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कोविड-19 : आईआईटी खड़गपुर ने 2,000 रुपए की लागत से बनाई पोर्टेबल मशीन, 400 रुपए में होगी जांच, 100 प्रतिशत आरटी-पीसीआर जैसे नतीजे

दूरदराज के इलाकों में सस्ती और भरोसेमंद जांच में यह मशीन बहुत कारगर साबित हो सकती है

By Bhagirath Srivas

On: Saturday 25 July 2020
 
आईआईटी खड़गपुर में मकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर सुमन चक्रवती और स्कूल ऑफ बायोसाइंस से जुड़े अरिंदम मोंडल ने इस मशीन को बनाने में अहम भूमिका निभाई है
आईआईटी खड़गपुर में मकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर सुमन चक्रवती और स्कूल ऑफ बायोसाइंस से जुड़े अरिंदम मोंडल ने इस मशीन को बनाने में अहम भूमिका निभाई है आईआईटी खड़गपुर में मकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर सुमन चक्रवती और स्कूल ऑफ बायोसाइंस से जुड़े अरिंदम मोंडल ने इस मशीन को बनाने में अहम भूमिका निभाई है

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर ने एक ऐसी कोविड-19 रेपिड टेस्टिंग मशीन तैयार की है, जो आरटी-पीसीआर (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-  पोलीमरेज चेन रिएक्शन) का विकल्प बन सकती है। केवल 2,000 रुपए की लागत से तैयार इस मशीन से महज 400 रुपए में कोरोनावायरस की जांच की जा सकती है। बड़े स्तर पर उत्पादन होने पर इसकी लागत में और कमी आ सकती है।

इस मशीन से होने वाली जांच के नतीजे आरटी-पीसीआर की जांच से शत प्रतिशत मिलते हैं। इस मशीन की सबसे खास बात यह है कि यह एक पोर्टेबल डिवाइस है, जिसे दूरदराज के इलाकों में ले लाकर जांच की गति तेज की जा सकती है। आईआईटी खड़गपुर का दावा है कि यह दुनिया पहली ऐसी मशीन है जो प्रयोगशाला और चारदीवारी से निकलकर बड़े पैमाने में जांच करने में सक्षम है। दूरदराज के कमजोर तबकों में कोरोनावायरस के संक्रमण का पता लगाने में यह मशीन काफी अहम साबित हो सकती है।

यह मशीन दूरदराज के इलाकों में जांच के लिए काफी अहम हो सकती हैआईआईटी खड़गपुर में मकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर सुमन चक्रवती और स्कूल ऑफ बायोसाइंस से जुड़े अरिंदम मोंडल ने इस मशीन को बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 25 जुलाई को मशीन के वेब लॉन्च के मौके पर सुमन चक्रवर्ती ने बताया कि आरटी-पीसीर एक महंगी तकनीक है। यह मशीन 25 लाख में मिलती और इससे बड़े स्तर पर इससे जांच संभव नहीं है। साथ ही इससे होने वाली जांच भी बहुत महंगी है लेकिन उनके द्वारा विकसित पोर्टेबल डिवाइस से महज एक घंटे में जांच के नतीजे प्राप्त किए जा सकते हैं। इससे एक साथ कई सैंपल की जांच की भी जा सकती है। हर जांच के बाद केवल पेपर काटरिज बदलना होता है। उनका कहना है कि हम सरकार और औद्योगिक समूहों से इसकी तकनीक साझा करने को तैयार हैं।

चक्रवर्ती ने बताया कि हमने इस मशीन से 500 सैपलों की जांच की। इन सैंपलों की आरटी-पीसीआर जांच भी कराई गई। दोनों जाचों के नतीजे एक समान थे। उनका कहना है कि यह मशीन कोरोनावायरस की तरह वायरस से होने वाली अन्य महामारियों में भी उपयोगी है। वह बताते हैं कि इस मशीन से जांच के लिए किसी प्रयोगशाला की जरूरत है। इसके केवल एक टेबल रखकर जांच की जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह बेहद उपयोगी हो सकती है।

आईआईटी खड़गपुर के मुताबिक, कोरोनावायरस संक्रमण के तेजी से हो रहे फैलाव को देखते हुए सस्ती और भरोसेमंद जांच की सख्त जरूरत है। वर्तमान में उपलब्ध जांच तकनीक बहुत महंगी हैं। इसके अलावा जांच मैकेनिजम के साथ कहीं आने जाने की समस्या है क्योंकि बहुत से उपकरणों को जांच केंद्रों तक लेकर जाना पड़ता है। आईआईआई खड़गपुर ने इस चुनौती को देखते हुए अपने शोधकर्ताओं की टीम लगाई और उनकी दिन-रात की मेहनत के बाद यह मशीन तैयार की गई है। इस मशीन को थोड़े से प्रशिक्षण के बाद कोई भी इस्तेमाल कर सकता है।