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क्या है भीलवाड़ा मॉडल और जयपुर जैसे हॉटस्पॉट में क्यों ये काम नहीं कर रहा?

क्या जयपुर में भीलवाड़ा मॉडल लागू करने में प्रशासन ने देरी की है या यहां ये मॉडल काम ही नहीं कर रहा?

By Madhav Sharma

On: Saturday 11 April 2020
 
राजस्थान के भीलवाड़ा में अस्पताल से ठीक होकर जाता एक मरीज। फोटो: टि्वटर - @ankitbaldi
राजस्थान के भीलवाड़ा में अस्पताल से ठीक होकर जाता एक मरीज। फोटो: टि्वटर - @ankitbaldi राजस्थान के भीलवाड़ा में अस्पताल से ठीक होकर जाता एक मरीज। फोटो: टि्वटर - @ankitbaldi

पूरे देश में इस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए भीलवाड़ा मॉडल की चर्चा है। राजस्थान सरकार की इस मॉडल को लेकर देशभर में तारीफ भी हो रही है। वहीं, केन्द्र सरकार भी सबसे प्रभावित जगहों इस मॉडल को लागू करने की बात कर रही है। लेकिन भीलवाड़ा के बाद राजस्थान के कई और शहर कोरोनो के लिए हॉटस्पॉट बन गए हैं। 27 मार्च को जहां वायरस का फैलाव सिर्फ 9 जिलों में था वो अब 24 जिलों तक हो गया है।

सबसे ज्यादा केस प्रदेश की राजधानी जयपुर के रामगंज क्षेत्र से आए हैं। 11 अप्रैल को सुबह 7 बजे तक जयपुर में 221 कोरोना पॉजिटिव केस आए हैं। 10 अप्रैल को 53 नए केस शहर में सामने आए हैं। जयपुर में आए सामने आए मामलों में अधिकतर रामगंज क्षेत्र से जुड़े हैं। इसीलिए यह सवाल उठ रहा है कि क्या जयपुर में भीलवाड़ा मॉडल लागू करने में प्रशासन ने देरी की है या यहां ये मॉडल काम ही नहीं कर रहा?, लेकिन इससे पहले यह जानना भी जरूरी है कि आखिर वो भीलवाड़ा मॉडल क्या है जिसकी चर्चा पूरे देश में है।

क्या है भीलवाड़ा मॉडल और कैसे यहां स्थिति काबू हुई
9 अप्रैल को कोरोना पॉजिटिव का एक और मरीज भीलवाड़ा में मिला है। इससे पहले 4 अप्रैल और 30 मार्च को एक-एक केस मिला था। मार्च के शुरूआती हफ्तों में भीलवाड़ा देश के 10 कोरोना हॉटस्पॉट में शुमार था। राजस्थान में जब कोरोना के कुल 18 केस थे तब इनमें से 12 अकेले भीलवाड़ा में थे। लेकिन भीलवाड़ा जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने मिलकर स्थिति को संभाला। सबसे पहले पूरे शहर में कर्फ्यू लगाया। ब्रजेश बांगड़ अस्पताल (जहां पहला पॉजिटिव मरीज एक डॉक्टर आया) के संपर्क में आए करीब छह हजार लोगों को लिस्ट बनाकर तलाशा गया। दो दिन के अंदर ही सभी की पहचान की गई और उन्हें आइसोलेट किया गया ताकि कोरोना की कड़ी टूट सके। प्रशासन ने घरों में जरूरी सामान की पहुंच निश्चित की। साथ ही विभिन्न धर्मगुरूओं से सहायता ली गई कि वे लोगों से घरों में ही रहने की अपील करें। पुलिस ने कर्फ्यू तोड़ने वाले 600 वाहनों को जब्त भी किया।

बेहद सख्ती के साथ लॉक डाउन और कर्फ्यू के साथ-साथ पूरे जिले की करीब 30 लाख लोगों की तीन बार स्क्रीनिंग का दावा भीलवाड़ा प्रशासन कर रहा है। भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल के अधीक्षक अरुण गौड़ का कहना है कि हमने 25 कोरोना पॉजिटिव मरीजों को ठीक कर दिया है। इनमें से 15 को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है और 10 मरीज जो जनरल वार्ड में शिफ्ट किए जा चुके हैं, उनकी तीसरी रिपोर्ट आना बाकी है। वहीं, 24 ऐसे मरीज भी भर्ती किए गए हैं, जिनमें थोड़े लक्षण दिखाई दिए हैं, लेकिन ये पॉजिटिव नहीं हैं। इनका इलाज चल रहा है।

गौड़ आगे बताते हैं, ‘भीलवाड़ा के हर विभाग के अधिकारियों से लेकर जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता ने पूरे जज्बे और ईमानदारी से काम किया है।’
भीलवाड़ा के डीएम राजेन्द्र भट्ट के अनुसार लॉकडाउन के हमने थोड़े दिन के लिए बढ़ाया। प्रशासन ही घरों तक दूध, दवाई और खाने की अन्य चीजें उपलब्ध करा रहा है। किसी को कोई समस्या नहीं हो रही। लोगों को अगर किसी भी चीज की जरूरत है, वे हमें कॉल कर रहे हैं। इसके लिए प्रशासन ने 5 कंट्रोल रूम भी बनाए हैं।
भीलवाड़ा प्रशासन ने हालातों के देखते हुए जिले के 42 अस्पताल, होटलों में क्वेरेंटाइन के लिए 1551 बेड की व्यवस्था की। यही कारण है कि बीते 10 दिनों में यहां सिर्फ एक कोरोना पॉजिटिव मरीज पाया गया है।

हालांकि भीलवाड़ा जिले के एक पूर्व सीएमएचओ नाम ना छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘बेशक जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अच्छा काम किया है, लेकिन इतने सख्त कर्फ्यू की जरूरत नहीं थी। लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए प्रशासन के भरोसे रखने की जरूरत नहीं थी। जरूरी यह था कि विभाग बांगड़ अस्पताल में डॉक्टर के संपर्क में आए सभी लोगों का पता लगाता और उन्हें क्वारंटाइन करता। जो शुरूआत में लापरवाही के कारण नहीं हो पाया। हालांकि बाद में सभी ने मजबूत इच्छा शक्ति के साथ काम किया और सफलता पाई है, लेकिन यह इच्छाशक्ति बनाए रखने की अभी जरूरत है।’

जयपुर में क्यों काबू से बाहर हो रही परिस्थितियां?
पूरे राजस्थान में शनिवार सुबह तक 579 कोरोना पॉजिटिव सामने आ चुके हैं। हैं। इनमें से दो इटली और 50 नागरिक दूसरे देशों से लाए गए हैं। जयपुर में 221 मरीज अभी तक सामने आ चुके हैं। 10 अप्रैल को ये पूरे राज्य के कुल मरीजों का 38 फीसदी यानी 53 नए मामले सामने आए। इनमें से अधिकतर मामले रामगंज क्षेत्र से जुड़े हैं। हालांकि रामगंज के अलावा अब शास्त्रीनगर, राजापार्क जैसे पॉश कॉलोनियों में भी कोरोना के मामले मिलने लगे हैं।  जयपुर में बेकाबू होते मामलों से अब सवाल उठ रहा है कि भीलवाड़ा की तरह जयपुर में स्थिति काबू में क्यों नहीं हो पा रहीं?

इस सवाल के जबाव में मीडिया से बात करते हुए स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह कहते हैं कि रामगंज में जनसंख्या घनत्व बहुत अधिक है इसीलिए यहां सोशल डिस्टेंसिंग शारीरिक रूप से संभव नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों को क्वेंरेंटाइन करना होगा। हम रामगंज में भीलवाड़ा से 10 गुना ज्यादा लोगों को क्वेंरेंटाइन कर रहे हैं। घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है। शुक्रवार को 15 मरीज इसी प्रक्रिया से मिले हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा का मानना है कि रामगंज और भीलवाड़ा की भौगोलिक स्थितियां बिलकुल अलग हैं। इसीलिए रामगंज के लिए सरकार विशेष मॉडल पर काम कर रही है।

वहीं, रामगंज के कोरोना हॉटस्पॉट बनने के कारण गिनाते हुए सवाई मानसिंह अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेन्द्र सिंह कहते हैं, ‘भीलवाड़ा और जयपुर की स्थितियां बिलकुल अलग है। यहां जनसंख्या का घनत्व ज्यादा है। दूसरा कारण यह भी है कि भीलवाड़ा के जिस अस्पताल से संक्रमण फैला और संक्रमित मिले 70 फीसदी लोग उसी अस्पताल के कर्मचारी या स्वास्थ्य से संबंधित लोग थे। चूंकि डॉक्टर पढ़े-लिखे और स्वास्थ्य के विषय में जागरूक होते हैं इसीलिए सबने आगे से सामने आकर टेस्ट कराए। प्रशासन ने डॉक्टरों के संपर्क में आए लोगों का तुरंत पता लगा लिया। यही भीलवाड़ा मॉडल में सबसे बड़ी सफलता है। भीलवाड़ा प्रशासन के साथ-साथ वहां की जनता की भी ये सफलता है। लेकिन दूसरे शहरों में इसका उल्टा असर हुआ। लोगों के मन में यह भय व्याप्त हो गया कि अगर वे अस्पताल जाएंगे तो उन्हें कोरोना हो जाएगा। इसीलिए वे लक्षणों को स्वास्थ्य विभाग की टीम से छुपा रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि घर में रहकर वे ज्यादा सुरक्षित हैं, जबकि ऐसा नहीं है। क्योंकि रामगंज जैसे सघन आबादी क्षेत्र में घर सुरक्षित नहीं हैं। ना चाहते हुए भी एक-दूसरे के संपर्क में लोग आ रहे हैं।’

वहीं, भीलवाड़ा में कलेक्टर रह चुके रिटायर्ड आईएएस ओंकार सिंह का कहना है कि भीलवाड़ा, जयपुर से बहुत छोटा शहर है। जनसंख्या कम है, जिसे आसानी से चारों तरफ से सील कर दिया गया। जयपुर का प्रशासन ऐसा क्यों नहीं कर पा रहा ये समझ नहीं आ रहा।
बता दें कि बाड़मेर के कितनोरिया गांव में 8 अप्रेल को जो पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला है। वह जयपुर से ही यात्रा कर बाड़मेर पहुंचा है। पीड़ित कितनोरिया के सरकारी स्कूल में प्रिसिंपल है।

डाउन-टू-अर्थ ने प्रदेश के स्वास्थ्य राज्य मंत्री सुभाष गर्ग से यह सवाल किया कि क्या जयपुर में भीलवाड़ा मॉडल लागू करने में देरी की गई या ये मॉडल यहां काम ही नहीं कर रहा? जवाब में गर्ग ने कहा, ‘ऐसा नहीं है। सिर्फ जयपुर ही नहीं बल्कि झुंझुनू, बीकानेर, चुरू सब जगह भीलवाड़ा मॉडल ही लागू किया जा रहा। जयपुर में टेस्ट भी बड़ी संख्या में हो रहे हैं, जल्द ही स्थिति को काबू कर लिया जाएगा।’