आखिर एक ‘स्वस्थ खुराक’ है क्या ? संयुक्त राष्ट्र ने एक पेपर में की व्याख्या

फूड सिस्टम्स समिट से पहले जारी अपने नए पेपर में संयुक्त राष्ट्र ने खाद्य-पोषण और खाद्य-सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे हैं

By DTE Staff

On: Wednesday 04 August 2021
 

अच्छी सेहत पाने के लिए हमें अक्सर ‘स्वस्थ खुराक’ लेने के लिए कहा जाता है। हालांकि हममें से ज्यादातर लोगों को यह नहीं मालूम है कि वास्तव में एक ‘स्वस्थ खुराक’ का सही मतलब क्या होता है। वह क्या चीज है जो किसी खाने को ‘स्वस्थ खुराक’ बनाती है। इस सवाल का जवाब तलाश लिया गया है।

सितंबर 2021 में होने वालेे फूड सिस्टम्स समिट से पहले लिनेट एम न्यूफेल्ड, शेरिल हेंड्रिक्स और मार्टा हयूगस द्वारा लिखे पेपर में इस सवाल का जवाब तलाशा गया है। इस पेपर का नाम है, ‘स्वस्थ खुराक - फूड सिस्टम्स समिट के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक परिभाषा’। इसमें खुराक, खाने और इन दोनों के बीच के अंतर को परिभाषित किया गया है। साथ ही इसमें यह भी बताया गया है कि एक पोषण वाली और सुरक्षित खुराक कैसे तैयार होती है।

लेखकों के मुताबिक, ‘ एक स्वस्थ खुराक वह है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद और हमें बीमारियों से बचाने वाली होती है। इसमें पोषित भोजनों से हमारे शरीर के लिए जुटाए गए जरूरी पोषण और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक तत्व बिना कम या ज्यादा मात्रा के शामिल होते है। इस खुराक में वह चीजें शामिल नहीं होतीं, जिनमें हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व होते हैं।
 
लेखक आगे कहते हैं कि लंबा समय बीतने के साथ कोई भी आदमी तमाम तरह के खाने खाता है। एक अच्छी खुराक में तमाम तरह के खानों का उपयुक्त मा़त्रा में मिश्रण होता है। उसमें किसी भी चीज की मात्रा कम या अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसी खुराक में शामिल खाना सुरक्षित और पोषणयुक्त होता है।

तो, वास्तव में ‘ पोषणयुक्त खाना’ क्या हैै ? यह वह खाना है, जिसमें सभी तरह के पोषण वाले तत्व जैसे प्रोटीन, विटामिन, खनिज, एमिनो एसिड, फैटी एसिड, और रेशेयुक्त पदार्थ शामिल होते हैं।

इस खाने में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व जैसे सोडियम, संतृप्त वसाएं और शक्कर कम से कम मात्रा में होते हैं।

लेखकों ने यह भी पाया कि किसी खाने को पूरी तरह पोषणयुक्त या कम पोषणयुक्त मानने का दुनिया में कोई एक सार्वभौमिक तरीका नहीं है। हाल के सालों में जो एक तरीका विकसित हुआ है, वह है - ‘ पोषण की रूपरेखा तैयार करना’।

इसमें उस खाने की प्रति सौ ग्राम मात्रा या सौ किलो कैलोरी एनर्जी से मिलने वाले पोषण के आधार पर उसकी रैंकिंग तय की जाती है। लेखकों ने आगे बताया कि किसी खाने के ज्यादा या कम पोषणयुक्त गुणों को श्रेणीबद्ध करने की दिशा में अभी काफी काम होना बाकी है।

पेपर के मुताबिक, अलग - अलग लिंग, उम्र और जीवन की  अवस्था के अनुसार व्यक्ति को पोषण की जरूरत होती है। कोई ऐसा एक पोषित तत्व नहीं है, जो सभी के लिए एकसमान फायदेमंद हो।

इस दिशा में अभी और ज्यादा ज्ञान हासिल किया जाना बाकी है। कई तरह के खाद्य संयोजन ऐसे भी हैं, जिनसे संबधित आंकड़ों की कमी है। उदाहरण के लिए, खाए जाने वाले कीड़ों के बारे में कम जानकारी उपलब्ध है, कयोंकि यह कम प्रचलित खा़द्य पदार्थ हैं।

इनके बारे में उपलब्ध आंकडे़ पुराने हैं और उनमें सुधार की जरूरत है। इसके अलावा खाद्य- प्रसंस्करण और इससे जुड़े स्वास्थ्य संबंधी अनुमानों में सर्वसम्मत राय की कमी है। इस पेपर में लेखकों ने खाद्य- पोषण के अलावा खाद्य-सुरक्षा पर भी बात की है।

उन्होंने इसमें ‘उन सारे संकटों को शामिल किया है, जा किसी खाने को उसके उपभोक्ता के लिए हानिकारक बनाते हैं, भले ही ये संकट गंभीर हों या सामान्य’।

उनके मुताबिक, कोई भी खाना जैविक संकटों की वजह से, रोगाणुआों की वजह से या फिर कीटनाशकों और जानवरों की दवाईयों जैसे रासायनिक दूषक पदार्थों की वजह से हानिकारक हो जाता है।