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क्या भारत में भी हैं 80 फीसदी बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमित लोग?

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोविड-19 के 80 फीसदी मामलों में कोई लक्षण नहीं दिखता लेकिन यह आंकड़ा अलग-अलग देश के हिसाब से कम या अधिक हो सकता है

By Banjot Kaur

On: Wednesday 22 April 2020
 

क्या 80 फीसदी मामले ऐसे होते हैं, जिनमें कोई लक्षण न होने के बावजूद लोग कोरोनावायरस संक्रमण के शिकार होते हैं, विशेषकर भारत में? इसका जवाब है नहीं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महामारी विभाग के प्रमुख डॉ आर गंगाखेडकर ने प्रेस वार्ता में कहा था कि कोरोनावायरस के 100 संक्रमण में से 80 में कोई लक्षण नजर नहीं आते। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वे यह भारत के संदर्भ में कह रहे थे।

यह विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सामान्य आंकड़ा है, लेकिन अलग-अलग परिस्थिति और देश के मुताबिक यह बदलता रहता है। इसका मतलब यह नहीं कि यह आंकड़े हर देश के लिए एक जैसे ही हों।

आईसीएमआर के अधिकारियों ने डाउन टू अर्थ को इस बात की पुष्टि की कि अब तक भारत ने इस बात के लिए कोई शोध नहीं किया है, जिससे यह सामने आ सके कि कितने संक्रमित लोगों में लक्षण नहीं नजर आ रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 17 मार्च को एक रिलीज जारी कर कहा था कि आंकड़े कहते हैं कि कोविड-19 के संक्रमित मरीजों में 80 फीसदी संख्या उन मरीजों की है जिनमें संक्रमण काफी कम मात्रा में होता है और कोई लक्षण भी नजर नहीं आता। 15 प्रतिशत मरीज काफी गंभीर होते हैं और उन्हें ऑक्सीजन की जरूरत हो सकती है। बचे हुए 5 प्रतिशत मरीज अति गंभीर होते हैं और उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है। इस तथ्य से यह पता चलता है कि कोविड-19 के अधिकांश मरीजों को बिना अधिक इलाज के ठीक किया जा सकता है। 

अलग-अलग देशों में क्या है परिस्थिति?

बिना लक्षणों के संक्रमण के मामले में हुए अलग-अलग देशों के शोध से यह तथ्य उजागर होता है कि यह 5 से 80 प्रतिशत के बीच हो सकता है। चीन में एक शोध में 10 फरवरी को बीजिंग के अलग-अलग कोविड-19 अस्पताल के 262 मरीजों के ऊपर अध्ययन से सामने आया कि सिर्फ पांच प्रतिशत ऐसे मरीज हैं जिनमें संक्रमण होने के बावजूद कोई लक्षण मौजूद नहीं हैं। हालांकि, एक बीएमजे द्वारा एक अप्रैल को प्रकाशित एक दूसरे शोध का कहना है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद 78 प्रतिशत मामले में संक्रमण के कोई लक्षण नहीं दिखेंगे।

इटली में महामारी के शुरुआती दौर में ऐसे मामले सिर्फ 7 प्रतिशत पाए गए थे। बाद में कुछ शोध किए गए जिसमें सामने आया कि बिना लक्षण वाले मरीजों की संख्या 40 प्रतिशत तक हो सकती है। इस वजह से किसी देश को न देखते हुए किस तारीख को, किस समय और किस माहौल में यह गणना हुई है यह देखना महत्वपूर्ण है।

डायमंड क्रूज प्रिंसेज जहाज पर बिना लक्षणों के मरीजों की संख्या समय के साथ बढ़ती गई। 634 पॉजिटिव मामले में से दो अलग-अलग समय में क्रमशः 306 और 328 मामलों में कोई लक्षण नहीं दिख रहा था। दक्षिण कोरिया के बारे में यह शोध कहती है कि 28 मरीजों में से शुरुआती दिनों में सिर्फ तीन में कोई लक्षण नहीं दिख रहा था।

इस वजह से भारत के संदर्भ में जब तक कोई शोध नहीं हो जाता, इस तरह का कोई आंकड़ा सामने लाना कठिन होगा।

यूरोपियन सीडीसी ने अपने एक ताजा शोध में 8 अप्रैल को कहा कि बिना लक्षण वाले मरीजों की मात्रा को पूरी तरह नहीं समझा जा सका है। यूएस सेंटर्स फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड ने एक साक्षात्कार में कहा कि 25 प्रतिशत तक मामलों में लक्षण नहीं दिख सकते हैं। बच्चों में कोरोना वायरस को लेकर 6 अप्रैल को प्रकाशित एक शोध में कहा गया कि उनके मामले में 1.3 प्रतिशत मरीजों में कोई लक्षण नहीं दिखा।

बिना लक्षण बनाम संक्रमण पूर्व लक्षण के मामले

यहां यह भी काफी महत्वपूर्ण तथ्य है कि अगर कोई यह भी पता लगा ले कि कितने लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं दिख रहे तो भी शोधकर्ताओं में अब तक इस बात पर एकमत नहीं हुए हैं कि उनमें बिना लक्षण के संचरण की कितनी संभावना रहेगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लगातार कहा है कि बिना लक्षण वाले संक्रमित लोग संचरण के वाहक नहीं है। कई प्रेस वार्ता में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मारिया वैन केरखोव ने इसका जवाब नहीं में दिया है। 2 अप्रैल को जारी डब्लूएचओ की सिचुएशन रिपोर्ट कहती है कि प्रयोगशाला में कई ऐसे संक्रमण के मामले पुष्ट हुए हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं दिखा लेकिन अबतक उन लोगोंके माध्यम से बिना लक्षण वाले संचरण के मामले सामने नहीं आए हैं।  हालांकि, इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

हालांकि, यूरोपियन सीडीएस ने संकेत दिए हैं कि बिना लक्षण वाले संक्रमित लोगों से भी संचरण होने की आशंका है। अपने सातवें अपडेट में सीडीएस का कहना है, “बिना लक्षण वाले और लक्षण के साथ संक्रमित लोगों में वायरस की संख्या में कोई अंतर नहीं देखा गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बिना लक्षण वाले मरीज भी वायरस को फैला सकते हैं। जिसमें जिनता वायरस की मात्रा रहेगी संचरण का खतरा उतना अधिक रहेगा।”

संक्रमण के पूर्व लक्षण जैसी एक बात होती है जिसे डब्लूएचओ ने बिना लक्षण वाले संक्रमण से अलग माना है। इसके मुताबिक, “कोविड-19 में रोग पनपने की एक अवधि होती है जो कि वायरस के संपर्क में आने और उससे संक्रमित होने के बीच का समय होता है। यह समय 5 से 6 दिन का होता है। हालांकि, यह 14 दिन तक भी खिंच सकता है। इस अवधि को संक्रमण पूर्व लक्षण की अवधि मान सकते हैं। इस दौरान व्यक्ति संक्रमण फैला भी सकता है।” बिना लक्षण वाले मामलों में संक्रमित व्यक्ति में संक्रमण का कोई भी लक्षण जाहिर नहीं होता।

यूरोपियन सीडीसी ने अपने आठवें अपडेट में कहा है कि संक्रमण पूर्व लक्षण की वजह से सिंगापुर और चीन में क्रमशः 48 प्रतिशत और 62 प्रतिशत वायरस का संचार हुआ। इसके अलावा, बिना लक्षण वाले मरीजों से भी संक्रमण फैलने के मामले सामने आए हैं। दोनों ही स्थिति में संक्रमण की संभावना अधिक होती है।

भारत में संक्रमण पूर्व लक्षण और उससे होने वाले वायरस के संचार पर ऐसा कोई भी शोध नहीं किया गया है।