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क्या कोरोनावायरस ने कम कर दी चीन की आर्थिक विकास की रफ्तार?

संयुक्त राष्ट्र के व्यापार और विकास के शोध में सामने आया कि बीते दो महीने में चीन से होने वाली वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में लगातर कमी आई है  

By Manish Chandra Mishra

On: Friday 06 March 2020
 
Photo: wikimedia commons
Photo: wikimedia commons Photo: wikimedia commons

पिछले दो महीने से चीन कोरोना वायरस (कोविद-19) की चपेट में है। इसका असर चीन के स्थानीय और वैश्विक व्यापार पर देखा जा रहा है। सिर्फ 2 महीने में ही आर्थिक गतिविधियों को दर्शाने वाले मुख्य गतिविधियां प्रभावित होती दिख रही है। संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था यूनाइटेड नेशन्स कॉन्फ्रेंस ऑफ ट्रेड एंड डेवलपमेंट ने चीन की आर्थिक गतिविधियों पर एक विश्लेषण किया है। इस विश्लेषण में तेल का आयात, बंदरगाहों पर जहाजों की आवाजाही, कच्चे तेल के शोधन से बने इंधन के निर्यात के आधार पर चीन में विनिर्माण की स्थिति को देखने की कोशिश की गई है। इस शोध पोत की आवाजाही पर नजर रखने वाली तकनीक (एआईएस) की मदद में समुद्र में आने-जाने वाले पोत का आंकड़ा इकट्ठा किया गया।

चीन के साथ विश्वभर के समुद्र में कम दिख रहे मालवाहक पोत

मालवाहक जहाजों के चीन आने जाने के आंकड़े को दो तरीके से देखा जाता है, एक बंदरगाह (पोर्ट) पर जहाज के आने के शेड्यूल से और दूसरा जहाज कब-कब शेड्यूल के बावजूद पोर्ट पर नहीं पहुंच पाए। जनवरी और फरवरी महीने में इन दोनों ही मानकों के मुताबिक चीन में जहाजों की आवाजाही कम देखी गई। शेड्यूल की संख्या कम हुई है और कई जहाज शेड्यूल के बावजूद पोर्ट पर नहीं पहुंच सके। ये भी देखा गया कि मालवाहक कंपनियों ने जहाजों में माल की मात्रा और उसके फेरे कम किए हैं।

छुट्टियों के पहले इन कंपनियों के पास प्री-ऑर्डर आने लगते हैं, जिनमें भी कमी देखी गई है। ऐसा तब हो रहा है जब कई वायुयान कंपनियों ने अपने कार्गो शिप की उड़ान रद्द की है, जबकि उड़ान रद्द होने की स्थिति में पानी के माध्यम से माल की आवाजाही बढ़नी चाहिए थी। हालांकि, यहां एक और बात गौर करने वाली है कि विश्वभर में ट्रेड वार की स्थिति पैदा हो रही है जिससे अगस्त 2018 के बाद से मालवाहक जहाजों की आवाजाही विश्वभर में कम देखी जा रही है। इसके बावजूद जनवरी और फरवरी के दौरान चीन में यह कमी तेजी से बढ़ती दिखी।

मंदी का एक और संकेतक पानी में रुके हुए जहाज हैं। जहाज पानी में पोर्ट के व्यस्त रहने, मौसम की खराबी की वजह से भी रुकते हैं और इसका एक और कारण बाजार भी हो सकता है। डीजल की ढुलाई करने वाले जहाज समुद्र में जहां-तहां तैर रहे हैं, आगे नहीं बढ़ रहे। रिसर्च के दौरान यह पाया गया कि चीन में डीजल की मांग में भी कमी देखी जा रही है।

कच्चे तेल की मांग में भी कमी

कच्चे तेल के वैश्विक मांग में भी चीन का महत्वपूर्ण योगदान है और यह देश कच्चे केल का एक बड़ा आयातक और उसके शोधन के बाद बने सामानों का निर्यातक है। कच्चे तेल की मांग सालाना होती है और एकसाथ इसका करार किया जाता है। इसका मतलब ये हुआ कि कच्चे तेल की मांग प्रभावित नहीं होनी चाहिए थी। हालांकि, यहां भी मांग में कमी के संकेत दिखने लगे हैं। इस बात का पता लगाने के लिए जेट इंधन की मांग को आधार में रखकर देखा गया तो नतीजे निराशाजनक दिखे।

इस वर्ष की शुरुआत से जेट इंधन की मंग में 2 प्रतिशत की कमी आई है। इसे 10 जनवरी 2020 के बाद से देखा गया को यह कमी 5 प्रतिशत तक दिख रही है। इस कमी को इस तरह से समझा जाए कि पिछले पांच वर्षों में जेट इंधन की मांग बढ़ती ही गई है और अचानक पहली बार कमी देखी जा रही है। तेल शोधन की गतिविधियों में भी चीन में कमी देखी जा रही है। यह कमी डीजल के मांग तक भी पहुंच गई है और देखा जा रहा है।

डीजल का उपयोग कई छोटी-बड़ी फैक्ट्री में होता है और यह संकेत उत्पादन कम होने की तरफ है। यूनाइटेड नेशन के इस रिसर्च में सामने आया है कि बाजार के संकेत को समझते हुए मालवाहक कंपनियों ने अपने छोटे जहाजों को सामान ढोने के काम में लगाना शुरू किया है। इस बात का अंदाजा समुद्र में जहाज की बढ़ती रफ्तार को देखकर लगाया गया। आमतौर पर हल्के वजन वाले जहाज तेज चलते हैं और इस समय जहाज की रफ्तार बढ़ती दिख रही है। शोध में आशका जाहिर की गई है कि इस मंदी से उबरने में चीन और विश्व को 2020 के अंत तक का इंतजार करना पड़ सकता है।