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90 दिनों के अंदर मानसिक बीमारी से ग्रस्त पाए गए 18.1 फीसदी कोरोना मरीज

नए शोध से पता चला है कि इलाज के 90 दिनों के भीतर करीब 18.1 फीसदी मरीज किसी एक मानसिक विकार से ग्रस्त पाए गए थे

By Lalit Maurya

On: Tuesday 10 November 2020
 

हाल ही में किए एक नए शोध से पता चला है कि इलाज के 90 दिनों के भीतर करीब 18.1 फीसदी मरीज किसी न किसी मानसिक विकार से ग्रस्त पाए गए थे| शोध के अनुसार कोरोनावायरस से ग्रस्त लोगों में कई तरह के मनोविकारों जैसे अनिद्रा, चिंता या अवसाद का खतरा कहीं अधिक रहता है| साथ ही अध्ययन के अनुसार इन रोगियों में आगे चलकर मनोभ्रंश का खतरा कहीं अधिक बढ़ जाता है| मनोभ्रंश एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क दुर्बल हो जाता है, और पागलपन की स्थिति बन जाती है| यह शोध यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड द्वारा किया गया है, जोकि जर्नल लैंसेट साइकेट्री में प्रकाशित हुआ है|

अध्ययन के अनुसार कोविड-19 से ग्रस्त 5.8 फीसदी मरीजों में 14 से 90 दिनों में पहली बार मानसिक विकार के लक्षण पाए गए थे| जबकि इन्फ्लुएंजा के 2.8, सांस से जुड़े संक्रमण के 3.4, त्वचा के संक्रमण से ग्रस्त 3.3, पित्त की पथरी से ग्रस्त 3.2 और फ्रैक्चर से ग्रस्त 2.5 फीसदी मरीजों में किसी मानसिक रोग के लक्षण पहली बार देखे गए थे|

इस शोध में अमेरिका के स्वास्थ्य सम्बन्धी 6.9 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया है, जिसमें से 62,000 से अधिक मामले कोविड-19 से जुड़े थे| दुनिया भर में कोविड-19 के चलते बड़ी संख्या में लोगों के शारीरिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा रहा है| इसके साथ ही लोगों का मानना है कि यह बीमारी मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल रही है|

मानसिक रूप से ग्रस्त लोगों में 65 फीसदी ज्यादा है कोरोना के संक्रमण का खतरा

इस शोध से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में मनोचिकित्सा के प्रोफेसर पॉल हैरिसन ने बताया कि लोगों की यह चिंता जायज है| इस शोध से पता चला है कि कोविड-19 मानसिक विकारों के खतरे को और बढ़ा रहा है| अध्ययन से यह भी पता चला है कि पहले से मानसिक रूप से बीमार लोगों में कोविड-19 के पाए जाने की संभावना 65 फीसदी ज्यादा थी।

इस शोध में शोधकर्ताओं ने कोविड-19 के मरीजों के साथ इन्फ्लूएंजा, सांस की बीमारी, त्वचा के संक्रमण, हड्डी के फ्रैक्चर, पित्त और गुर्दे की पथरी जैसे रोगों से ग्रस्त मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य का विश्लेषण किया है| विश्लेषण के मुताबिक कोरोना के 18 फीसदी, इन्फ्लूएंजा के 13 फीसदी और फ्रैक्चर के करीब 12.7 फीसदी मरीजों में मानसिक विकारों के होने का खतरा होता है|

गौरतलब है कि दुनिया भर में 5 करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जबकि यह अब तक 12,70,494 लोगों की जान ले चुका है। भारत में भी इस वायरस के चलते अब तक 127,059 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि यह करीब 86 लाख से भी ज्यादा लोगों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। यह वायरस कितना गंभीर रूप ले चुका है इस बात का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यह दुनिया के 216 देशों में फैल चुका है और शायद ही इस धरती पर कोई ऐसा होगा जिसे इस वायरस ने प्रभावित न किया हो।