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पहली महामारी: एथेंस का प्लेग

430 ईसा पूर्व फैली इस महामारी ने एथेंस की एक तिहाई आबादी खत्म कर दी

By Bhagirath Srivas

On: Tuesday 11 August 2020
 

सौजन्य: लॉस ऐंजिलिस काउंटी म्यूजियम ऑफ आर्ट

कोरोनावायरस ने महामारी को दुनियाभर में चर्चा का विषय बना दिया है। महामारियों के इतिहास पर नजर डालने पर हम पाते हैं कि पहली दर्ज महामारी 430-26 ईसा पूर्व फैली थी। प्राचीन ग्रीस की राजधानी एथेंस में प्लेग की महामारी उस समय फैली जब एथेंस और स्पार्टा के बीच पेलोपोनेसियन युद्ध चल रहा था। पांच साल तक कहर बरपाने वाली इस महामारी ने एथेंस की कमर तोड़ दी और वहां की कानून व्यवस्था चरमरा गई। “सायकायट्री ऑफ पेंडेमिक्स” पुस्तक में दामिर हुरमोविक लिखते हैं, “यह प्लेग सबसे पहले इथियोपिया में फैला। फिर मिस्र और ग्रीस में फैल गया।” प्राचीन काल से महामारियां समुद्री नाविकों के जरिए बंदरगाहों वाले शहरों तक पहुंचती रही हैं। यह प्लेग भी एथेंस के पिराइस बंदरगाह में सबसे पहले पहुंचा और फिर इसने दूसरे इलाकों को भी अपनी जद में ले रही है। चूंकि वह युद्ध का दौर था, इसलिए इस संक्रामक महामारी ने तेजी से पैर पसारे।

प्लेग के शुरुआती लक्षण आंखों का लाल होना, सिरदर्द, खुजली और बुखार थे। इसके बाद संक्रमितों के मुंह से खांसी से साथ खून आने लगा और पेट में भयंकर दर्द हुआ। संक्रमित व्यक्ति 7-8 दिन में मर गए। जो लोग बच गए वे जिंदगी भर के लिए लकवाग्रस्त हो गए, कोमा में चले गए या नेत्रहीन हो गए।” इस महामारी से एथेंस एक तिहाई आबादी (1 लाख) खत्म हो गई और इसने युद्ध में एथेंस को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

दामिर लिखते हैं, “यह महामारी क्यों फैली, इसका कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चला। कुछ महामारी वैज्ञानिकों का मानना है कि इबोला वायरस इसका कारण था क्योंकि इस वायरस के कारण रक्तस्रावी बुखार आता है।” कई जानकार इस बीमारी को खसरा, टाइफस, ग्लैंडर, चेचक, बैक्टीरिया संक्रमण, सांस की बीमारी, लासा बुखार, टाइफाइड आदि से भी जोड़ते हैं। एक थ्योरी यह है कि महामारी मियाज्मा यानी जहरीली भाप के जरिए फैली।

“हिस्ट्री ऑफ द पेलोपोनिसयन वॉर” किताब के लेखक और एथेंस के प्लेग से बचे थुसाडाइड्स ने इस महामारी का आंखों देखा हाल लिखा है। किताब में वह लिखते हैं, “जिन मरीजों को तेज बुखार था, वे निर्वस्त्र रहने लगे क्योंकि कपड़े त्वचा को स्पर्श करते थे। बहुत से लोग पानी में डूबे रहे।” वह लिखते हैं कि प्लेग की चपेट में आने वालों को इतनी ज्यादा प्यास लगी कि बड़ी मात्रा में तरल पदार्थ के सेवन से भी नहीं बुझी। चिकित्सकों ने लोगों को बचाने के तमाम प्रयास किए लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली। प्लेग ने लोगों के दिलोदिमाग में इतना गहरा असर डाला कि कानून का भय उनके मन से निकल गया। उन्हें लगा कि वे पहले से ही मृत्युदंड की सजा झेल रहे हैं। थुसाडाइड्स लिखते हैं कि सघन आबादी वाले क्षेत्रों में मृतकों की संख्या सबसे अधिक थी।

एथेंस के इतिहास में यह महामारी सबसे बुरे दौरों में एक मानी जाती है। साल 1994 में मेट्रो के लिए एथेंस की पुरानी कबि्रस्तान की खुदाई के वक्त 150 लोगों की सामूहिक कब्रें मिलीं थीं। इस कब्रों की पहचान प्लेग पीड़ितों के रूप में हुई थी।