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यूपी के इन 12 जिलों में है 50 फीसदी कोरोना संक्रमण, उच्च पॉजटिविटी रेट बताता है कि टेस्टिंग में खिलवाड़ जारी

पॉजटिविटी रेट के उच्च होने का मतलब है कि टेस्ट में पॉजिटिव मिलने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। इसके अलावा कुल जांचें बेहद कम हैं और समुदाय में संक्रमित हो रहे लोगों की जांचें नहीं हो रहीं।

By Vivek Mishra

On: Monday 24 May 2021
 

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण का चढ़ता हुआ ग्राफ बड़ी तेजी से नीचे गिरा है। लेकिन अभी राज्य के 12 जिले ऐसे हैं जहां पॉजिटिविटी रेट काफी ज्यादा (5 फीसदी से ज्यादा) है और इन सभी 12 जिलों में कुल सक्रिय मामलों की संख्या 2000 से ज्यादा है। 

21 मई, 2021 को बताया गया था कि इन 12 जिले में मई महीने की पॉजिटिविटी दर 5.2 से लेकर अधिकतम 14.8 प्रतिशत तक है।  योगी सरकार देश के अन्य राज्यों से तुलना करते हुए टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट के मॉडल पर चलने वालों में खुद को सबसे खरा और बेहतर बता रही है, लेकिन यह आंकड़े कुछ और कहानी कहते हैं।

डाउन टू अर्थ ने आधिकारिक आंकड़ों की पड़ताल की तो पाया कि 21 मई, 2021 को करीब 50 फीसदी कोविड संक्रमण के मामले राज्य के 12 जिलों (अर्बन) में थे और इन 12 जिलों में ही कोरोना जांच की टेस्टिंग (करीब 50 फीसदी) केंद्रित थी, जबकि शेष 63 जिलों में बाकी 50 फीसदी टेस्ट हो रहे थे। इतना ही नहीं जिन 12 जिलों में जांच और मामले ज्यादा थे वहां कांटेक्ट ट्रेसिंग की भी हालत खराब थी। भारत सरकार के मुताबिक प्रत्येक कोविड मरीज के संपर्क में आने वाले 25 से 30 लोगों की कोविड जांच होनी चाहिए, जबकि प्रमुखता वाले इन जिलों में ही कांटेक्ट ट्रेसिंग 8 से ज्यादा नहीं है।  (नीचे टेबल देखें ः) 

इस सारिणी में आपने देखा कि किस तरह 21 मई, 2021 को उत्तर प्रदेश के कुल कोविड सक्रिय मामलों 103275 में 44203 कोविड के सक्रिय मामले सिर्फ 12 जिलों में थे और शेष 59072 सक्रिय कोविड मामले 63 जिलों में थे। प्रदेश सरकार शुरु से ही इन्हीं जिलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। 

अप्रैल महीने के आखिरी दिनों में रोजाना रिकॉर्ड 34 हजार से ज्यादा कोविड संक्रमण पॉजिटिव मामले सामने आ रहे थे। उस वक्त भी यूपी के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इतने मामलों में अगर प्रत्येक से 30 लोगों की कांटेक्ट ट्रेसिंग की गई तो यह आंकड़ा 10.50 लाख से ज्यादा होगा, यानी इतने ही लोगों की हमें उसी दिन कोरोना जांच भी करनी होगी, जो कि अभी संभव नहीं है। डाउन टू अर्थ ने उस वक्त कांटेक्ट ट्रेसिंग की खराब हालत पर रिपोर्ट लिखी थी, आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

अप्रैल महीने में जब कोरोना संक्रमण पीक पर था उस वक्त इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार सिर्फ सात जिलों में ज्यादा केंद्रित थी, इनमें वाराणसी, लखनऊ, कानपुर नगर, मेरठ, बरेली, गोरखपुर शामिल थे। इन्हीं सात जिलों में सबसे पहले एक मई से नगरीय बूथों पर 18-44 आयु के लिए वैक्सीन भी शुरू की गई थी। अभी 21 मई को उच्च पॉजिटिविटी रेट के आधार पर जिन 12 जिलों को चुना गया है उनमें पांच जिले अब भी शामिल हैं। 

सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 50 फीसदी कोविड सक्रिय मामलों की हिस्सेदारी करने वाले इन 12 जिलों की मई में पॉजिटिविटी दर इस प्रकार रही : मेरठ (14.2 फीसदी), लखनऊ में 8 फीसदी, गौतमबुद्ध नगर में 12.2 फीसदी, गोरखपुर में 10.2 फीसदी, सहारनपुर में 13.4 फीसदी, वाराणसी में 8.0 फीसदी, मुजफ्फर नगर में 13.5 फीसदी, बरेली में 10.3 फीसदी, मुरादाबाद में 13.6 फीसदी, देवरिया में 8.8 फीसदी, बुलंदशहर में 5.2 फीसदी,  गाजियाबाद में 11.1 फीसदी। 

एक्सपर्ट कोविड संक्रमण की दर को 5 फीसदी से नीचे रखने की सलाह देते हैं। लेकिन ऐसा क्यों है कि सरकार इन्हीं जिलों में ज्यादा केंद्रित है और इन्हीं जिलों की पॉजिटिविटी रेट ज्यादा है?

पॉजटिविटी रेट से सार्स-कोव-2 कोरोनावायरस संक्रमण के समुदाय में फैलने की सही दर पता चलती है। साथ ही यह भी पता चलता है कि कोविड संक्रमित होने वालों की जांच किस दर से की जा रही है? इन दोनों सवालों के जवाब पॉजिटिविटी रेट से बहुत ही बेहतर तरीके से मिलते हैं। 

पॉजटिविटी रेट के उच्च होने का मतलब है कि टेस्ट में पॉजिटिव मिलने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। इसके अलावा कुल जांचें बेहद कम हैं। साथ ही समुदाय में संक्रमित हो रहे अन्य लोगों की जांचे नहीं हो रही हैं। इसे बढ़ाया जाना चाहिए और आराम मुद्रा में नहीं आना चाहिए। 

ऐसे में 12 जिलों में उच्च पॉजिटिविटी रेट यह बताता है कि आस-पास टेस्टिंग काफी कम है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्रों में। 

इसके अलावा दूसरा मुद्दा कोविड की लंबित जांचों का है। एंटीजन टेस्ट के मुकाबले आरटी-पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव मिलने वालों की संख्या ज्यादा देखी गई है। प्रदेश के इन 12 जिलों में कुल जांच का 40 से 50 फीसदी कोविड जांच आरटीपीसीआर टेस्ट के जरिए किया जा रहा है। राज्य में इस वक्त सरकारी आरटी-पीसीआर जांच की क्षमता 146640 है। औसत 115000 जांचें इन लैबों में अभी की जा रही हैं। 

10 मई, 2021 तक आरटीपीसीआर जांचों की पेंडेंसी 72 घंटों से ज्यादा 2 लाख की थी। हालांकि, इसमें सुधार हुआ है इसके बावजूद अभी 24 घंटे की पेडेंसी में 21 मई को 53333 जांचे पेडिंग थी, जो 24 मई तक 24 घंटे की पेडेंसी की यही स्थिति बनी रही। 

आरटीपीसीआर रिपोर्ट न मिलने और अस्पतालों से डिस्चार्ज की संख्या बढ़ाते जाने के कारण कोविड संक्रमण मामलों की आंकड़ों में तस्वीर जरूर बदली हुई नजर आती है लेकिन ग्रामीणों की स्थिति अब भी खराब है। कई शमशान घाटों पर चिताओं का जलना जारी है।