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कोविड-19 संक्रमण से रक्त कोशिकाओं में आ सकता है बदलाव: शोध

कुछ रोगी छह महीने या उससे अधिक समय के बाद भी सांस की तकलीफ, थकान और सिरदर्द सहित कोरोनावायरस के गंभीर संक्रमण के प्रभावों से जूझते रहते हैं क्यों?

By Dayanidhi

On: Thursday 01 July 2021
 
कोविड-19 संक्रमण लंबे समय तक रक्त कोशिकाओं को बदलता है: शोध
Photo : Wikimedia Commons Photo : Wikimedia Commons

शोधकर्ता पहली बार यह दिखाने में सफल हुए कि कोविड-19 ने लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं के आकार और गाढ़ेपन को बदल दिया है। ऐसा कोविड-19 से संक्रमित मरीज में महीनों बाद दिखा। ये परिणाम यह समझाने में मदद कर सकते हैं कि क्यों कुछ कोरोना से संक्रमित लोग लंबे समय के बाद भी लक्षण होने की शिकायत करना जारी रखते हैं।

कुछ रोगी छह महीने या उससे अधिक समय के बाद भी सांस की तकलीफ, थकान और सिरदर्द सहित सार्स-सीओवी-2 कोरोनावायरस के गंभीर संक्रमण के प्रभावों से जूझते रहते हैं। यह कोविड-19 संक्रमण जिसे पोस्ट कोविड-19 सिंड्रोम, या लॉन्ग कोविड भी कहा जाता है, जिसे अभी भी ठीक से समझा नहीं जा सका है।

बीमारी के दौरान अक्सर रक्त परिसंचरण बिगड़ जाता है, जिससे नसों में अवरोध हो सकता है और शरीर में ऑक्सीजन का संचार सीमित होता है। ये सभी घटनाएं हैं जिनमें रक्त कोशिकाएं और उनके प्राकृतिक गुण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस पहलू की जांच करने के लिए, मैक्स-प्लैंक-ज़ेंट्रम फॉर फिजिक एंड मेडिज़िन, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर द साइंस ऑफ लाइट (एमपीएल), फ्रेडरिक अलेक्जेंडर यूनिवर्सिटी एर्लांगेन से मार्केटा कुबनकोवा, जोचेन गक और मार्टिन क्रेटर के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं की यांत्रिक या असली अवस्थाओं को मापा। यह शोध बायोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ता कोशिकाओं में स्पष्ट और लंबे समय तक चलने वाले परिवर्तनों का पता लगाने में सफल रहे। इस प्रक्रिया में कोरोना से संक्रमित तथा ठीक होने के बाद दोनों को शामिल किया।

रक्त कोशिकाओं का विश्लेषण करने के लिए, उन्होंने रीयल-टाइम डिफॉर्मेबिलिटी साइटोमेट्री (आरटी-डीसी) नामक एक स्व-विकसित विधि का उपयोग किया, जिसे हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल वैली अवार्ड से मान्यता मिली है। इस पद्धति में, शोधकर्ता रक्त कोशिकाओं को एक छोटे चैनल के माध्यम से तेज गति से भेजते हैं।

इस प्रक्रिया में, ल्यूकोसाइट्स और एरिथ्रोसाइट्स खिंच जाते हैं। एक हाई-स्पीड कैमरा उनमें से प्रत्येक को माइक्रोस्कोप के माध्यम से रिकॉर्ड करता है। कस्टम सॉफ़्टवेयर यह निर्धारित करता है कि कौन से सेल के प्रकार मौजूद हैं और वे कितने बड़े और विकृत हैं। इस विधि से प्रति सेकंड 1000 रक्त कोशिकाओं का विश्लेषण किया जा सकता है।

एर्लांगेन के बायोफिजिसिस्ट ने कोविड-19 से गंभीर रूप से बीमार 17 रोगियों में 40 लाख से अधिक रक्त कोशिकाओं की जांच की, जिनमें से 14 लोग ठीक हो गए थे और उनकी तुलना 24 स्वस्थ लोगों से की गई। उन्होंने पाया कि रोगियों की लाल रक्त कोशिकाओं का आकार और विकृति स्वस्थ लोगों की लाल रक्त कोशिकाओं से बहुत अलग थी।

जोकि इन कोशिकाओं को नुकसान होने का संकेत देता है और फेफड़ों में नसों का अवरोध और एम्बोलिज्म के बढ़ते खतरे के बारे में बताता है। इसके अलावा, ऑक्सीजन की आपूर्ति, जो एरिथ्रोसाइट्स के मुख्य कार्यों में से एक है, संक्रमित व्यक्तियों में खराब हो सकती है।

लिम्फोसाइट्स (अधिग्रहित प्रतिरक्षा रक्षा के लिए जिम्मेदार एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका) बदले में कोविड-19 रोगियों में काफी नरम थे, जो आमतौर पर एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के लिए जाने जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने न्युट्रोफिल ग्रैन्यूलोसाइट्स के लिए समान अवलोकन किए, जो जन्मजात प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में शामिल श्वेत रक्त कोशिकाओं का एक और समूह है। तीव्र संक्रमण के सात महीने बाद भी इन कोशिकाओं में भारी बदलाव दिखाई दिया। यह शोध बायोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ता मार्केटा कुबनकोवा बताते हैं कि हमें संदेह है कि प्रतिरक्षा कोशिकाओं का साइटोस्केलेटन, जो कोशिका कार्य के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है, उसमें बदलाव आ गया है। उनके विचार में, वास्तविक समय की विकृति साइटोमेट्री में नियमित रूप से उपयोग किए जाने की क्षमता है, कोविड-19 की जांच और यहां तक कि अज्ञात वायरस के कारण होने वाली भविष्य की महामारियों के खिलाफ एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में काम कर सकती है।