12 अफ्रीकी देशों में शुरू हो गया नोवेल कोरोना वायरस का सामुदायिक प्रसार, एक सप्ताह में तीन गुना बढ़े मामले

अफ्रीकी देशों में पिछले एक सप्ताह में 1,491 नए मामले सामने आए हैं। पूरे 46 देशों में 4,400 मामले दर्ज होने के बाद अफ्रीकन देशों को लॉकडाउन कर दिया गया है।  

By Kiran Pandey

On: Tuesday 31 March 2020
 
Photo: WHO
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अफ्रीका में नोवेल कोरोना वायरस के मामले में पिछले एक सप्ताह में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है जिसकी वजह से इससे होने वाले मृत्यु के मामले में भी चार गुना वृद्धि देखी गई है। समूचे अफ्रीका में 46 देशों में मार्च 29 तक 4,400 लोगों को संक्रमण हुआ है, जिसमें पिछले एक सप्ताह में ही 1,491 मामले शामिल हैं।

इन देशों में इस संक्रमण से हुए मौत का आंकड़ा 139 तक पहुंच गया है जिसमें पिछले एक सप्ताह में 22 देशों में हुए 33 मौते शामिल हैं।

दक्षिण अफ्रीका के संक्रमण के आंकड़े लॉकडाउन में होने के बावजूद भी 1,280 तक पहुंच गए हैं। लॉकडाउन की घोषणा संक्रमण को काबू में करने के लिए हुई थी।

मार्च 29 को इस देश के स्वास्थ्य विभाग ने एक बयान जारी कर कहा कि लॉकडाउन के दौरान दो लोगों की नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण से मौत हुई।

उत्तरी अफ्रीका के तीन देश इजिप्ट, अल्जीरिया और मोरक्को संक्रमण का केंद्र बना हुआ है और यहां मामलों में काफी वृद्धि हुई है।

इन तीन देशों में कोविद-19 की वजह से यहां 90 मौत हुई है जो कि पूरे अफ्रीकी क्षेत्र के मौत का 65 प्रतिशत है। इसमें इजिप्ट में 36 मौत, अल्जीरिया में 29 और मोरक्को में 25 मौत के मामले शामिल हैं।

12 देशों में शुरू हुआ सामुदायिक प्रसार

अफ्रीकी क्षेत्र के तकरीबन 12 देशों में सामुदायिक प्रसार शुरू होने की पुष्टि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने हालिया रिपोर्ट में दी है। ये देश हैं अल्जीरिया, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका, बुर्किना फासो, कैमरून, आइवरी कोस्ट, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, गैबॉन, लाइबेरिया, नाइजीरिया और रवांडा। अल्जीरिया में सामुदायिक प्रसार के 34 मामले सामने आए तो सेनेगल में 18 मामले सामने आए हैं। दक्षिण अफ्रीका में सामुदायिक प्रसार के 14 मामले हैं। सेनेगल और अल्जीरिया में स्थानीय संक्रमण मामलों के समूहों के संदर्भ में हुआ।

सेनेगल में सभी 18 स्थानीय रूप से संक्रमित मामले ड्यूरबेल क्षेत्र में एक समूह के हैं जबकि अल्जीरिया में वे 13 प्रांतों में फैले हुए थे। अल्जीरिया में 34 स्थानीय रूप से संक्रमित मामलों में से 17 एक ही समूह के हैं। कम आय वाले अफ्रीकी देशों में सामुदायिक प्रसार विश्व स्वास्थ्य संगठन की चिंता का कारण बना हुआ है क्योंकि ये देश कई मायनों में पिछड़े हुए हैं।

इन देशों की खराब स्वास्थ्य सुविधाएं अधिक संक्रमण के मामलों को संभालने में नाकाफी हैं। एचआइवी के अधिक मामले, कुपोषण और असंक्रामक रोगों के बढ़ते मामलों, कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित ये देश पहले से बुरी स्थिति में हैं।

छिटफुट मामले वाले देश के साथ समूहों में मामले आने वाले देश में इस संक्रमण से बचने के तीन उपाय किए जा सकते हैं। ये देश संक्रमित मरीजों को अलग कर, अधिक से अधिक जांच कर, पॉजिटिव मरीजों का इलाज कर आने वाले समय में संक्रमण की आशंका वाले मरीजों की तलाश कर संक्रमण से मुक्त हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सामुदायिक प्रसार झेलने वाले देश संक्रमण रोकने के प्रयास कर ही अपने स्वास्थ्य सुविधाओं पर बोझ डालने से बच सकते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानना है कि यह काफी महत्वपूर्ण है कि सरकारें स्थानीय प्रसार को आने वाले समय में लगातार सामुदायिक प्रसार होने की स्थिति में आने देने से बचे। यह कमजोर स्वास्थ्य प्रणाली वाले देशों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी कि वे महामारी से निपटने के लिए निरंतर सामुदायिक प्रसार को रोकेंगे।

डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से सामाजिक-दूरी बनाने के उपायों और साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए कहा था। अफ्रीकी देशों की सरकारों को सलाह दी गई थी कि वे सभी संभावित परिदृश्यों की तैयारी करते हुए अपनी तैयारियों को तत्परतापूर्वक पूरी करे और प्रसार बढ़ने की स्थिति में जल्दी फैसला ले सकने की क्षमता को भी बढ़ाए। रवांडा और दक्षिण अफ्रीका के बाद ज़िम्बाब्वे 21 दिन की लॉकडाउन घोषित करने वाला तीसरा अफ्रीकी देश बन गया है। 30 मार्च, 2020 से यह देश लॉकडाउन में चला गया।