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नीदरलैंड के किशोरों से 15.2 सेमी ठिगने हैं भारतीय किशोर, ये हैं वजह

इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोध में 193 देशों के पांच से 19 आयु वर्ग के 6.5 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य सम्बन्धी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है

By Lalit Maurya

On: Thursday 12 November 2020
 

इंपीरियल कॉलेज लंदन के नेतृत्व में किए गए वैश्विक विश्लेषण के अनुसार भारतीय बच्चों और किशोरों की लंबाई नीदरलैंड्स के बच्चों की तुलना में करीब 15.2 सेंटीमीटर कम पाई गई है। इस शोध में 193 देशों के स्कूल-आयु वर्ग के बच्चों और किशोरों की ऊंचाई और वजन का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है। जिसमें बच्चों की ऊंचाई के मामले में भारत को 182वां स्थान दिया गया है। जबकि इसके विपरीत नीदरलैंड्स को इस तालिका में पहला स्थान मिला है। 2019 के आंकड़ों के अनुसार नीदरलैंड्स के बच्चों की औसत ऊंचाई 170.4  सेंटीमीटर दर्ज की गई है। वहीं भारतीय बच्चों और किशोरों की औसत ऊंचाई 155.2 अंकित की गई है। हालांकि इससे पहले 1985 में भारतीय बच्चों की औसत ऊंचाई 151.5 दर्ज की गई थी। जिसका मतलब है कि पिछले 35 वर्षों  की अवधि में भारतीय बच्चों की ऊंचाई में करीब 3.7 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है।

यदि सबसे लम्बे कद के बच्चों वाले देश नीदरलैंड्स और सबसे कम ऊंचाई वाले बच्चों के देश ग्वाटेमाला को देखें तो वहां बच्चों की औसत ऊंचाई में करीब 20 सेंटीमीटर तक का अंतर है। यह ऊंचाई लड़कियों के लिए आठ साल और लड़कों के लिए छह साल के विकास के अंतर को दिखाती है। 

इंपीरियल कॉलेज लंदन द्वारा किया गया यह शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल लांसेट में प्रकाशित हुआ है। जिसमें 193 देशों के पांच से 19 आयु वर्ग के 6.5 करोड़ बच्चों के स्वास्थ्य सम्बन्धी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। जिससे पता चला है कि दुनिया भर में स्कूल जाने योग्य बच्चों की ऊंचाई और वजन में काफी असमानता है। जो उनके स्वास्थ्य और आहार की गुणवत्ता के चलते है।

कुछ खास अच्छी नहीं है अन्य दक्षिण एशियाई देशों की भी स्थिति

अध्ययन के अनुसार भारत के साथ-साथ अन्य दक्षिण एशियाई देशों की स्थिति भी  कुछ खास अच्छी नहीं है। जहां बांग्लादेश को बच्चों की ऊंचाई के मामले में 199 वां स्थान दिया गया है, जहां बच्चों की औसत ऊंचाई 2019 में 152.4 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। 152.4 सेंटीमीटर की औसत ऊंचाई के साथ नेपाल को 198 वें स्थान पर रखा है। मालदीव्स को 193 वें स्थान पर जगह मिली है, जहां बच्चों की औसत ऊंचाई 154.3 सेंटीमीटर दर्ज की गई है। पाकिस्तान की स्थिति भी कुछ ख़ास अच्छी नहीं है 154.8 सेंटीमीटर के साथ वो 186 वें पायदान पर है। वहीं 155.2 सेंटीमीटर की औसत ऊंचाई के साथ भूटान को भारत के बाद 183 वें स्थान पर जगह मिली है। जबकि 155.9 सेंटीमीटर की ऊंचाई के साथ श्रीलंका 176 वें पायदान पर है जो 1985 में 152.7 सेंटीमीटर की औसत ऊंचाई के साथ 181 वें स्थान पर था।

शोध के अनुसार पिछले 35-वर्षों की अवधि में बच्चों की औसत ऊंचाई में सबसे बड़ा सुधार उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं जैसे चीन, दक्षिण कोरिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में देखा गया है। उदाहरण के लिए, 1985 की तुलना में 2019 में चीनी बच्चों की ऊंचाई में 8 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। जिसका वैश्विक रैंक 1985 में 150 वें स्थान से 2019 में 65 वें स्थान पर पहुंच गया है। वहीं अफ्रीकी बच्चों, विशेषकर लड़कों की ऊंचाई में इस अवधि में स्थिरता या कमी दर्ज की गई है।