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देहरादून के सीज इलाकों में गुजर-बसर करने लायक राशन भी नहीं

कारगी ग्रांट की सीज किए गए इलाके में करीब 800 परिवार हैं। इनमें आधे किरायेदार हैं, जिनके पास यहां के राशन कार्ड नहीं हैं

By Trilochan Bhatt

On: Friday 10 April 2020
 
फोटो : त्रिलोचन भट्ट
फोटो : त्रिलोचन भट्ट फोटो : त्रिलोचन भट्ट

तीन से चार कोविड-19 पॉजिटिव मामले मिलने के बाद देहरादून के कारगी ग्रांट, लक्खीबाग और भगत सिंह कॉलोनियों को सीज कर दिया गया है। इन इलाकों में प्रवेश वाले सभी रास्तों को बैरिकेड, बल्लियां और जालियां लगाकर बंद कर दिया गया है और हर बैरिकेड पर पुलिस का पहरा बिठाया गया है। इन क्षेत्रों में प्रवेश का अब कोई रास्ता नहीं है। लेकिन, प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद यहां रह रहे कई परिवारों की राशन खत्म हो गया है। बैरिकेड के इस तरफ जब भी कोई हलचल होती है तो दूसरी तरफ के लोग अपनी जरूरत के सामान की लिस्ट लेकर बैरिकेड पर जमा हो जाते हैं।

कारगी ग्रांट की सीज किए गए इलाके में करीब 800 परिवार हैं। इनमें आधे किरायेदार हैं, जिनके पास यहां के राशन कार्ड नहीं हैं। कुछ के आधार कार्ड भी उनके पास नहीं हैं। यह इलाका आठ दिन पहले सील कर दिया गया था, लेकिन इन आठ दिनों में प्रशासन की ओर से सिर्फ दो बार 20-20 राशन के पैकेट उपलब्ध करवाए गए हैं। इन पैकेट में चार लोगों के परिवार का करीब एक हफ्ते का राशन और अन्य जरूरी चीजें हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता इमरान राणा बैरिकेड पर पहुंचकर जरूरतमंद लोगों को हरसंभव मदद पहुंचाने का प्रयास कर हैं। वह कहते हैं कि जो 40 पैकेट राशन मिला था, वह सिर्फ मकान मालिकों को दिया गया। उन्होंने करीब 150 सबसे ज्यादा जरूरतमंद परिवारों की लिस्ट प्रशासन को दी है। लेकिन, उन्हें अब तक मदद नहीं मिली है। इमरान कुछ समर्थ लोगों से आर्थिक मदद लेकर ऐसे परिवारों तक थोड़ा-बहुत राशन पहुंचा रहे हैं। ये राशन बैरिकेड के पास नाली की थोड़ी खुली जगह से अंदर दी जा रही है। सुशील सैनी भी इस काम में मदद कर रहे हैं। सुशील सैनी कहते हैं कि बैरिकेड से कुछ लोग पैसे देकर छोटा-मोटा जरूरी सामान मंगवा रहे हैं, लेकिन ज्यादातर मजदूर हैं, जिनका काम बंद हो गया है, उनकी व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है।

बैरिकेड के दूसरी तरफ खड़ी शहराज के घर राशन खत्म हो गया है। वह बैरिकेड के पास के घर में किराए पर रहती है। शहराज का पति मजदूरी करता था, जिसकी 8 महीने पहले मृत्यु हो गई है। वह खुद मजदूरी करके चार बच्चों को पाल रही है। काम बंद और ऊपर से कॉलोनी सीज हो जाने से उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं है। मूलरूप से बिजनौर निवासी गुलजार बार्बर की दुकान पर नौकरी करता है। मुजफ्फरनगर का इकराम कारपेंटर की दुकान पर और दानिश गाड़ियों की मरम्मत करने वाली दुकान पर काम करते हैं। तीनों परिवार के साथ किराये के घर पर रहते हैं। बैरिकेड के दूसरी तरफ इस उम्मीद के साथ जमे हुए हैं कि कोई उन तक राशन पहुंचाएगा।