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मील का पत्थर साबित होगा फूड लेवलिंग कानून: सीएसई  

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेवलिंग एंड डिस्प्ले) विनियमनों 2019 मसौदे का स्वागत किया है

 
By DTE Staff
Last Updated: Monday 15 July 2019

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेवलिंग एंड डिस्प्ले) विनियमनों 2019 मसौदे का स्वागत किया है। यह मसौदा फिलहाल लोगों की प्रतिक्रियाओं के लिए एफएसएसएआई की वेबसाइट पर उपलब्ध है। लागू होने के बाद यह वर्तमान खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग एंड लेवलिंग) विनियमनों 2011 की जगह ले लेगा।

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण बताती हैं, “यह एक बड़ा कदम है जो लोगों को उच्च वसा, सुगर और नमक युक्त अस्वस्थ भोजन को पहचानने में मदद करेगा। इससे मोटापे की बढ़ते मामलों और गैर संक्रामक रोगों को सीमित करने में मदद मिलनी चाहिए।”

इस मसौदे में सोडियम की मात्रा, एडेड सुगर, सैचुरेटेड फैट, ट्रांसफैट और कोलेस्ट्रॉल की जानकारी देने को अनिवार्य किया गया है। प्रस्तावित मसौदे में यह भी कहा गया है कि भोजन की मात्रा (सर्विंग साइज) एवं एक बार में परोसे जाने वाले भोजन में पोषक तत्वों की जानकारी भी अनिवार्य रूप से देनी होगी। यह रेकमेंडेड डायट्री अलाउंस (आरडीए) के अनुसार होनी चाहिए।

सीएसई में उप महानिदेशक चंद्र भूषण कहते हैं कि नमक, सुगर, फैट की लेबलिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मधुमेह और उच्च रक्तचाप घर-घर की समस्या है। पैकेटबंद भोजन में इन चीजों की मात्रा बहुत अधिक रहती है और आमतौर पर इसकी जानकारी नहीं दी जाती। इससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मसौदे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पैकेट के सामने (एफओपी) लेबलिंग और लाल रंग की चेतावनी देने की बात कही गई है। इससे उच्च कैलोरी वाले भोजन, सैचुरेटेड फैट, ट्रांसफैट, एडेड सुगर और नमक की पहचान हो जाएगी। प्रस्तावित एफओपी लेबल में प्रति व्यक्ति को दिए जाने वाले भोजन में (पर सर्व) कैलोरी की संख्या, नमक की मात्रा, एडेड सुगर और फैट की जानकारी होगी। लेबल से यह भी पता चलेगा कि प्रति सर्व कितनी आरडीए का उपभोग होगा। यदि नमक, एडेड सुगर, और फैट का एक सीमा के बाद उपभोग होगा तो लाल रंग की चेतावनी पैकेट में उभर आएगी।

सीएसई में फूड सेफ्टी एंड टॉक्सिंस में कार्यक्रम निदेशक अमित खुराना बताते हैं कि लाल रंग की चेतावनी का प्रतीक बहुत महत्वूपर्ण है। इससे उपभोक्ताओं को जंक फूड पहचाने में मदद मिलेगी। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें साक्षरता और भाषा आड़े नहीं आएगी।

सीएसई के शोधकर्ता इन आवश्यक फूड लेवलिंग पर जोर देते रहे हैं। उनका मानना है कि फास्ट फूड आउटलेट्स में परोसा जाने वाला जंक फूड भी इस मसौदे के दायरे में लाया जाए। साथ ही जंक फूड का विज्ञापन भी बच्चों को लक्षित करने से रोका जाए।

चंद्र भूषण बताते हैं, “मसौदा जब कानून का रूप लेगा तो यह भारत के खाद्य सुरक्षा कानूनों में मील का पत्थर साबित होगा। हम एफएसएसएआई से मांग करते हैं कि इन विनियमनों को जल्द से जल्द अधिसूचित किया जाए।”

सीएसई ने एफएसएसएआई को कुछ सुझाव दिए हैं जिससे मसौदे को और प्रभावी बनाए जा सके। जैसे

1 एफओबी लेबल में एडेड सुगर के बजाय कुल सुगर प्रदर्शित किया जाए और सैचुरेटेट फैट के बजाय कुल फैट प्रदर्शित किया जाए। वर्तमान मसौदे से समस्या का कुछ हद तक ही निदान हो जाएगा

2 सोडियम की जगह नमक प्रदर्शित किया जाए क्योंकि आम लोगों के लिए इसे समझना आसान होता है

3 सर्विंग साइज का मानक निर्धारित हो ताकि इसका पालन प्रभावी हो।

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