कोविड-19 से भारत में 47 लाख लोगों की मौत हुई, भारत ने डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों को नकारा

भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक देश में 5.23 लाख लोगों की मौत हुई है

By Taran Deol

On: Thursday 05 May 2022
 
प्रयागराज से 10 किलोमीटर दूर बसे गांव बसवार के लोग कुछ दूरी पर बह रही यमुना के रेत में शवों को दफनाने की बढ़ती घटनाओं से चिंतित हैं। फोटो: गौरव गुलमोहर प्रयागराज से 10 किलोमीटर दूर बसे गांव बसवार के लोग कुछ दूरी पर बह रही यमुना के रेत में शवों को दफनाने की बढ़ती घटनाओं से चिंतित हैं। फोटो: गौरव गुलमोहर12jav.net12jav.net

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि कोविड-19 के कारण भारत में 2020-21 में 47 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़े से लगभग दस गुणा अधिक है।

पांच मई 2022 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने यह आंकड़े जारी किए। जो बताते हैं कि भारत दुनिया के उन 20 देशों में शामिल हैं, जो जनवरी 2020 से दिसंबर 2021 के दौरान 80 प्रतिरिक्त अतिरिक्त मृत्यु दर के लिए जिम्मेवार थे। इन 20 देशों की आबादी दुनिया की आधी आबादी के बराबर है।

इन देशों में भारत के अलावा ब्राजील, कोलंबिया, मिस्र, जर्मनी, इंडोनेशिया, ईरान, इटली, मैक्सिको, नाइजीरिया, पाकिस्तान, पेरू, फिलीपींस, पोलैंड, रूसी संघ, दक्षिण अफ्रीका, यूनाइटेड किंगडम, तुर्की, यूक्रेन और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं।

डब्ल्यूएचओ ने दावा किया कोविड​​​​-19 की वजह से इन दो वर्षों में दुनिया में लगभग 1.5 करोड़ लोगों की मौत हुई है। हालांकि दुनिया के देशों द्वारा 4 मई तक डब्ल्यूएचओ को करीब 6,243,038 लोगों की मौत की सूचना मिली है। जबकि डब्ल्यूएचओ का अनुमान इससे तीन गुना ज्यादा है।

डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो दुनिया में कोविड-19 की वजह से कुल जितनी मौतें हुई, उसमें से एक तिहाई भारतीय थे।

आंकड़े बताते हैं कि 1.5 करोड़ मौतों में से लगभग 84 प्रतिशत मौतें दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप और अमेरिका में हुई।

मरने वालों की संख्या सबसे अधिक निम्न-मध्यम आय वाले देशों में है, जहां आधे से अधिक (53 प्रतिशत) अतिरिक्त मौतें हुईं। इसके बाद उच्च-मध्यम आय वाले देशों में (28 प्रतिशत), उच्च आय वाले देशों में (15 प्रतिशत) और निम्न आय वाले देशों में (चार प्रतिशत) मौतें हुई।

भारत ने किया खंडन
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट जारी होते ही भारत सरकार की ओर से एक बयान जारी किया गया। इस बयान में कहा गया है, " अतिरिक्त मौतों के आकलन के लिए जिस गणितीय मॉडल का उपयोग किया गया है, भारत को उस मॉडल पर आपत्ति है"।
भारत प्रामाणिक डेटा की उपलब्धता के मद्देनजर अधिक मृत्यु दर अनुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताता है।"

सरकार ने कहा कि इस्तेमाल किए गए मॉडलों की वैधता और मजबूती और डेटा संग्रह की पद्धति "संदिग्ध" है। सरकार ने पहले भी इस पर आपत्ति जताई थी।

16 अप्रैल को सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था कि यह स्पष्ट नहीं है कि वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान 2019 का उपयोग भारत के लिए अपेक्षित मौतों के आंकड़ों का अनुमान लगाने के लिए क्यों किया गया है। जबकि भारत में डेटा संग्रह और प्रबंधन की एक मजबूत प्रणाली है। चूंकि भारत 130 करोड़ आबादी वाला बड़ा देश है, इसलिए दुनिया के अन्य देशों में जो मॉडल उपयोग किया जा रहा है। वही मॉडल भारत पर उपयोग नहीं किया जा सकता।

हालांकि तब डब्ल्यूएचओ के तकनीकी सलाहकार समूह के सदस्य जॉन वेकफील्ड ने भारत के इस रक्षात्मक बयान को गलत करार दिया था।

इस सप्ताह जारी नवीनतम रजिस्ट्रार जनरल द्वारा नागरिक पंजीकरण प्रणाली (सीआरएस) रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पंजीकृत मौतों की संख्या 2020 में 6.2 प्रतिशत बढ़कर 81 लाख हो गई, जो 2019 में 76 लाख थी।

रिपोर्ट में यह उल्लेख नहीं है कि इनमें से कितने कोविड-19 के कारण थे। लेकिन महामारी के पहले वर्ष में 4.7 लाख अधिक मौतें दर्ज की गईं।

महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम और हरियाणा में अधिक मौतें हुई थी।

 

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