Governance

जलभराव की जकड़न

पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में पानी भरा रहता है। इससे कामकाजी लोगों और स्कूली बच्चों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 

 
By Bhagirath Srivas
Published: Friday 15 September 2017
विकास चौधरी / सीएसई
विकास चौधरी / सीएसई विकास चौधरी / सीएसई

बरसात के मौसम में महानगरों की स्थिति बद से बदतर हो जाती है। पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में घंटों पानी भरा रहता है। ऐसे हालात में कामकाजी लोगों और स्कूली बच्चों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर लगने वाला जाम इस दौरान आम हो जाता है। जलभराव के कारण कई बार हादसे तक हो जाते हैं। दिल्ली का दक्षिणी क्षेत्र भी मानसून के दौरान जलभराव की विकट स्थिति का सामना करता है। इस समस्या को समझने के लिए भागीरथ ने जनप्रतिनिधियों से बात की :

मेरे वार्ड में करीब 43 हजार 700 वोटर हैं। वार्ड में करीब सवाल लाख की आबादी रहती है। सबसे बड़ी समस्या सफाई की है। कच्ची रोड और टूटी नालियों की समस्या सबसे बड़ी है। 2007 में बाढ़ नियंत्रण विभाग ने यहां गलियां बनाई थीं। उसके बाद से गलियां नहीं बनीं। उस वक्त रमेश बिधूड़ी जी विधायक थे। उसके बाद कई जगह नालियां टूट गई हैं। कई जगह लोगों ने बंद कर दी हैं। इस वजह से पानी नहीं निकल पाता। निगम की निधि यहां नहीं लग सकती। बाढ़ नियंत्रण विभाग यहां निधि लगा नहीं रहा। विधायक सोया हुआ है। वार्ड में 868 गलियां हैं। मेरा वार्ड हमदर्द से चालू होता है और पीपल चौक से आगे बाउंड्री पर खत्म होता है। वार्ड ढाई किलोमीटर लंबा है। दूसरी तरफ मंगल बाजार रोड पर एमबी रोड से शुरू होकर अंत में दीवार तक जाता है। इतनी ही दूरी में दायीं तरफ तीन निगम पार्षद हैं। मेरा वार्ड सबसे लंबा है।

पानी की निकासी न होने के कारण जलभराव हो जाता है। बाढ़ नियंत्रण विभाग ने यहां नाला बनाया है। रतिया मार्ग एमसीडी के अधीन नहीं है, इसलिए सांसद और पार्षद नििध यहां नहीं लग सकती। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है। वह आंखें बंद करके बैठी है। सरकार ने निगम चुनाव से पहले सीवर लाइन डालने का लुभावना वादा किया था। अब उसका काम ठप है। फिर भी पानी की निकासी के लिए हम नाले और नालियों की सफाई करा रहे हैं। जेसीबी से नाले की सफाई की जा रही है। सिल्ट गाड़ियों से लगे हाथ उठाई जा रही है। आने वाले कुछ समय में पानी की निकासी की समस्या को समाप्त कर दिया जायेगा।

दो से तीन महीने के अंदर यह काम हो जाएगा। जहां तक बरसात में होने वाले जलभराव की बात है तो यही कहा जा सकता है कि बारिश का पूरा पानी नाले में नहीं जा सकता। पूरी दिल्ली में भी ऐसा संभव नहीं है। कुछ समय बाद पानी निकल ही जाता है।

मेरे संसदीय क्षेत्र में करीब 18 लाख मतदाता हैं। अगले साल ये मतदाता बढ़कर 19 लाख हो जाएंगे। आबादी की बात करें तो यहां करीब 35 से 36 लाख की आबादी होगी। क्षेत्रफल के लिहाज बदरपुर में यमुना से लेकर द्वारका तक मेरा संसदीय क्षेत्र 32 से 35 किलोमीटर लंबा है। चौड़ाई चार से पांच किलोमीटर है।

यहां कई समस्याएं हैं। पीने के पानी की सबसे गंभीर समस्या है। बढ़ता ट्रैफिक भी समस्या है। सड़कें ठीक नहीं हैं। बच्चों के लिए पूरे क्षेत्र में कॉलेज नहीं हैं। कुछ पुराने कॉलेज ही चल रहे हैं। कॉलेज के लिए दिल्ली सरकार राजनीति के कारण जमीन नहीं देती।

जलभराव यहां की अस्थायी समस्या है। बरसात होगी तो जलभराव हो जाता है। इसकी वजह है कि यहां सीवेज सिस्टम नियमित तरीके से नहीं बने हैं। सरकारों ने कभी इसके लिए प्रयास ही नहीं किए हैं। 15 साल कांग्रेस की सरकार रही है। अब करीब ढाई साल से अाम आदमी पार्टी की सरकार है। 17 साल में दिल्ली की आबादी 15 से 20 लाख बढ़ गई है। इसे देखते हुए सही तरीके से योजना बनाई जानी चाहिए थी। जलभराव से निपटने के लिए जो ड्रेन बने हैं, उनकी क्षमता, सफाई और उनकी लेवलिंग पर ध्यान नहीं दिया गया। एमसीडी एक अलग विभाग है, पीडब्ल्यूडी अलग विभाग है।

सिंचाई विभाग भी अलग तरीके से काम करता है। बहु एजेंसियों को ध्यान में रखते हुए सरकार के मुखिया का कर्तव्य बनता है कि वह सांसद, विधायक सबको बुलाए और मीटिंग बुलाकर सभी विभागों के साथ बिठाकर सोहाद्रपूर्ण और ईमानदारी से काम करे। जलभराव की समस्या गलत सरकार के होने के कारण है। सभी बड़े रोड पीडब्ल्यूडी के अधीन हैं, वो एमसीडी के दायरे में नहीं आते। राज्य का मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी बनती है कि सभी एजेंसियां से बात करें और उनके सुझाव पर फंड वितरित करें।

‘नीति राजनीति’ में हम किसी स्थानीय समस्या को लेकर संबंधित क्षेत्र के ग्राम प्रतिनिधि/पार्षद और लोकसभा सदस्य से बातचीत करेंगे। यह किसी समस्या को स्था‍नीय प्रतिनिधियों के नजरिए से देखने का प्रयास है।

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