगा। मामले पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समय-सीमा को बढ़ा दिया है। कोर्ट ने सीपीसीबी की निर्धारित सीमा के अनुसार यूनिट 1 और 2 के लिए 31 दिसंबर, 2022 और यूनिट 3 से 5 के लिए 31 दिसंबर, 2021 तक एफजीडी लगाने का समय दे दिया है। साथ ही वैगनों को तिरपाल से ढंकने के लिए तय समय सीमा को एक महीने का ही रखा है। 

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एनटीपीसी को यह भी निर्देश दिया है कि इस काम को पूरा करने के लिए वो समय सीमा के भीतर सभी जरुरी कदम उठाए जिससे एनजीटी एफजीडी संयंत्र की स्थापना के लिए किये जा रहे कामों से संतुष्ट हो सके। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हर तीन महीने के अंदर काम में हो रही प्रगति के विषय में एक रिपोर्ट एनजीटी में प्रस्तुत करने के भी आदेश दिए हैं जिससे काम की रफ्तार पर निगरानी रखी जा सके। 

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है चूंकि यह मामले पहले ही 28 जुलाई, 2020 को एनजीटी के समक्ष सूचीबद्ध है, ऐसे में उस तारीख पर अपीलकर्ता ने क्या ठोस कदम उठाएं हैं, उस बाबत एक हलफनामा एनजीटी में दायर किया जाना चाहिए जिसमें उन जरूरी क़दमों की जानकारी दी जाए जो अब तक उठाए गए हैं और आगे उठाए जाने हैं।