अपनी जान की सुरक्षा मांग रहे दूसरों की जान बचाने वाले

कोरोना काल में अपनी सुरक्षा को मांग को लेकर उत्तराखंड में नियुक्त नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े 4500 से अधिक संविदा कर्मचारी हड़ताल पर हैं

By Trilochan Bhatt

On: Monday 07 June 2021
 
नियुक्त नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं। फोटो: त्रिलोचन भट्ट
नियुक्त नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं। फोटो: त्रिलोचन भट्ट नियुक्त नेशनल हेल्थ मिशन से जुड़े कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं। फोटो: त्रिलोचन भट्ट


पिछले एक साल से ज्यादा समय के कोविड काल में उत्तराखंड में फ्रंटलाइन वर्कर्स के रूप में काम कर रहे 4500 नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) से जुड़े कर्मचारी अब अपनी जान और भविष्य की सुरक्षा मांग रहे हैं। राज्य में दर्जनों हेल्थ प्रोग्राम का क्रियान्वयन और संचालन करने के लिए जिम्मेदार ये कर्मचारी इन दिनों हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल को उन्होंने होम आईसोलेशन नाम दिया है।

इस हड़ताल से कोविड संक्रमण की रोकथाम के कई काम रुक गये हैं। एनएचएम कर्मचारी पहली जून से होम आईसोलेशन पर चले गये थे। पहले उन्होंने 6 जून तक हड़ताल की घोषणा की थी। 6 जून को संगठन के पदाधिकारियों की अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बातचीत हुई, लेकिन सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद कर्मचारियों ने और तीन दिन यानी 9 जून तक होम आईसोलेशन हड़ताल की मियाद बढ़ा थी। मौजूदा परिस्थितियां बता रहे हैं कि आने वाले तीन दिन में भी इस मसले पर कोई निर्णय लिये जाने की संभावना बहुत कम है। ऐसे में एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल और आगे बढ़ सकती है।


कोविड काल में इन संविदा कर्मचारियों की सबसे बड़ी नाराजगी यह है कि उन्हें राज्य सरकार ने कोरोना वाॅरियर्स तो घोषित किया, लेकिन इसका कोई लाभ उन्हें नहीं दिया गया। फ्रंटलाइन वर्कर्स के रूप में काम करते हुए यदि कोई कर्मचारी संक्रमित हो जाता है तो उसे सरकारी अस्पताल में बेड तक नहीं मिलता। इलाज का खर्च भी उसे खुद वहन करना पड़ रहा है। कोविड की दूसरी लहर में एनएचएम से जुड़े कई कर्मचारी संक्रमित हुए, लेकिन उन्हें किसी सरकारी अस्पताल में इलाज की सुविधा नहीं मिल पाई। उन्होंने घर पर रहकर या फिर खुद खर्च उठाकर अस्पताल में इलाज करवाया।

कोविड संक्रमण के दौरान एनएचएम के कर्मचारियों ने कई मोर्चों पर काम किया। राज्य में ज्यादातर चेकपोस्टों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट पर सैंपलिंग की जिम्मेदारी एनएचएम कर्मचारियों को दी गई थी। इसके अलावा घर-घर जाकर सैंपलिंग करने, होम आईसोलेशन वाले पेशेंट का किट पहुंचाने और समय-समय पर उनकी काउंसिलिंग करने, सचिवालय, सीएम आवास, राजभवन जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर सैंपलिंग और वैक्सीनेशन करने, कोविड और वैक्सीनेशन संबंधी सभी तरह के आंकड़े और रिपोर्ट भारत सरकार के पोर्टल पर अपलोड करने, वैक्सीनेशन स्लाॅट मैनेज करने जैसे कई काम इन कर्मचारियों को सौंपे गये थे।

ये सभी काम पूरी जिम्मेदारी से निभाने के कारण राज्य सरकार ने एनएचएम के तहत काम करने वाले सभी डाॅक्टरों, नर्सों, कम्पाउंडरों, कम्प्यूटर ऑपरेटरों और मैनेजमेंट कर्मचारियों को कोरोना वाॅरियर घोषित करके सभी में 11-11 हजार रुपये देने की घोषणा की थी। लेकिन, जब सरकारी आदेश जारी हुआ तो उसमें केवल अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों को ही शामिल किया गया। कोविड संक्रमण के शुरुआती दौर में अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों को सरकार की ओर से होटलों आदि में रहने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन अस्पताल से बाहर सैंपलिंग करने जैसे संवेदनशील काम में लगे एनएचएम के कर्मचारियों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। पूरे कोविड काल में उन्हें शाम को अपने घर जाना पड़ा, जिससे कई कर्मचारियों के परिवार भी संक्रमित हुए।

कोविड के इतर भी उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को कई हेल्थ कार्यक्रमों के संचालन और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें मुख्य रूप से मातृत्व स्वास्थ्य और शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, किशोर एवं बाल स्वास्थ्य, टीकाकरण, हीमोग्लोबिनपैथी, पीएनडीटी, आशा कार्यक्रम, हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर, शहरी स्वास्थ्य मिशन, आईडीएसपी, तंबाकू नियंत्रण, आरएनटीसीपी आदि शामिल हैं। खास बात यह है कि इस कार्यक्रमों में मैनेजमेंट से लेकर तकनीकी और हेल्थ संबंधी सभी कर्मचारियों को संविदा पर नियुक्ति दी गई है। इनसे बहुत मामूली मानदेय में काम करवाया जाता है।

एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन उत्तराखंड के मीडिया प्रभारी पूजन नेगी कहते हैं कि उनकी मुख्य मांग सामूहिक स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा की है, ताकि कोविड संक्रमण के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर्स के रूप में काम करने वाले एनएचएम कर्मचारियों का इलाज हो सके और यदि किसी कर्मचारी की मौत हो जाए तो उसके परिवार को आर्थिक सहायता मिल सके। पूजन नेगी के अनुसार उन्हें राज्य सरकार की ओर से गोल्डन कार्ड तक की सुविधा नहीं दी गई है। इसके अलावा वे लाॅयल्टी बोनस की मांग कर रहे हैं, जो 2018 से नहीं मिला है। संगठन की ओर से 18000 रुपये न्यूनतम वेतन और हर वर्ष 5 प्रतिशत वेतन बढ़ोत्तरी जैसी पुरानी मांगें भी होम आईसोलेशन हड़ताल के माध्यम से की जा रही हैं।

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