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अफ्रीका में कोरोनावायरस के चलते खतरे में हैं 2 करोड़ नौकरियां

अर्थव्यवस्था में आ सकती है 1.1 फीसदी की गिरावट। जबकि 35 फीसदी तक कम हो चुका है अफ्रीका का आयात-निर्यात

By Lalit Maurya

On: Monday 06 April 2020
 

दुनिया भर में कोरोनावायरस एक बड़े खतरे के रूप में उभरा है। जिसने ने केवल स्वस्थ्य क्षेत्र की कमियों को उजागर किया है बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था इस तरह के खतरों के सामने कितनी कमजोर है। उसका असर दुनिया भर के लोगों के काम धंदे पर दिखने भी लगा है। भारत के कई बड़े शहरों से जहां लाखों-करोड़ों की संख्या में लोग अपनी नौकरियों के छिन जाने की वजह से अपने गावं वापस लौटने को मजबूर हो गए हैं। वहीँ अफ्रीका जो पहले से ही अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता है। उसपर इस महामारी के चलते चौतरफा मार पड़ने के आसार हैं। हाल ही में अफ्रीकन यूनियन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार इस महामारी के चलते अफ्रीका में करीब 2 करोड़ नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है। वहीं बढ़ते कर्ज के चलते आर्थिक संकट और गहराता जा रहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार पर्यटन और तेल उत्पादन जैसे क्षेत्रों पर आधारित देशों पर इसका सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है। यह रिपोर्ट 35 पेजों की है। जिसमें इस महामारी से जुडी दो अलग-अलग संभावनाओं के आधार पर आर्थिक संकट का पूर्वानुमान किया गया है। पहली सम्भावना है कि यह महामारी जुलाई तक अफ्रीका में बनी रहेगी, लेकिन उसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। दूसरी सम्भावना है कि यह महामारी अगस्त तक ख़त्म नहीं होगी। जिसके चलते अफ्रीका पर इस बीमारी का अत्यधिक प्रभाव पड़ेगा।

अफ्रीका अर्थव्यवस्था में आ सकती है 1.1 फीसदी की गिरावट

अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक के अनुसार इस महामारी के पहले अफ्रीका की विकास दर करीब 3.4 फीसदी थी। पर यदि इन संभावनाओं पर गौर करें तो पहली सम्भावना के अनुसार अफ्रीका की अर्थव्यवस्था में 0.8 फीसदी की कमी आएगी। जबकि दूसरी सम्भावना के अनुसार इसकी अर्थव्यवस्था 1.1 फीसदी घट सकती है। गौरतलब है कि अफ्रीका सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, सोमवार 6 अप्रैल 2020 तक 51 अफ्रीकी देशों में कोरोनावायरस के 9,198 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 414 मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि एशिया, यूरोप और अमेरिका की तुलना में यह महाद्वीप इस बीमारी से काफी कम प्रभावित हुआ है। लेकिन उन क्षेत्रों के साथ गहरे व्यापारिक सम्बन्ध होने के कारण इसकी अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर पड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। अब तक इस महाद्वीप से होने वाले  आयात-निर्यात में 35 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है, जिसका मूल्य करीब 270 बिलियन डॉलर (20,53,823 करोड़ रुपये) आंका गया है। इस महामारी के चलते जिस तरह से तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, उनके चलते नाइजीरिया और अंगोला जैसे तेल निर्यातक देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने के आसार हैं। अकेले इन दो देशों की आय में 65 बिलियन डॉलर (4,94,439 करोड़ रुपये) की कमी हो सकती है। अफ्रीका के तेल निर्यातक देशों में आर्थिक गिरावट 3 फीसदी तक हो सकती है। वहीं दूसरी तरह टूरिज्म पर लगी पाबंदियों के चलते अफ्रीका को करीब 50 बिलियन डॉलर (3,80,338 करोड़ रुपये) का नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही इसके चलते करीब 2 करोड़ नौकरियों पर भी खतरा मंडरा रहा है। जबकि सीधे तौर पर हो रहे विदेशी निवेश में 15 फीसदी की कमी आ सकती है। वहीं देशों के वित्तीय राजस्व में 20 से 30 फीसदी की गिरावट आ सकती है। ऐसे में पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे देशों के पास अंतराष्ट्रीय बाजार से कर्ज लेने के अलावा कोई और चारा नहीं है। गौरतलब है कि पहले से ही अफ्रीका पर करीब 236 बिलियन डॉलर (17,95,193 करोड़ रुपये) का कर्ज है। और यदि ऐसे में नया कर्ज उनकी कमर ही तोड़ देगा। यही वजह है कि इस रिपोर्ट में अफ्रीका के पुराने कर्ज को माफ करने की सिफारिश कि गयी है।