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श्मशान घाट से ग्राउंड रिपोर्ट: क्या कोविड-19 से मौत के आंकड़े छिपा रही है बिहार सरकार?

डाउन टू अर्थ ने बिहार सरकार की तरफ से जारी किये गये आधिकारिक आंकड़ों और पटना के एक शवदाह गृह से निकाले गये आंकड़े में भारी अंतर पाया

By Umesh Kumar Ray

On: Friday 09 April 2021
 
बिहार के पटना शहर में स्थित बांसघाट विद्युत शवदाह गृह। 9 अप्रैल को कोविड-19 संक्रमण से मारे गये व्यक्ति की लाश को जलाने के लिए शवगृह में ले जाते कर्मचारी। फ़ोटो: उमेश कुमार राय
बिहार के पटना शहर में स्थित बांसघाट विद्युत शवदाह गृह। 9 अप्रैल को कोविड-19 संक्रमण से मारे गये व्यक्ति की लाश को जलाने के लिए शवगृह में ले जाते कर्मचारी। फ़ोटो: उमेश कुमार राय बिहार के पटना शहर में स्थित बांसघाट विद्युत शवदाह गृह। 9 अप्रैल को कोविड-19 संक्रमण से मारे गये व्यक्ति की लाश को जलाने के लिए शवगृह में ले जाते कर्मचारी। फ़ोटो: उमेश कुमार राय

देश में कोविड-19 महामारी का दूसरा दौर शुरू चुका है। एक बार फिर से सरकार के आंकड़े भयावह हो चुके हैं। 9 अप्रैल 2021 को जारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में कोविड-19 की वजह से 780 मौतें हुई और कुल मरने वालों की संख्या 1,67,642 हो चुकी है, लेकिन क्या यह आंकड़े सही है। डाउन टू अर्थ ने कुछ शहरों के श्मशान घाटों में जाकर यह जानने की कोशिश की, जो बेहद चौंकाने वाले हैं। आज पढ़ें, बिहार की राजधानी पटना का हाल... 

दोपहर के करीब डेढ़ बजे हैं। पटना के सबसे पुराने शवदाह गृहों में एक बांसघाट शवदाह गृह के अहाते में दो लाशें अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। शवदाह गृह के भीतर भी कुछ लाशें कतार में हैं। इसी बीच पीपीई किट पहने दो लोग कोविड-19 संक्रमण से मरने वाले व्यक्ति को रंथी पर लेकर सीधे शवदाह गृह में प्रवेश कर जाते हैं।

रात 12 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक कोविड-19 से मारे गये 9 लोगों की लाशें इस शवदाह गृह में चुकी हैं। दो बजे के आसपास 10वां शव शवदाह गृह के भीतर घुसता है, लेकिन सामान्य बीमारियों से मरे लोगों की लाशें अहाते में ही हैं। अहाते में तीन दर्जन से ज्यादा लोग बैठे हैं। इस शवदाह गृह में अमूमन इतनी हलचल नहीं होती है, लेकिन कोविड-19 महामारी और अब इस महामारी की दूसरी लहर शुरू होने के बाद यहां शवों के आने का सिलसिला बढ़ा है। 

शवदाह गृह में जितनी भी लाशें आती हैं, उनका नाम, उम्र, बीमारी अन्य जानकारियां रजिस्टर में दर्ज की जाती हैं, जिन्हें पटना नगर निगम को भेजा जाता है। पटना नगर निगम इसके आधार पर मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार करता है, जिन्हें बाद में लाशों के निकट संबंधियों को सौंप दिया जाता है। 

शवदाह गृह के एक कर्मचारी ने रजिस्टर में दर्ज पिछले चार दिनों का आंकड़ा डाउन टू अर्थ के साथ साझा किया, लेकिन उक्त कर्मचारी ने नाम जाहिर करने से इनकार कर दिया।

शवदाह गृह से मिलने आंकड़े बताते हैं कि 6 अप्रैल को यहां कुल 23 लाशें आई थीं, जिनमें से कोविड से संबंधित लाशों की संख्या 10 थी। 7 अप्रैल को कुल 17 लाशें यहां जलाई गई थीं, जिनमें से 5 की मौत कोविड-19 के संक्रमण से हुई थी।

इसी तरह 8 अप्रैल को कुल 19 लाशों को यहां जलाया गया था, जिनमें से कोविड संक्रमण से 11 लोगों की मौत हुई थी।

9 अप्रैल यानी शुक्रवार को दोपहर दो बजे तक 19 लाशें चुकी थीं, जिनमें से 10 मौतें कोविड-19 के संक्रमण से हुई हैं।

यानी कि चार दिनों में इस शवदाह गृह में कुल 36 लोगों की लाशें आई हैं, जिनकी मौत कोरोनावायरस से हुई थी। लेकिन, ये आंकड़े और बिहार के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिलावार जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों में भारी फर्क देखने को मिल रहा है। 

बिहार स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जारी 8 अप्रैल तक के आंकड़े () बताते हैं कि बिहार में पिछले साल 22 मार्च को कोविड-19 का पहला मामला सामने आने के बाद से अब तक 2 लाख 73 हजार 830 लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से अब तक 1595 लोगों की मौत हो चुकी है। 

5 अप्रैल को बिहार स्वास्थ्य विभाग से जो आंकड़ा जारी हुआ था, उसके मुताबिक बिहार में 5 अप्रैल तक कोविड-19  के संक्रमण से 1586 लोगों की मौत हुई थी।

अगर 8 अप्रैल तक कोविड से हुई मौतों के आंकड़े को 5 अप्रैल को हुई मौतों से घटा दें, तो 9 आता है, यानी कि 6 अप्रैल से 8 अप्रैल तक बिहारभर में कोविड-19 से सिर्फ 9 लोगों की मौत कोरोना से हुई। वहीं, पटना के आंकड़े लें, तो 5 अप्रैल से 8 अप्रैल तक पटना में कोविड-19 से एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है, जबकि सिर्फ पटना शहर के बांसघाट शवदाह गृह में 6 अप्रैल से 8 अप्रैल तक 26 लोगों की लाशें आईं, जिनकी मौत कोविड-19 से हुई थी।

 शवदाह गृह के आंकड़े और सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में कोई मेल नहीं होने से इस आशंका को बल मिलता है कि कहीं सरकार कोविड से मौत के आंकड़े छिपा तो नहीं रही है।

इस संबंध में डाउन टू अर्थ ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और स्वास्थ्य सचिव प्रत्यय अमृत को फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। डाउन टू अर्थ ने स्वास्थ्य विभाग को मेल भेजा है। जवाब आने पर स्टोरी अपडेट कर दी जाएगी। 

जन स्वास्थ्य अभियान से जुड़े डॉ शकील ने इन आंकड़ों में भारी अंतर को गंभीर मामला बताया। उन्होंने डाउन टू अर्थ से कहा, “जो आंकड़ा आपने निकाला है, वो तो सिर्फ उस शवदाह गृह का है, जहां हिन्दू जाते हैं। मुस्लिम और इसाई समुदाय के लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार अलग जगहों पर करते हैं, तो उनका आंकड़ा इसमें शामिल नहीं है। मुझे लगता है कि असल आंकड़े बहुत ज्यादा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, आंकड़ों से साफ जाहिर हो रहा है कि सरकार कोविड-19 से मौत के आंकड़े छिपा रही है।

शवदाह गृह के एक अन्य कर्मचारी ने डाउन टू अर्थ को बताया कि कोविड-19 का संक्रमण बढ़ने के बाद ज्यादा लाशें यहां आने लगी हैं। उन्होंने कहा, “जब कोविड-19 का संक्रमण नहीं था, तब जितनी लाशें आती थीं, अब उससे दोगुना लाशें रही हैं। ये अतिरिक्त लाशें कोविड-19 संक्रमित होती हैं।

पिछले जब मार्च में बिहार में कोविड-19 का पहला मामला सामने आया था और फिर बाद में लॉकडाउन लगाया था, तो इसके कुछ दिन बाद ही बांसघाट शवदाह गृह को कोविड-19 शवदाह गृह घोषित कर दिया गया था। यानी इस शवदाह गृह में उन लाशों को ही जलाया जाता था, जिनकी मृत्यु कोविड-19 के संक्रमण से हुई थी। बाद में स्थिति सामान्य होने लगी, तो सामान्य कारणों से मरने वाले लोगों की लाशें भी यहां लाई जाने लगी।

बांसघाट शवदाह गृह में दो इलेक्ट्रिक चूल्हे हैं। एक लाश को जलने में करीब 45 मिनट लगते हैं, इस हिसाब से देखें, तो रोजाना यहां 64 लाशें जल सकती हैं। शवदाह गृह में काम करने वाले एक अन्य कर्मचारी ने कहा, “लाशों को इंतजार तभी करना पड़ता है जब तुरंत-तुरंत लाशें आने लगती हैं क्योंकि एक शव को जलने में 45 मिनट लगता है।

उक्त कर्मचारी ने बताया, “पिछले साल भी कोविड-19 से मरने वाले लोगों की लाशें इसी अनुपात में आती थीं, जितनी अभी रही हैं, लेकिन इस साल हम देख रहे हैं कि पिछले 10 दिनों में कोविड-19 से संक्रमित व्यक्तियों की लाशें ज्यादा संख्या में रही हैं।

पिछले 30 सालों से शवदाह गृह के अहाते में हवन सामग्री बेचने वाले दुकानदार नवल किशोर शर्मा ने कहा कि होली के बाद कोविड-19 से मरने वाले लोगों की ज्यादा लाशें रही हैं। एक एक दिन में 17 से 20 लाशें रही हैं। 

पिछले साल अप्रैल से अगस्त महीने तक कोविड-19 से मरने वाले लोगों की लाशें ज्यादा आती थीं। इसके बाद इनकी संख्या में काफी कमी गई थी, लेकिन अब दोबारा इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। जब देश में कोविड-19 नहीं आया था, तो सामान्यतः 10 लाशें रोजाना आती थीं,” नवल किशोर शर्मा ने बताया।

शवदाह गृह से मिलने आंकड़ों के मुताबिक, कोविड-19 के संक्रमण से मरने वालों के अलावा हृदयाघात, डायरिया, ब्रेम हेमरेज और कैंसर से लोगों की मौतें हो रही हैं।