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कोविड मरीजों के घर के बाहर नहीं चिपक सकता पोस्टर, न ही आरडब्ल्यूए को साझा होगी जानकारी

कोविड मरीजों के घर के बाहर पोस्टर लगाया जाना और आरडब्ल्यूए के जरिए व्हाट्स एप पर मरीज के नाम का प्रसार स्पष्ट तौर पर राइट टू प्राइवेसी का उल्लंघन है।

By Vivek Mishra

On: Tuesday 03 November 2020
 

दिल्ली में कोविड मरीज के घर के बाहर पोस्टर चिपकाया जाएगा या नहीं। यह पहलू अब बिल्कुल शीशे की तरह साफ हो गया है। कोविड मरीजों को किसी भी तरह का सामाजिक दंश न झेलने पड़े इसलिए उनकी राइट टू प्राइवेसी बनाए रखनी पड़ेगी। दिल्ली सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर कहा है कि घर में आइसोलेट होने वाले किसी भी कोविड मरीज के घर के बाहर कोई पोस्टर नहीं चिपकाया जाएगा। वहीं, ऐसा कोई भी पोस्टर जो घर के बाहर चिपकाया गया है उसे तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए। 

दिल्ली हाईकोर्ट में एडवोकेट कुश कालरा की ओर से उठाए गए कोविड मरीजों की राइट टू प्राइवेसी मामले (डब्यूपी (सी) नंबर 7250/2020) में 2 नवंबर, 2020 को दिल्ली सरकार की ओर से दिए गए लीगल रिप्लाई में यह बात कही गई है।

लीगल रिप्लाई में कहा गया है कि स्वास्थ्य सेवा निदेशालय की ओर से 7 अक्तूबर, 2020 को सभी सीडीएमओ और होम आइसोलेशन से संबंधित नोडल अधिकारियों को कोविड मरीजों की जानकारी साझा या उजागर न करने के लिए आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही दिल्ली के अधिकारियों को ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है कि वह कोविड मरीजों की जानकारी आरडब्ल्यूए या किसी अन्य व्यक्तियों को साझा करें।

दिल्ली में आरडब्ल्यूए वाली या अन्य कई आवासीय कॉलोनियों में कोविड मरीजों के होम आइसोलेशन के दौरान सामाजिक बहिष्कार जैसी बातें सामने आती रही हैं। 

एडवोकेट कुश कालरा ने डाउन टू अर्थ से बताया कि कोविड मरीजों की राइट टू प्राइवेसी का मामला उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में उठाया था। यह देखने में आ रहा था कि स्वास्थ्य विभाग के द्वारा कई आवासीय कॉलोनियों में आरडब्ल्यूए को जानकारी साझा की जा रही थी, जिससे बाद में आरडब्ल्यूए व्हाट्स एप ग्रुप के जरिए समाज में कोविड मरीजों की जानकारी का व्यापक प्रचार कर दिया जाता था।

इसके चलते संबंधित मरीज और उसके परिवार को सामाजिक दंश झेलना पड़ता था।साथ ही साथ यह बात भी स्पष्ट नहीं थी कि आरडब्ल्यूए या किसी अन्य व्यक्ति को होम आइसोलेशन की जानकारी साझा की जाए या नहीं।

एडवोकेट कालरा ने कहा कि यह रिप्लाई बताता है कि दिल्ली और सभी प्राधिकरणों को होम आइसोलेशन वाले मरीजों की जानकारी को गुप्त ही बनाए रखना होगा, जो कि अंततः किसी भी व्यक्ति के बुनियादी अधिकार राइट टू प्राइवेसी की रक्षा ही है। 

एक अक्तूबर, 2020 को यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा था। वहीं, दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस हीमा कोहली और सुब्रमोनियम प्रसाद की पीठ ने पीआईएल पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली और केंद्र सरकार को नोटिस दिया था।