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कोरोनावायरस: पहाड़ों पर चरम पर पहुंचा स्थानीय बनाम प्रवासी विवाद

25 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से तो पूरे देश से प्रवासी उत्तराखंडियों का रैला उमड़ पड़ा

By Trilochan Bhatt

On: Tuesday 31 March 2020
 

उत्तराखंड के गांवों में प्रवासी और स्थानीय लोगों के बीच बढ़ रहे विवाद को शांत करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। फोटो:  दीक्षा भट्ट
उत्तराखंड के पहाड़ी गांव ने अब से पहले कभी भी स्थानीय बनाम प्रवासी का विवाद सामने नहीं आया था। आमतौर पर गांव में रहने वाले और प्रवास में रहने वाले परिवार आपस में प्रेम और सौहार्द से रहते थे। प्रवासी परिवार कभी गांव आते तो गांव में रहने वाले परिवार उनकी खातिरदारी में कमी नहीं रखते थे। प्रवासी भी जब कभी गांव आते तो गांव में रहने वाले सभी का ख्याल रखते। यह पहला मौका है, जब गांव में रहने वाले लोग और हाल के दिनों में गांव वापस लौटे आपस में भिड़े हुए हैं और इसकी वजह बना है कोरोनावायरस।

इस विवाद की शुरुआत 22 मार्च को देश में एक दिन के जनता कर्फ्यू के साथ ही हो गई थी। हालांकि इस एक दिन के कर्फ्यू की शाम को ही उत्तराखंड सरकार ने पूरे राज्य में 31 मार्च तक के लिए लॉकडाउन की घोषणा कर दी थी, लेकिन इस दौरान दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में प्रवासियों ने उत्तराखंड का रुख कर दिया था। इसके साथ ही बड़ी संख्या में लोगों ने सोशल मीडिया पर प्रवासियों के नाम यह अपील जारी कर दी कि वे फिलहाल जहां हैं वहीं रहें, क्योंकि उनके साथ कोरोनावायरस भी गांव तक पहुंच सकता है। अपील के तुरंत बाद कुछ महिलाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर तैरने लगे, जिनमें ग्रामीण महिलाएं प्रवासियों को दुत्कार रही हैं और खबरदार कर रही हैं कि गांव न आएं अन्यथा उनके साथ अच्छा बर्ताव नहीं होगा।

25 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से तो पूरे देश से प्रवासी उत्तराखंडियों का रैला उमड़ पड़ा। पहाड़ों को मैदानों से जोड़ने वाले बस अड्डों पर लोगों का हूजूम इकट्ठा हो गया। शासन की ओर से कुछ बसों का इंतजाम किया गया तो कुछ लोग अपने अपने तरीके से गांवों में पहुंचने लगे। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों से गांव में आने वाले लोगों को रोक जाने और उनसे अभद्र व्यवहार किये जाने की सूचनाएं मिलने लगी। कुछ जिलों में तो प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और आदेश जारी करने पड़े कि बाहर से आने वालों को गांव में घुसने से रोकने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब जबकि सभी लोग गांवों में पहुंच चुके हैं, तो कई गांवों में स्थानीय लोगों की प्रवासियों से मनमुटाव की स्थिति बनी हुई है।

गांवों में स्थिति कितनी बिगड़ चुकी है, इसका अंदाजा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो से लगाया जा सकता है। यह ऑडियो रिकॉर्डिंग टिहरी जिले के एक गांव के ग्राम प्रधान की बताई जाती है। ऑडियो में ग्राम प्रधान प्रवासियों को धमकाता सुनाई दे रहा है कि वे गांव में आकर शहंशाह न बने, वरना उनके खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई जाएगी। ग्राम प्रधान कहते हुए सुनाई दे रहा है कि बाहर से आये ये लोग क्रिकेट खेल रहे हैं, जो कि ठीक नहीं हैं और इससे कोरोना फैल सकता है। लगभग सभी जिलों में प्रशासन के पास स्थानीय लोग बाहर से आये प्रवासियों की शिकायत भेज रहे हैं, ज्यादातर लोगों की शिकायत है कि बाहर से आये लोग क्वारंटाइन का पालन नहीं कर रहे हैं और घर से बाहर घूम रहे हैं। कई गांवों में तो विवाद बढ़ने पर पुलिस का हस्तक्षेप करना पड़ रहा है।

रुद्रप्रयाग जिले के एक गांव के निवासी सर्वेश्वर ने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि वह मुंबई में होटल में काम करता है। लॉकडाउन के बाद वह किसी तरह बाई एयर जौलीग्रांट पहुंचा और वहां से धक्के खाते हुए घर पहुंचा। लेकिन गांव में किसी ने उसके साथ बात तक नहीं की। हालचाल पूछना तो दूर की बात है। वह घर में ही है, लेकिन गांव के लोगों से उसके परिवार के साथ भी बोलचाल बंद कर दी है।

स्वतंत्र टिप्पणीकार राजीव नयन बहुगुणा का अक्सर प्रवासियों को कोसते हैं, लेकिन आज के हालात देखकर वे चिन्तित हैं। वे हमारे अपने हैं, इस विषम परिस्थिति में वे कहां जा सकते हैं। उनका कहना है कि बाहर से आने वाले लोगों को रोकने के बजाय सख्ती से क्वारंटाइन का पालन करने के बाध्य करवाया जाए और जब स्थिति सामान्य होने के बाद वे वापस जाने लगें तो उन्हें याद दिलाया जाए कि बुरे वक्त में उन्हें यहीं आना पड़ेगा, इसलिए बीच-बीच में आते-जाते रहें ताकि पहाड़ आबाद रहें। रुद्रप्रयाग जिले के सामाजिक कार्यकर्ता मोहित डिमरी का कहना है कि लगभग सभी गांवों में इस तरह के विवाद की स्थिति बनी हुई है। कुछ जगहों पर विवाद बढ़ने की भी आशंका है।