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कोविड-19 से हुए नुकसान का केवल 2 फीसदी भविष्य में रख सकता है महामारियों से सुरक्षित

अगले 10 वर्षों में वन्यजीवों और जंगलों की रक्षा के लिए किया गया 19,90,757 करोड़ रुपए का निवेश भविष्य में कोरोनावायरस जैसी महामारियों से बचा सकता है

By Lalit Maurya

On: Monday 27 July 2020
 

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि यदि अगले 10 वर्षों में 19,90,757 करोड़ रुपए (26,600 करोड़ डॉलर) का निवेश वन्यजीवों और जंगलों की रक्षा के लिए किया जाए तो इससे भविष्य में कोरोनावायरस जैसी महामारियों से बचा जा सकता है। इसे कोविड-19 से हुए नुकसान के मुकाबले देखें तो यह केवल उसके 2 फीसदी के ही बराबर है। अनुमान है कि कोरोनावायरस के कारण अब तक 8,60,66,575 करोड़ रुपए (11,50,000) करोड़ डॉलर का नुकसान हो चुका है जिसमें आर्थिक और जीवन क्षति दोनों को शामिल किया गया है। यह जानकारी प्रिंसटन यूनिवर्सिटी द्वारा किये एक शोध में सामने आई है जो अंतराष्ट्रीय जर्नल साइंस में प्रकाशित हुआ है।

वहीं इस शोध से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एंड्रयू डॉब्सन के अनुसार “यदि भविष्य में इस तरह की महामारियों से बचने की वार्षिक लागत को देखें, तो वह दुनिया के 10 सबसे अमीर देशों द्वारा सेना पर खर्च की जा रही धनराशि के केवल 1 से 2 फीसदी के बराबर है। ऐसे में यदि हम कोरोना महामारी को यदि एक युद्ध की तरह देखें तो यह निवेश बहुत साधारण है।”

हर साल औसतन 2 वायरस करते हैं इंसानों पर हमला 

यदि पिछले 100 वर्षों में देखें तो हर साल करीब 2 वायरस अपने प्राकृतिक आवास से निकलकर इंसानों में फैले हैं। लेकिन जिस तेजी से आज प्रकृति का विनाश हो रहा है, उनके और ज्यादा तेजी से इंसानों में फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। इंसान अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए तेजी से जंगलों को नष्ट कर रहा है, जानवरों को मार रहा है या फिर अपना पालतू बना रहा है। इनका व्यापर तेजी से सारी दुनिया में फैलता जा रहा है। ऐसे में इंसानों के इनके संपर्क में आने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। हम खुद इन वायरसों को फैलने का मौका दे रहे हैं। 

शोधकर्ताओं के अनुसार यदि पिछले 50 वर्षों में देखें तो 4 प्रमुख जूनोटिक डिजीज ने इंसानों को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है जो कोविड-19, इबोला, सार्स और एड्स हैं। इनमें से दो महामारियां तो जंगलों के विनाश और वन्यजीवों के व्यापार के कारण ही इंसानों में फैली हैं। यदि चमगादड़ों को देखें तो इनसे कोविड-19, सार्स और इबोला जैसे अनेकों वायरस होते हैं। लेकिन अंधेरे जंगलों में रहने वाले यह चमगादड़ आमतौर पर महामारी नहीं फैलाते पर जब इनके आवासों को नष्ट किया गया या इनको प्रभावित किया गया तभी इनसे वो वायरस इंसानों में फैले हैं। 

वैज्ञानिकों के अनुसार अब तक जो भी साक्ष्य मिले हैं उनके अनुसार कोविड-19 महामारी के फैलने में चीन की फ़ूड मार्किट का बहुत बड़ा हाथ है क्योंकि यह वायरस भोजन के लिए व्यापार किये जाने वाले चमगादड़ की प्रजाति से ही फैला है। दुनियाभर में जंगली जीवों को भोजन से लेकर कई चीजों के लिए क़ानूनी और गैरक़ानूनी तरीके से ख़रीदा और बेचा जाता रहा है। इन वन्यजीवों को जिन परिस्थितियों में रखा जाता है वो कहीं से भी सुरक्षित नहीं होती है। ऊपर से न ही वहां नियमों का कोई ध्यान रखा जाता है और न ही साफ सफाई का, ऐसे में वायरस के फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। 

बीमारियों की निगरानी और रोकथाम के लिए पड़ेगी हर वर्ष 1,856 करोड़ रुपए की जरूरत

चीन में यदि वन्यजीवों के व्यापार को देखें तो यह करीब 149,681करोड़ रुपए (2,000 करोड़ डॉलर) का व्यापार है| यह करीब 1.5 करोड़ लोगों को रोजगार देती है| शोधकर्ताओं के अनुसार चीन में वन्यजीवों के मांस व्यापार को रोकने के लिए हर वर्ष करीब 145,190 करोड़ रुपए (1940 करोड़ डॉलर) की जरूरत पड़ेगी। 

शोधकर्ताओं का मानना है कि अवैध तरीके से किए जा रहे वन्यजीवों के व्यापार पर निगरानी रखना जरूरी है। साथ ही इसके लिए कड़े नियम भी जरूरी हैं| अनुमान है कि इस पर हर वर्ष करीब 3,742 करोड़ रुपए (50 करोड़ डॉलर) का खर्च आएगा जो कोविड-19 की तुलना में बहुत कम है। इनसे फैलने वाली बीमारियों की निगरानी और रोकथाम के लिए करीब 1,856 करोड़ रुपए (24.8 करोड़ डॉलर) की जरूरत है।    

पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों से भी कई वायरस जैसे एच5एन1, एच1एन1, निपाह वायरस और स्वाइन फ्लू इंसानों में फैले हैं, इसलिए इन पर भी ध्यान देना जरूरी है। शोध के अनुसार, इसके लिए हर वर्ष 4,969.4 करोड़ रुपए (66.4 करोड़ डॉलर) की जरूरत पड़ेगी| जंगलों के विनाश के कारण इंसानों तक फैलने वाली इन महामारियों की रोकथाम के लिए जंगलों को भी बचाना जरुरी है। शोध के अनुसार इसके लिए हर वर्ष करीब   41,910.7 करोड़ रुपए (560 करोड़ डॉलर) की जरूरत होगी जिससे 40 फीसदी प्रमुख स्थानों पर जंगलों के विनाश को रोका जा सके। 

वन्यजीवों और जंगलों को बचाने पर किया निवेश न केवल हमें इन महामारियों के खतरे से सुरक्षित रखेगा, बल्कि इसके साथ ही इससे पर्यावरण पर बढ़ते दबाव, प्रदूषण को कम करने और जलवायु परिवर्तन के खतरे को सीमित करने में भी मदद मिलेगी। जंगल हमारी धरती के फेफड़े हैं, यदि यह सुरक्षित रहते हैं तो हमारा वातावरण भी सुरक्षित रहेगा।