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कोरोनावायरस का साइड इफेक्ट: मध्यप्रदेश में सत्ता के खेल में भूखे न रह जाएं बच्चे?

मध्यप्रदेश की नई सरकार ने कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए आंगनबाड़ी बंद कर बच्चों को टेक होम राशन पहुंचाने की बात कही है, लेकिन जमीन पर स्थिति बिल्कुल अलग है

On: Thursday 26 March 2020
 
फोटो: मनीष चंद्र मिश्र
फोटो: मनीष चंद्र मिश्र फोटो: मनीष चंद्र मिश्र

मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों को नोवेल कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए 14 मार्च से प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं। बच्चों को पोषण देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने 17 मार्च को एक आदेश में बच्चों को टेक होम राशन जारी रखने के आदेश दिए, लेकिन जमीन पर इस आदेश का अमल होता नहीं दिख रहा है। इससे पहले सत्ता को लेकर चले खेल की वजह से इस पर निर्णय नहीं लिया जा सका था।

शिवपुरी जिले के सामाजिक कार्यकर्ता अजय सिंह यादव बताते हैं कि उनके इलाके में दिसंबर 2019 से टेक होम राशन की आपूर्ति नहीं हुई जिससे बच्चों तक पोषण आहार नहीं पहुंचाया जा रहा है। इस जिले का पोहरी सहरिया आदिवासी बाहुल्य विकासखंड है, जहां लम्बे समय तक कुपोषण के कारण बच्चों की मृत्यु के मामले दर्ज होते रहे हैं। पन्ना जिले के सामाजिक कार्यकर्ता युसूफ बेग ने बताया कि कुछ आंगनवाडी केन्द्रों में पिछले मंगलवार को टेक होम राशन बंटा। किन्तु दो हफ़्तों से गरम पका हुआ पोषण आहार बंद कर दिया गया है। 3 से 6 साल के बच्चों को टेक होम राशन नहीं दिया जा रहा है। निवाड़ी जिले के सामाजिक कार्यकर्ता मस्तराम सिंह घोष ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार सभी हितग्राहियों को टेक होम राशन दिए जाने की व्यवस्था नहीं बन पायी है। इसी तरह की स्थिति उमरिया, सतना और रीवा जिले में भी है जहां टेक होम राशन नहीं बांटा जा सका है। ये सभी सामाजिक कार्यकर्ता भोजन के अधिकार अभियान से जुड़े हैं और अपने इलाकों में पोषण को लेकर काम करते हैं।

मध्यप्रदेश में काम कर रही संस्था भोजन के अधिकार अभियान ने पोषण आहार बांटने की जमीनी हकीकत को सरकार के साथ साझा किया है। भोजन के अधिकार अभियान के सचिन कुमार जैन ने कहा है कि संक्रमण से लड़ने के लिए खादय सुरक्षा को मजबूत करना भी सबसे बड़ी जरूरत है, इसमें स्थानीय लोगों, स्वसहायता समूहों को शामिल नहीं किया गया है।  जबकि इस वक्त वह भी अपनी सामाजिक भूमिका निभा सकते हैं। 

मध्यप्रदेश में 42.8 प्रतिशत बच्चे कम वज़न के हैं और 42 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग कुपोषण से प्रभावित हैं. सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि 9 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे अति गंभीर कुपोषण के शिकार हैं और 56 प्रतिशत महिलायें खून की कमी की शिकार हैं. प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने से संक्रमण का बहुत गहरा असर पड़ता है. कोरोना-कोविड 19 से निपटने की नीति बनाते समय बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किये जाने की जरूरत है। मध्यप्रदेश में 97135 आंगनवाडी और मिनी आंगनवाड़ी केंद्र हैं जिनमें शामिल 89,70,403 हितग्राहियों को पोषण आहार दिया जाना है। पोषण आहार पाने वाले बच्चों में 6 माह से 3 वर्ष तक के 34,37,973 बच्चे और 3 वर्ष से 6 वर्ष तक के 38,54,035 बच्चे शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में इस वक्त 7,49,815 गर्भवति महिलाएं हैं।

डाउन टू अर्थ ने महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त नरेश पाल से टेक होम राशन की आपूर्ति को लेकर जानकारी लेनी चाही लेकिन वो जानकारी देने के लिए उपलब्ध नहीं थे।

इसके अलावा, मध्यप्रदेश के स्कूल में भी पिछले 10 दिनों से मिड डे मील नहीं दिया जा रहा है।  हालांकि, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि कुल 65 लाख 91 हजार विद्यार्थियों के खाते में मध्यान्ह भोजन के लिए 156 करोड़ 15 लाख रूपए की राशि भेजी जाएगी।