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वैज्ञानिकों ने खोजे कोरोनावायरस संक्रमण को रोकने वाले नैनोबॉडी

शोधकर्ताओं का मानना है कि इस नैनोबॉडी में कोविड-19 के खिलाफ एंटीवायरल उपचार करने की क्षमता है

By Dayanidhi

On: Monday 07 September 2020
 
Photo: wikimedia commons
Photo: wikimedia commons Photo: wikimedia commons

 

दुनिया भर में वैज्ञानिक कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। इसी क्रम में स्वीडन के कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक छोटे से न्यूट्रिलाइज़िंग एंटीबॉडी की पहचान की है। इस एंटीबॉडी को नैनोबॉडी कहते है, जिसमें सार्स-सीओवी-2 को मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने से रोकने की क्षमता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस नैनोबॉडी में कोविड-19 के खिलाफ एंटीवायरल उपचार करने की क्षमता है।

शोधकर्ता जेराल्ड मैकइनर्नी ने कहा हम आशा करते हैं कि हमारे निष्कर्ष इस संक्रमण फैलाने वाले कोविड-19 महामारी के खिलाफ अहम भूमिका निभा सकते हैं। जेराल्ड मैकइनर्नी - कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट में माइक्रोबायोलॉजी विभाग, ट्यूमर और सेल बायोलॉजी विभाग में वायरोलॉजी के एसोसिएट प्रोफेसर हैं।

प्रभावी नैनोबॉडीज की खोज-जो कि एंटीबॉडी के टुकड़े होते हैं जो स्वाभाविक रूप से कैमलिड्स में होते हैं। उन्हें मनुष्यों के लायक बनाया जा सकता है। कैमलिड्स आकार में बड़े, शाकाहारी जानवर है, जिसकी बड़ी गर्दन और पैर लंबे होते हैं, ये ऊंटों से मिलते जुलते हैं।- फरवरी में अलपाका जानवर में नए कोरोनोवायरस स्पाइक प्रोटीन के साथ इंजेक्ट किया गया था। 60 दिनों के बाद, अलपाका से रक्त के नमूनों ने स्पाइक प्रोटीन के खिलाफ एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दिखाई। अलपाका कैमलिड्स परिवार से संबंध रखता है। इसका वैज्ञानिक नाम विसुग्ना पैकोस है। यह अध्ययन जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है।

इसके बाद, शोधकर्ताओं ने अलपाका की बी कोशिकाओं, एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिका से नैनो कणों का क्लोन बनाया। यह निर्धारित करने के लिए कि कौन से नैनोबॉडी आगे मूल्यांकन के लिए सबसे उपयुक्त हैं, उनका विश्लेषण किया। उन्होंने एक, टीवाई1 (अलपाका टायसन के नाम पर) की पहचान की, जो कुशलता से स्पाइक प्रोटीन के उस हिस्से से खुद को जोड़कर वायरस को बेअसर कर देता है, जो रिसेप्टर एसीई2 को बांधता है, जिसका उपयोग सार्स-सीओवी-2 द्वारा कोशिकाओं को संक्रमित करने के लिए किया जाता है। यह वायरस को कोशिकाओं में फैलने से रोकता है और इस तरह संक्रमण रुक जाता है।

शोधकर्ता लियो हांक ने कहा कि क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का उपयोग करते हुए, हम यह देखने में सक्षम थे कि कैसे कोई भी एपिटोप पर संक्रमित स्पाइक को बांधता है, जो सेलुलर रिसेप्टर एसीई2-बाइंडिंग साइट के साथ मिल जाता है। जो इसकी गतिविधि के लिए एक संरचनात्मक समझ प्रदान करता है।

विशिष्ट चिकित्सा के रूप में नैनो एंटीबॉडी के कई फायदे हैं। वे पारंपरिक एंटीबॉडी के आकार के दसवें हिस्से से कम हैं और आम तौर पर कम लागत में उत्पादित किए जा सकते हैं। वर्तमान में इसे मनुष्यों के लायक बनाया जा सकता है और यह श्वसन संक्रमण को रोकने में अहम भूमिका निभा सकता है।

प्रोफेसर बेन मुर्रेल कहते हैं हमारे परिणाम बताते हैं कि टीवाई1 सार्स-सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन को शक्तिशाली रूप से बांध सकता है और वायरस को बेअसर कर सकता है। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा हम अब विवो में टीवाई1 की बेअसर गतिविधि और चिकित्सीय क्षमता की जांच के लिए प्रीक्लिनिकल एनिमल स्टडीज पर विचार कर रहे हैं। बेन मुर्रेल माइक्रोबायोलॉजी, ट्यूमर और सेल बायोलॉजी विभाग में सहायक प्रोफेसर हैं।