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रैपिड टेस्ट करने से कोरोना को कुछ ही हफ्तों में रोका जा सकता है: अध्ययन

अध्ययनकर्ताओं द्वारा काफी बड़े क्षेत्र में साप्ताह में दो बार रैपिड टेस्ट किए गए, जिसने वायरस के संक्रमण फैलाने की दर की डिग्री को 80 फीसदी तक कम कर दिया। 

By Dayanidhi

On: Monday 23 November 2020
 
The Bihar government has launched a massive facemask checking drive to check the spread of the novel coronavirus disease (COVID-19). Photo: Wikimedia Commons

कोलोराडो और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन के अनुसार, तेजी से लोगों का कोविड-19 परीक्षण (रैपिड टेस्ट) करने से कुछ ही हफ्तों के भीतर वायरस को खत्म किया जा सकता है। भले ही परीक्षण सस्ता और मानकों की तुलना में काफी कम संवेदनशील ही क्यों न हों? अध्ययन में रैपिड टेस्ट को कम संवेदनशील जिसके, परिणाम 15 मिनट में आ जाते हैं और पीसीआर (पोलीमरेज चेन रिएक्शन) जिसके परिणाम आने में  48 घंटे तक का समय लग जाता है, उसे अधिक संवेदनशील बताया गया है।

यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर  (सीयू बोल्डर) में कंप्यूटर विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डैनियल लारमोरे ने कहा जब सार्वजनिक स्वास्थ्य की बात आती है, तो तेजी से कम संवेदनशील परीक्षण करना बेहतर होता है। हर किसी को घर पर रहने के लिए कहने के बजाय, आप यह सुनिश्चित कर सकें कि जो व्यक्ति  बीमार है वह घर पर ही रहे, ताकि उसके संक्रमण फैलाने की आशंका कम हो जाए। इस तरह हम केवल संक्रमण फैलाने वाले लोगों को ही घर पर रहने के लिए कह सकते हैं ताकि बाकी सभी लोगों में संक्रमण न फैले।

अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि इस तरह की रणनीति बाजार, रेस्तरां, खुदरा स्टोर और स्कूलों को बंद किए बिना "घर पर रहने के आदेश" को बढ़ावा दे सकती है।

लारमोरे ने सीयू के बायोफ्रीस्टियर्स इंस्टीट्यूट और हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के सहयोगियों के साथ मिलकर यह पता लगाया कि क्या परीक्षण संवेदनशीलता, अधिक परीक्षण करना, कोविड-19 के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। यह अध्ययन साइंस एडवांस में प्रकाशित हुआ है।

शोधकर्ताओं ने बताया कि संक्रमण के दौरान शरीर के अंदर संक्रमण कैसे बढ़ता है और कम होता है, जब लोग इन लक्षणों का अनुभव करते हैं, इसका मतलब है कि वे संक्रमण फैला सकते हैं।

फिर उन्होंने तीन काल्पनिक परिदृश्यों पर विभिन्न प्रकार के परीक्षणों के साथ जांच के प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने के लिए गणितीय मॉडल का उपयोग किया। इसमें 84 लाख की आबादी के शहर में, विश्वविद्यालय की तरह 20,000 लोगों की एक परिस्थिति तैयार की गई और इसमें से 10,000 लोगों को चुना गया।

जब संक्रमण फैलने पर अंकुश लगाने की बात आई तो उन्होंने पाया कि बार-बार परीक्षण और इसके समय में बदलाव इसकी  संवेदनशीलता की तुलना में बहुत अधिक महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, एक बड़े शहर का एक परिदृश्य में, जहां काफी बड़े क्षेत्र में सप्ताह में दो बार तेजी से लेकिन कम संवेदनशील परीक्षण किया गया, जिसने वायरस की संक्रामकता की दर या आरओ की डिग्री 80 फीसदी कम हो गई। लेकिन जब अधिक संवेदनशील पीसीआर (पोलीमरेज चेन रिएक्शन) परीक्षण सप्ताह में दो बार किया गया, जिसके परिणाम आने में  48 घंटे तक का समय लग जाता है, इसने केवल 58 फीसदी संक्रामकता को कम किया। अधिक तेजी से होने वाले परीक्षणों ने धीमी, अधिक संवेदनशील पीसीआर परीक्षण की तुलना में हमेशा संक्रमण फैलाने की गति को कम किया।

ऐसा इसलिए है क्योंकि लगभग दो-तिहाई संक्रमित लोगों में कोई लक्षण नहीं होते हैं और जैसा कि वे अपने परीक्षण के परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे होते हैं, वे इस दौरान वायरस फैलाना जारी रखते हैं।

बायोफ्रीस्टियर्स इंस्टीट्यूट के निदेशक और हावर्ड ह्यूजेस मेडिकल के वरिष्ठ अध्ययनकर्ता रॉय पार्कर ने कहा, यह दिखाने वाला पहला अध्ययन है जो हमें परीक्षण की संवेदनशीलता के बारे में कम चिंता करने के बारे में बताता है और जब सार्वजनिक स्वास्थ्य की बात आती है, तो बार-बार  परीक्षण किए जाने चाहिए।

एक परिदृश्य जिसमें एक शहर में 4 फीसदी लोग पहले से ही संक्रमित थे, चार में से तीन का हर तीन दिनों में तेजी से परीक्षण किया गया, इसने संख्या को 88 फीसदी तक कम कर दिया। यह छह सप्ताह के भीतर महामारी को खत्म करने के लिए पर्याप्त था।

संवेदनशीलता का स्तर व्यापक रूप से भिन्न होता है। एंटीजन परीक्षणों में संक्रमण का पता लगाने के लिए पीसीआर परीक्षण की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में संक्रामक (वायरल लोड) - लगभग 1,000 गुना वायरस की आवश्यकता होती है। एक अन्य परीक्षण, जिसे आरटी-लैंप के रूप में जाना जाता है (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन लूप-मेडिटेड इजोटेर्मल एम्प्लीफिकेशन), पीसीआर की तुलना में लगभग 100 गुना अधिक वायरस का पता लगा सकता है। बेंचमार्क पीसीआर परीक्षण के लिए प्रति मिली लीटर प्रति 5,000 से 10,000 संक्रमित आरएनए की आवश्यकता होती है, जिसका अर्थ है कि यह वायरस को या तो बहुत जल्दी या बहुत देर से पकड़ सकता है।

हार्वर्ड टी.एच. में महामारी विज्ञान के सहायक प्रोफेसर डॉ माइकल मीना ने कहा रैपिड टेस्ट किए जा सकते हैं, जब लोग संक्रामक होते हैं तब यह कोविड-19 का पता लगाने में बेहद प्रभावी हैं। उन्होंने कहा वे सस्ती भी हैं, हर रैपिड टेस्ट की लागत 1 डॉलर जितनी हो सकती है और इसके परिणाम 15 मिनट में आ सकते हैं। कुछ पीसीआर परीक्षणों में कई दिन लग सकते हैं। लारौर ने कहा रैपिड टेस्टिंग से सुपर स्प्रेडर के खतरों जैसे फुटबॉल स्टेडियमों, कॉन्सर्ट वेन्यू और एयरपोर्ट्स में संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि उन्हें यह देखकर खुशी होती है कि कई देशों ने पहले ही अपने सभी नागरिकों का परीक्षण शुरू कर दिए हैं। लारमोर ने कहा यह कोविड परीक्षण के बारे में सोच में बदलाव लाने का समय है क्योंकि ट्रांसमिशन श्रृंखला को तोड़ने और अर्थव्यवस्था को खुला रखने के लिए एक परीक्षण महत्वपूर्ण हैं।