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10 राज्यों में बर्ड फ्लू की पुष्टि, सभी राज्य सचेत

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से सचेत रहने की अपील की है

By DTE Staff

On: Monday 11 January 2021
 

देश में 11 जनवरी 2021 तक 10 राज्यों में एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) की पुष्टि हो गई है। आईसीएआर-एनआईएचएसएडी ने राजस्थान के टोंक, करौली, भीलवाड़ा जिलों और गुजरात के वलसाड, वडोदरा और सूरत जिलों में कौवों और प्रवासी/जंगली पक्षियों की मौत होने की पुष्टि की है।

इसके अलावा, उत्तराखंड के कोटद्वार और देहरादून जिलों में भी कौवों की मौत होने की पुष्टि हुई है। नई दिल्ली में कौवों और संजय झील क्षेत्रों में बत्तखों की मौत होने की भी जानकारी मिली है।

इसके अलावा, परभानी जिले में मुर्गियों के बर्ड फ्लू से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जबकि महाराष्ट्र के मुंबई, ठाणे, दापोली और बीड में भी बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है।

हरियाणा में, इस बीमारी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए संक्रमित पक्षियों की कुल्लिंग का काम जारी है। एक केन्द्रीय दल ने हिमाचल प्रदेश का दौरा किया है और यह दल उपरिकेंद्र स्थलों की निगरानी करने और महामारीविज्ञान संबंधी जांच-पड़ताल करने के लिए पंचकूला पहुंचा। 

हरियाणा के पंचकुला जिले की दो पोल्ट्री (मुर्गीपालन फार्म) से लिए गए नमूनों में एवियन इन्फ्लुएंजा के सकारात्मक होने की पुष्टि के बाद, राज्य सरकार ने 9 त्वरित कार्रवाई दलों को तैनात किया है और दोनों ही स्थानों पर नियंत्रण एवं निपटान अभियान चलाया जा रहा है।

गुजरात के सूरत जिले तथा राजस्थान के सिरोही जिले में कौओं और अन्य जंगली पक्षियों के नमूनों में एवियन इन्फ्लुएंजा (एच5) की पुष्टि की गई है।

इसके अलावा, कांगड़ा जिले (हिमाचल प्रदेश) से 86 कौओं तथा 2 एर्गेट्स (बगुलों) की असामान्य मौत होने की जानकारी प्राप्त मिली थी। जंगली पक्षियों की असामान्य मृत्यु के समाचार नाहन, बिलासपुर और मंडी (हिमाचल प्रदेश) से भी प्राप्त हुए है और उनके नमूने परीक्षण के लिए निर्दिष्ट प्रयोगशाला में भेजे गए हैं।

केंद्र ने राज्यों से जनता में जागरूकता पैदा करने और गलत जानकारी का प्रसार रोकने के लिए अनुरोध किया है। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से अनुरोध किया गया है कि जल निकायों, पक्षी बाजारों, चिड़ियाघरों, पोल्ट्री फार्मों आदि के आसपास निगरानी बढ़ाएं, पक्षियों के शवों का उचित निपटारा करें और पोल्ट्री फार्मों में जैव-सुरक्षा को मजबूत बनाएं। इसके अलावा, कुल्लिंग परिचालनों के लिए आवश्यक पीपीई किटों और सहायक उपकरणों का भी पर्याप्त भंडारण किया जाएं। 

केंद्रीय पशुपालन विभाग के सचिव ने राज्य पशुपालन विभागों से अनुरोध किया कि इस बीमारी की स्थिति की कड़ी निगरानी के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ प्रभावी संचार और तालमेल सुनिश्चित करें और इस बीमारी की मनुष्यों में फैलने की किसी भी संभावना को रोका जाए।