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भोजन की बर्बादी को रोकने में मदद करेगा यह नया सेंसर: खोज

रसायन शास्त्रियों ने अब एक छोटे सेंसर का निर्माण किया है, जो मिश्रण में इस गैस का 15 अरबवें भाग का पता लगा सकता है

By Dayanidhi

On: Thursday 19 March 2020
 
Photo: wikimedia commons
Photo: wikimedia commons Photo: wikimedia commons

जैसे ही फूल खिलते हैं और फल पकते हैं, वे एथिलीन नामक एक रंगहीन, मीठी-महक वाली गैस का उत्सर्जन करते हैं। मेसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के रसायन शास्त्रियों ने अब एक छोटे सेंसर का निर्माण किया है, जो मिश्रण में इस गैस का 15 अरबवें भाग का पता लगा सकता है, जो भोजन खराब होने से रोकने में उपयोगी साबित होगा। यह शोध जर्नल एसीएस सेंट्रल में प्रकाशित हुआ है।

एमआईटी में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर टिमोथी स्विगर कहते हैं कि यह सेंसर कार्बन नैनोट्यूब नामक अर्धचालक सिलेंडर से बनाया गया है। इसका उपयोग फल और सब्जियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। क्योंकि वे खाद्य अपशिष्ट को कम करने में मदद कर सकते है।

स्वैगर कहते हैं कि बेहतर खाद्य प्रबंधन और भोजन की बर्बादी को कम करने के लिए लगातार कोशिश करने की आवश्यकता है। जो लोग फलों को परिवहन के माध्यम से एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं, वे जानना चाहते हैं कि दूसरी जगह ले जाने के दौरान यह सेंसर किस तरह काम करेगा। क्या परिवहन से दूसरी जगह ले जाते समय एथिलीन को कम करने की आवश्यकता होगी। 

प्लांट हार्मोन के रूप में अपनी प्राकृतिक भूमिका के अलावा, एथिलीन दुनिया का सबसे व्यापक रूप से निर्मित कार्बनिक यौगिक भी है। एथिलीन का उपयोग प्लास्टिक और कपड़ों के निर्माण के लिए किया जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के औद्योगिक एथिलीन निर्माण की निगरानी के लिए एथिलीन का पता लगाने वाला (डिटेक्टर) काफी उपयोगी हो सकता है।

एथिलीन का उत्पादन अधिकांश पौधों द्वारा किया जाता है, जो इनके विकास, फलों के पकने और उनके जीवन चक्र के अन्य प्रमुख चरणों को पूरा करने के लिए एक हार्मोन के रूप में उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, केले एथिलीन का बड़ी मात्रा में उत्पादन करते हैं क्योंकि वे पकते हैं और भूरे रंग के हो जाते हैं, और जब फूल इसे पैदा करते हैं तब वे खिलने के लिए तैयार हो जाते हैं। तनाव के समय फूल एथिलीन के उत्पादन को बंद कर सकते हैं, जिससे वे समय से पहले पक सकते है या वे सूख सकते हैं। दुनिया भर के सुपरमार्केटों में हर साल फलों और सब्जियों के खराब होने के कारण इनका काफी नुकसान हो जाता है।

इससे पहले भी स्वैगर की लैब ने एक एथिलीन सेंसर विकसित किया था, जिसमें हजारों कार्बन नैनोट्यूब लगी थीं। इन कार्बन सिलेंडरों में इलेक्ट्रॉन तेजी से प्रवाहित होते हैं, इसलिए शोधकर्ताओं ने तांबे के परमाणुओं को जोड़ा जो इलेक्ट्रॉन प्रवाह को धीमा कर देते हैं। जब एथिलीन मौजूद होता है, तो यह तांबे के परमाणुओं से बंध जाता है और इलेक्ट्रॉनों को धीमा कर देता है। इस धीमेपन को मापने से पता चलता है कि इसमें एथिलीन कितना मौजूद है। हालांकि, यह सेंसर केवल एथिलीन के स्तर को 500 बिलियन प्रति अरब तक कम कर सकता है, और क्योंकि सेंसर में तांबा होता है, इसलिए वे अंततः इसमें ऑक्सीजन कम हो जाती है और यह काम करना बंद कर देता है।

स्वैगर और फोंग ने एक नए तरह का एथिलीन सेंसर बनाया जो कार्बन नैनोट्यूब पर ही आधारित है, लेकिन एक पूरी तरह से अलग प्रणाली पर काम करता है, जिसे वेकर ऑक्सीकरण के रूप में जाना जाता है। तांबा जैसे एक धातु को शामिल करने के बजाय जो सीधे एथिलीन से बध जाता है, उन्होंने पैलेडियम नामक एक धातु उत्प्रेरक का उपयोग किया जो ऑक्सीकरण की प्रक्रिया के दौरान एथिलीन में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ा देता है।

सेंसर एथिलीन के संपर्क में आने के कुछ सेकंड के भीतर प्रतिक्रिया करता है, और गैस के निकल जाने के बाद, सेंसर कुछ ही मिनटों में अपनी वास्तविक स्थिति में वापस जाता है।

सेंसर की क्षमताओं का परीक्षण करने के लिए, शोधकर्ताओं ने एक ग्लास स्लाइड पर कार्बन नैनोट्यूब और अन्य सेंसर संबधित चीजों को जमा किया। इसके बाद उन्होंने इसे दो प्रकार के फूलों में एथिलीन उत्पादन की निगरानी करने के लिए इस्तेमाल किया, जिसमें कि गुलनार (कार्नेशन्स) और बैंगनी लियानथस को शामिल किया गया था। उन्होंने पांच दिनों में एथिलीन उत्पादन को मापा, जिससे उन्हें एथिलीन के स्तर और पौधों के फूल के बीच संबंधों को ट्रैक करने में मदद मिली।

गुलनार (कार्नेशन्स) पर किए गए अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रयोग के पहले दिन एथिलीन में तेजी से वृद्धि हुई थी, और इसके कुछ ही दिनों बाद फूल खिल गए थे।

बैंगनी लिटियनथस फूलों में एथिलीन की लगातार अधिक वृद्धि दिखाई दी, जो पहले दिन शुरू हुई और चौथे दिन तक चली, इसके बाद इसमें गिरावट शुरू हुई। इसके विपरीत, फूलों का खिलना कई दिनों तक बढ़ गया था, और कुछ फूल अभी भी प्रयोग के अंत तक खिल नहीं पाए थे।

शोधकर्ताओं ने यह भी अध्ययन किया कि क्या फूलों के साथ आने वाले पौधों के भोजन के पैकेट का एथिलीन उत्पादन पर कोई प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पाया कि पौधों में एथिलीन उत्पादन और खिलने में थोड़ी देरी दिखाई दी, लेकिन ज्यादा प्रभाव नहीं दिखाई दिया।