Sign up for our weekly newsletter

सिर्फ 9 हफ्तों के भीतर भारत में मौत का सबसे बड़ा कारण बना कोविड-19

स्वास्थ्य की अनदेखी और तैयारियों की कमी के चलते 9 हफ्तों में ही देश में स्थिति बदतर हुई। ऐसा ही रहा तो राज्यों को कड़े लॉकडाउन की तरफ जाना होगा।  

By Kiran Pandey, Lalit Maurya

On: Monday 03 May 2021
 

आज कोविड-19 देश में होने वाली सबसे ज्यादा मौतों के लिए जिम्मेवार है। यह पिछले 9 सप्ताह में 26वें स्थान से पहले स्थान पर पहुंच चुका है। राज्यों ने भी दैनिक मृत्यु दर में वृद्धि की सूचना दी है। सिर्फ पिछले एक सप्ताह में 6 और राज्यों ने जानकारी दी है कि कोविड-19 से मरने वालों का आंकड़ा प्रति दस लाख लोगों की आबादी पर 4 से ज्यादा हो गया है। इस तरह देश में कुल 11 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां कोविड-19 से होने वाली मौतों में इतनी वृद्धि दर्ज की गई है। ऐसे में राज्यों को चाहिए कि वो स्थिति से निपटने के लिए लॉकडाउन सहित अन्य सख्त उपायों को अपनाएं।

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) के अनुमान के अनुसार 9 हफ्तों में ही स्थिति इतनी खराब हो गई है कि कोविड-19 महामारी भारत में मृत्यु का पहला सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। यदि 26 अप्रैल 2021 को जारी आंकड़ों को देखें तो कोविड-19 के कारण हर दिन औसतन 4,800 लोगों की मौत हो रही है, जिसका मतलब है कि इसके कारण प्रति सप्ताह 33,460 लोगों की जान जा रही है। वहीं एक सप्ताह पहले इससे हर रोज 2,700 लोगों के मरने की जानकारी सामने आई थी। यही वजह थी कि यह महामारी ह्रदय रोग को पीछे छोड़ अब पहले स्थान पर पहुंच गई है। गौरतलब है कि इससे पहले डाउन टू अर्थ में छपी एक रिपोर्ट में आशंका जताई थी कि इस बीमारी के कारण देश में सबसे ज्यादा मौतें हो सकती हैं।

22 फरवरी को इस महामारी के कारण हर रोज औसतन 180 लोगों की जान गई थी जिसका मतलब है कि एक सप्ताह में कोरोना महामारी ने 1,273 लोगों की जान ली थी, तब यह महामारी देश में मृत्यु के लिए जिम्मेवार कारकों में 26 वें स्थान पर थी, जबकि अगले 8 सप्ताह के अंदर 19 अप्रैल तक यह दूसरे स्थान पर पहुंच गई थी। वहीं यदि आईएचएमई द्वारा जारी हालिया अनुमानों को देखें तो यह महामारी सबसे बड़ी हत्यारिन बन चुकी है, जिसे शीर्ष पर पहुंचने में सिर्फ एक सप्ताह का समय लगा।

यदि भारत में होने वाली मौतों के लिए जिम्मेवार अन्य प्रमुख कारणों को देखें तो उनमें ह्रदय रोग दूसरे, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) तीसरे, स्ट्रोक, चौथे स्थान पर, डायरिया संबंधी बीमारियां पांचवे, शिशु सम्बन्धी विकार छठे, सांस से जुड़े संक्रमण सातवें, तपेदिक आठवां, डायबिटीज मेलिटस नौवें और लीवर संबधी बीमारियां जिनमें सिरोसिस भी शामिल है, दसवें स्थान पर थे।

6 और राज्यों में सामने आई बढ़ती मृत्यु दर की सूचना

पिछले सप्ताह 19 अप्रैल, 2021 तक पांच राज्यों छत्तीसगढ़, दिल्ली, गोवा, महाराष्ट्र और उत्तराखंड में कोविड-19 से मरने वालों का आंकड़ा दस लाख लोगों पर चार से ज्यादा था। लेकिन 6 और राज्यों - हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड और कर्नाटक ने भी पुष्टि की है कि वहां कोविड-19 से होने वाली मौतों में वृद्धि दर्ज की गई है। इस तरह अब कुल 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में प्रति दस लाख लोगों पर कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा चार से ज्यादा है।

वहीं 12 अप्रैल, 2021 से छत्तीसगढ़, दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और गोवा में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। 26 अप्रैल, 2021 तक, इन राज्यों में कोविड-19 से होने वाली दैनिक मृत्यु दर प्रति दस लाख पर 8 से ज्यादा हो चुकी है।

क्या हैं इसके मायने

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 218,959 पर पहुंच चुका है। वहीं यदि विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यह उससे कहीं ज्यादा है। यह महामारी पिछले दो दशकों के दौरान देश ने झेली प्राकृतिक आपदाओं से भी ज्यादा घातक है। ऐसे में यदि स्वास्थ्य सुविधाओं के आभाव में यदि एक भी जान जाती है तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

एक तरफ जहां बाढ़ और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए इंसानी उत्सर्जन और उसके कारण हो रहा जलवायु परिवर्तन जिम्मेवार है इसी तरह इस महामारी से मरने वालों, विशेषकर दूसरी लहर के लिए इंसानों को जिम्मेवार माना जा सकता है। इस आपदा से होने वाली मौतों के लिए काफी हद तक तैयारियों की कमी और स्वास्थ्य सम्बन्धी बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति भी जिम्मेवार है।

जहां सार्स-कोव-2 के भारतीय संस्करण, डबल म्यूटैंट वायरस बी.1.617 के चलते जोखिम काफी बढ़ गया है। हालांकि इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि देश में स्वास्थ सुविधाओं की स्थिति पहले से ही चिंताजनक थी। ऐसे में ऑक्सीजन और दवाओं की बढ़ती कमी ने कई जिंदगियों को खतरे में डाल दिया है और कई परिवारों से उनके अपनों को छीन लिया है।

एक तरफ जहां उम्मीद जताई जा रही है कि टीकाकरण से इस महामारी के जोखिम को कम किया जा सकता है, तो विशेषज्ञ भारत की कोविड-19 वैक्सीन खरीद और मूल्य निर्धारण सम्बन्धी नीति से नाखुश हैं। राज्यों को अपने हिस्से की वैक्सीन के लिए अभी और इंतजार करना होगा।

इस महामारी के जोखिम को कम करने और इससे निपटने में विफल रहने के लिए सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को जिम्मेवार माना है। जब हर रोज होने वाली मौतें प्रति दस लाख पर 8 को पार कर जाती हैं, तो सरकारों को आईएचएमई के अनुसार कम से कम 6 सप्ताह के लिए सख्त सामाजिक दूरी अपनानी चाहिए। इसका मतलब है कि दिल्ली, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तराखंड जैसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कुछ और हफ्तों तक लॉकडाउन जरुरी है।

02 मई 2021 को सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह दी थी कि वो इसके लिए सख्त कदम उठाएं। साथ ही लॉकडाउन पर भी विचार करने के लिए कहा था। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इससे लोगों के रोजगार पर कम से कम असर पड़े ।