भारत में नवंबर तक 12.5 लाख तक पहुंच सकता है कोविड-19 से मरने वालों का आंकड़ा: आईएचएमई

आईएचएमई के अनुसार वास्तव में कोविड-19 से होने वाली मौतें सरकारी आंकड़ों से करीब 2.8 गुना ज्यादा है। यह इस बात को साबित करते हैं कि भारत में सरकारी आंकड़े जमीनी हकीकत से काफी दूर हैं

By Kiran Pandey, Lalit Maurya

On: Friday 23 July 2021
 

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत में 01 नवंबर तक कोविड-19 से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 12,54,793 पर पहुंच सकता है। हालांकि सरकारी आंकड़ों और वर्तमान मृत्युदर के हिसाब से देखें तो यह आंकड़ा नवंबर तक 4.48 लाख के करीब रहने का अनुमान है। यदि स्पष्ट तौर पर कहें तो यह आंकड़ें इस बात को साबित करते हैं कि भारत में सरकारी आंकड़े जमीनी हकीकत से काफी दूर हैं, और उनकी सही संख्या दर्ज नहीं हो रही है।

यदि आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से देखें तो पिछले सप्ताह 12 जुलाई तक कोविड-19 महामारी के चलते हर रोज औसतन 810 लोगों की जान जा रही थी, जोकि एक सप्ताह पहले जितनी ही है, पर यदि इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन द्वारा जारी आंकड़ों को देखें तो उसके अनुसार 6 से 12 जुलाई 2021 तक हर औसतन 2,100 लोगों की जान इस महामारी ने ली थी।

इससे एक सप्ताह पहले यह आंकड़ा औसतन 2,200 प्रति दिन था। जिसका मतलब है कि वास्तव में कोविड-19 से होने वाली मौतें सरकारी आंकड़ों से 2.8 गुना ज्यादा है। अनुमान है कि 12 जुलाई से 01 नवंबर के बीच कम से कम एक लाख अतिरिक्त मौतों के होने की सम्भावना है। यहां यह समझना जरुरी है कि अतिरिक्त मौतें क्या होती हैं। अतिरिक्त मौतों से तात्पर्य किसी विशेष समयावधि में दर्ज की गई मौतों का आंकड़ा और उस अवधि में होने वाली अनुमानित मौतों के बीच का अंतर होता है। 

भारत में होने वाली मौतों का तीसरा प्रमुख कारण है कोविड-19

आईएचएमई के अनुसार, 12 जुलाई 2021 तक हृदय रोग और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के बाद कोविड-19 भारत में होने वाली मौतों का तीसरा प्रमुख कारण है। इस विषय में आईएचएमई ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी है कि केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय और सिक्किम में कोविड​​-19 के कारण हर होने वाली अतिरिक्त मौतों की दर प्रति दस लाख पर चार से ज्यादा थी। यदि राज्य स्तर पर अतिरिक्त मौतों की दर को देखें तो मणिपुर में 8 प्रति दस लाख है। 

देखा जाए तो जुलाई 2021 के बाद से मणिपुर में कोविड-19 के मामले बढ़ रहे हैं।  22 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार वहां 22,88,050 लोग इस महामारी से संक्रमित हो चुके थे, जिनमें से 1,424 मरीजों की मौत हो चुकी है जबकि 10,347 मामले अभी भी सक्रिय हैं। 

भारत में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के लिए कहीं हद तक डेल्टा वैरिएंट भी जिम्मेवार है। यदि राज्य स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक के. राजो सिंह की मानें तो यह डेल्टा संस्करण सबसे पहले भारत में सामने आया था जो अब करीब 80 देशों में फैल गया है, यह राज्य में बढ़ते संक्रमण के लिए जिम्मेवार है। उनके अनुसार यह वायरस हवा के जरिए फैल सकता है ऐसे में लोगों को आपसी सहयोग और अतिरिक्त देखभाल करने की जरुरत है।

आईएचएमई के अनुसार सार्स-कोव-2 वैरिएंट बी.1.617 जिसने डेल्टा वेरिएंट बी.1.617.2 को जन्म दिया है वो भारत में अप्रैल और मई में मामलों और मौतों में होने वाली तीव्र वृद्धि के लिए जिम्मेवार है। यह देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैल चुका है।

28 जून 2021 को 23 राज्यों में इसकी पुष्टि हो चुकी थी, जबकि छह और राज्यों में इसका पता चला है। वहीं देखा जाए तो 6 से 12 जुलाई के बीच देश में कोविड-19 से संक्रमित दैनिक मामलों में 1.8 फीसदी से थोड़ा ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इस सप्ताह में औसतन हर दिन करीब 43,800 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इससे एक सप्ताह पहले हर दिन करीब 43,000 मामले सामने आए थे। 

ऐसे में इससे निपटने और स्वास्थ्य प्रणाली का समर्थन करने के लिए आईएचएमई ने कठोर उपायों की जरुरत पर बल दिया है। इसके लिए टीकाकरण में तेजी लाने के साथ-साथ मास्क के प्रभावी उपयोग की सिफारिश की गई है। साथ ही उचित प्रतिबंधों की मदद से सामजिक दूरी को बनाए रखने की भी सलाह दी गई है। 

सामाजिक दूरी और मास्क बचा सकते हैं 14 हजार लोगों की जान

आईएचएमई के विश्लेषण से पता चला है कि यदि लोग सामजिक दूरी बनाए रखते हैं और घर से बाहर निकलने पर 95 फीसदी लोग यदि मास्क लगाते हैं तो इससे 14 हजार अतिरिक्त मौतों को रोका जा सकता है। हालांकि देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मास्क पहनना अनिवार्य है। इसके बावजूद आईएचएमई का अनुमान है कि बिहार में लगभग 40 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 30 फीसदी आबादी घर से बाहर निकलने पर मास्क नहीं पहनती है। 

जनवरी 2021 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी महामारी के प्रसार को रोकने और नए वैरिएंट की निगरानी के लिए निरंतर जीनोम सिक्वेंसिंग की बात कही थी। आईएचएमई ने भी इसपर जोर दिया है और कहा है कि अगले कुछ महीनों में कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए वायरस के नमूनों की पर्याप्त संख्या में जीनोम सिक्वेंसिंग और समय पर उसकी रिपोर्ट जरुरी है। साथ ही मौजूदा वैरिएंट के खिलाफ उपलब्ध टीके कितने कारगर है इसकी जांच की भी सिफारिश की गई है।

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