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क्या कोरोनावायरस की जांच के लिए भारत के पास हैं पर्याप्त किट?

भारत में कोरोनावायरस के मरीजों के नमूनों की जांच पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के अलावा अलाप्पुझा, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की लैब में होगी

By Banjot Kaur

On: Thursday 30 January 2020
 
Photo: Flickr
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संदिग्ध नोवेल कोरोनावायरस (2019-nCoV) के मरीजों के नमूनों की जांच पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) के अलावा अलाप्पुझा, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की लैबोरेटरी में होगी। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दी है।

आईसीएमआर की चारों लैब एनआईवी के मार्गदर्शन में काम करेंगी। हालांकि फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि इन लैब्स में डायग्नोसिस के लिए कितनी किट उपलब्ध हैं और वे कितनी कामगार हैं।

डाउन टू अर्थ को एक ईमेल में आईसीएमआर-एनआईवी की नई डायरेक्टर प्रिया अब्राहम ने बताया कि कोरोनावायरस के लिए किए जाने वाले टेस्ट में न्यूक्लिक एसिड के विस्तारण पर आधारित एक जांच की जाती है जिसे पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) कहा जाता है। इसका एक और सूक्ष्म प्रकार है जिसे रियल-टाइम पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (आरटी-पीसीआर) कहा जाता है है।

एनआईवी और नेटवर्क लैब्स के पास कितनी किट उपलब्ध हैं, इसके जवाब में अब्राहम ने बताया कि ICMR-NIV और वायरल रिसर्च एंड डायग्नॉस्टिक लैबोरेटरी के पास पर्याप्त मात्रा में किट मौजूद हैं। हालांकि उन्होंने संख्या नहीं बताई। उन्होंने यह भी कहा NIV में जांच के जिन प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है वे सभी नोवेल कोरोनावायरस पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा सुझाई गई गाइडलाइन पर आधारित हैं।

यह पूछने पर कि टेस्ट के रिजल्ट आने में कितना समय लगेगा, अब्राहम ने बताया कि टेस्ट में कितना कम समय लगेगा यह इसपर निर्भर करता है कि हम कौन सा प्रोटोकॉल फॉलो कर रहे हैं। सामान्य तौर पर हम औसतन 12 से 24 घंटे का समय लेकर चलते हैं क्योंकि कई बार एक से अधिक टेस्ट भी करने पड़ते हैं।

डाउन टू अर्थ ने उन राज्यों और अस्पतालों के अधिकारियों से भी बात की जिन्होंने एनआईवी के पास अपने सैंपल भेजे हैं। बिहार के स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें तीन दिन इंतजार करने को कहा गया है।

सिर्फ महाराष्ट्र के सरकारी महामारीविद् प्रदीप अवाटे ने बताया कि उन्हें एक ही दिन में नतीजे मिल जाएंगे। डिपार्टमेंट ने 10 सैंपल भेजे हैं और उनमें से चार के नतीजे आने का इंतजार है। 

अब्राहम के मुताबिक, 28 जनवरी तक 22 सैंपल की जांच की गई है और रोजाना तकरीबन चार से छह सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं।

यह पूछने पर कि अगर सैंपल की गिनती बढ़ गई तो एनआईवी कैसे इससे मुकाबला करेगा, उन्होंने कहा कि आईसीएमआर नेटवर्क की अन्य लैबोरेटरी को एक साथ लाकर उन्हें संचालित करना होगा और बिना रुके काम जारी रखने के लिए पर्याप्त मैनपॉवर और क्षमता बढ़ानी होगी।

उन्होंने लोगों को इस बारे में चेतावनी भी दी कि वे कोरोनावायरस फैलने का डर बढ़ने से प्राइवेट लैब के झांसे में न आएं। उन्होंने कहा कि इस वायरस के बायोसेफ्टी और बायोसिक्योरिटी पक्ष के चलते इसकी टेस्टिंग आईसीएमआर-एनआईवी जैसी बड़ी राष्ट्रीय लैबोरेटरीज तक ही सीमित हो गई है, जहां इसकी टेस्टिंग के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।

वैश्विक परिदृश्य

29 जनवरी को भारत ने 21 एयरपोर्ट्स पर चीनी पर्यटकों की स्क्रीनिंग की। भारत सरकार ने भी अपनी पर्यटन दिशानिर्देशों को अपग्रेड किया और लोगों से आग्रह किया कि वे चीन के किसी भी भाग में अपनी गैर-जरूरी यात्रा को टाल दें। ससे पहले सरकार ने लोगों को सलाह दी थी कि वे स आउटब्रेक के केंद्रीय शहर वुहान जाने और चीन के अन्य शहरों में ट्रैवल के दौरान संक्रमित लोगों से संपर्क करने सें बचें।

संयोग से अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने 28 जनवरी को अलर्ट लेवल को बढ़ाकर सर्वाधिक कर दिया है। इस अलर्ट में कहा गया है कि चीन के सभी क्षेत्रों में गैर-जरूरी यात्रा को फिलहाल रोक दिया जाए। अमेरिका ने अब तक पांच पॉजिटिव केस की पुष्टि की है।

इस बीच भारतीय नागरिकों को चीन से निकालने के ऑपरेशन की घोषणा तीन दिन पहले हुई थी, लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो सका है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने बतायाकि हमने इस अभियान का सुझाव दिया था। अब विदेश मंत्रालय को इस पर फैसला लेना होगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के अंतिम अपडेट के मुताबिक मंत्रालय चीनी प्राधिकरण के साथ बातचीत कर रहा है। 

अमेरिका ने अब तक अपने 201 नागरिकों को खाली करवा लिया है। सीडीसी ने एक बयान जारी करके कहा है कि उड़ान से पहले इन लोगों की जांच की जाएगी, सफर के दौरान एक चिकित्सक उनपर नजर रखेगा, अलास्का में प्लेन में फ्यूल भरने के लिए लैंडिंग के समय भी उनकी जांच की जाएगी। इसके बाद कैलीफॉर्निया में उनके आगमन के बाद फिर उनकी स्थिति का जायजा लिया जाएगा।

दुनियाभर के 20 देशों में कोरोनावायरस के मामले सामने आ चुके हैं। 30 जनवरी को दोपहर 4 बजे कुल कंफर्म मामलों की संख्या 7783 थी, जबकि मृत्यु का आंकड़ा 170 तक पहुंच चुका है।

आयुर्वेद में इलाज

भारतीय आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी मंत्रालय (आयुष) ने 29 जनवरी को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा है कि कोरोनावायरस इंफेक्शन के लक्षणों के इलाज में कई सूनानी दवाएं काफी असरदार हो सकती हैं। इस विज्ञप्ति में इस वायरस के इंफेक्शन को रोकने के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाएं भी सुझाई गई हैं।

29 जनवरी को यूनिसेफ से स्वास्थ्य कर्मियों के लिए रेस्पिरेटरी मास्क और प्रोटेक्टिव सूट का एक छह मीट्रिक टन वजनी शिपमेंट शंघाई आया।

यूनिसेफ की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हेनरिटा फोरे ने कहा, 'कोरोनावायरस बहुत ही तेजी से फैल रहा है और यह बहुत जरूरी है कि हम अपने सारे संसाधन इसको रोकने में लगा दें। हम अभी इस बारे में काफी ज्यादा नहीं जानते हैं कि इस वायरस का बच्चों पर कैसा असर हो रहा है, लेकिन हमें इतना पता है कि इसका नजदीकी निरीक्षण और रोकथाम ही समाधान है। हमारे पास ज्यादा समय नहीं है।'