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वैज्ञानिकों ने बनाया नया टूल, डेंगू जैसी बीमारियों के फैलने से पहले हो जाएगी भविष्यवाणी

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे उपकरण को बनाने में सफलता हासिल की है, जो संक्रामक रोगों के फैलने की भविष्यवाणी कर सकता है, इससे डेंगू जैसी बीमारियों को उनके स्रोत से ही ट्रैक कर सकते हैं

By Lalit Maurya

On: Thursday 05 December 2019
 
Photo: Vikas Choudhary
Photo: Vikas Choudhary Photo: Vikas Choudhary

हाल के दशकों में वैश्विक स्तर पर डेंगू जैसी बीमारियों के मामले बड़ी तेजी से बढ़ रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ें दर्शाते हैं कि दुनिया की लगभग आधी आबादी अब इस खतरे की जद में है। इसके चलते हर साल करीब संक्रमण के 39 करोड़ मामले सामने आ रहे हैं। आंकड़ें दर्शाते हैं कि वैश्विक स्तर पर हर साल डेंगू के चलते करीब 5 लाख लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ता है और जिनमें से करीब 2.5 फीसदी लोगों की मृत्यु हो जाती है।

डेंगू पर छपे एक अन्य अध्ययन के अनुसार अनुमान वैश्विक स्तर पर 128 देशों के लगभग 390 करोड़ लोगों को डेंगू का खतरा मंडरा रहा है। जिसका करीब 70 फीसदी बोझ के एशिया पर पड़ने के आसार हैं। वहीं दुनिया में बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन के खतरे ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।

भारत में भी डेंगू के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। आप इस बीमारी की गंभीरता को इसी तथ्य से समझ सकते हैं, कि नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एनवीबीडीसीपी) और नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2018 के आंकड़ों के अनुसार, 2009 में डेंगू के करीब 60,000 मामले सामने आये थे, जो 2017 में बढ़कर 188,401 हो गए थे। यह मामलों में होने वाली 300 फीसदी से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। जोकि पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा है। पर वैज्ञानकों ने इससे बचने का एक अन्य उपाय खोज निकला है।

दा कामनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च आर्गेनाईजेशन (सीएसआईआरओ), राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी, ऑस्ट्रेलिया और क्वींसलैंड हेल्थ के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे टूल को विकसित करने में सफलता हासिल की है जो वैश्विक स्तर पर डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के फैलने की भविष्यवाणी कर सकता है। यह टूल इन बीमारियों को उनके स्रोत से ही ट्रैक कर सकता है। जोकि इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्टेशन एसोसिएशन के यात्रा सम्बन्धी डेटा और ग्लोबल हेल्थ डेटा एक्सचेंज से प्राप्त डेंगू के मामलों और उनकी दर पर आधारित है। इन आंकड़ों की सहायता से यह उपकरण इन बीमारियों के फैलने की गति और स्रोत के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकता है। इस विषय में एक विस्तृत शोध अंतराष्ट्रीय जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित हुआ है। जिसमें इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी है। यह अनुसन्धान डिजीज नेटवर्क एंड मोबिलिटी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। जिसका उद्देश्य मानव में फैल रही संक्रामक बीमारियों के बारे में रियल टाइम में सूचना देना और उसके लिए निगरानी प्रणाली को विकसित करना है।

 

कितना कारगर है यह उपकरण

सीएसआईआरओ के डेटा साइंस डिवीज़न में पोस्टडॉक्टरल फेलो डॉ जेस लेबिग ने बताया कि "अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यात्रियों के जरिये डेंगू की बीमारी डेंगू ग्रस्त देशों से अन्य स्वस्थ देशों में तेजी से फैल सकती है। विश्व स्वस्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की लगभग आधी आबादी पर डेंगू का खतरा मंडरा रहा है। यदि हम इससे ग्रसित लोगों के यात्रा सम्बन्धी व्यवहार को समझ लेते हैं, तो हम हर महीने विभिन्न देशों में यात्रा के जरिये फैलने वाले संक्रमण के मामलों का अनुमान लगा सकते हैं। यह टूल संक्रमण के मूल स्रोत देश के साथ-साथ उन मार्गों को भी उजागर करने में सक्षम है, जिनके माध्यम से डेंगू सबसे अधिक फैलता है।"

क्युयूटी के प्रोफेसर राजा जुर्डक ने बताया कि, "कई स्थानों पर डेंगू के संक्रमण का पता ही नहीं चलता और न ही उसके बारे में स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा कोई जानकारी दी जाती है। जिससे जोखिम की निगरानी करना और संक्रमण के प्रसार को रोकना मुश्किल हो जाता है।" "हाल में किये गए अध्ययनों के अनुसार, लगभग 92 फीसदी मामलों में जागरूकता की कमी और गलत निदान के कारण स्वास्थ्य अधिकारियों को संक्रमण के बारे में सूचना नहीं दी गयी।" उनके अनुसार यह टूल संक्रमण के खतरे के बारे में सूचना देने के बजाय अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक देश से दूसरे देश में फैलने वाले संक्रमण के मामलों की संख्या के बारे में जानकारी देने में सक्षम है। क्वींसलैंड हेल्थ में शोधकर्ता डॉ कैसी जानसन ने बताया कि "यह टूल डेंगू से बचने और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को उसके लिए तैयार रहने में अत्यंत मददगार हो सकता है।" "यह अधिकारियों की उन स्थानों को पहचानने में मदद कर सकता है, जहां संक्रमित यात्रियों के आगमन के बाद डेंगू के नए मामलों के फैलने का प्रकोप सबसे ज्यादा हो सकता है।" उनके अनुसार यह उपकरण डेंगू के साथ-साथ अन्य वेक्टर-जनित रोगों जैसे कि मलेरिया, जीका और चिकनगुनिया की रोकथाम में भी मददगार हो सकता है।